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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 5785 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0433/2024, अन्तगर्त धारा 70(2) भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 5एल/6 पॉक्सो एक्ट, थाना गढ़मु्वे ्षर, िजला हापुड़ में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. कायार्लय आख्या के आख्या के अनुसार सूचनाकतार् को ्िि्वगत रूप से तामील कराया जा चुका है, िकतु सूचनाकतार् की ओर से कोई उपिस्थत नहीं है।
4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् में के वल छेड़खानी का आ्षेप विणत िकया गया, िकतु किथत पीिड़ता के धारा 180 व 183 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के बयान में िमथ्या तथ्यों के आधार पर किथत अपराध कािरत करने अिभकथन िकया गया है। इससे पिरलि्षत हो रहा है िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् एवं किथत पीिड़ता के धारा 180 व 183 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता परस्पर िवरोधाभाष है। आगे यह भी कहा गया िक किथत पीिड़ता के िचिकक्सीय परी्षण आख्या के अनुसार अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है तथा पीिड़ता का िचिकत्सीय परी्षण करने वाली डाक्टर ्षारा अपने बयान में किथत अपराध होने के कोई ल्षण नहीं पाये जाने का कथन िकया गया है। िजससे अिभयोजन कहानी संिदग्ध पिरलि्षत हो रही है। आवेदक को मालमें में िमथ्या तथ्यों के आधार पर रंिजशन नािमत िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी Versus Counsel for Applicant(s) : Indra Dev Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Nirmal Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 29.08.2024 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5.
िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 17, 2025 CP.sahani BAIL No. 5785 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad