JAY SINGH ALIAS MONU KUMAR SHARMA v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS
BAIL/5818/2025 · 2025-10-16
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[ 2025 DAILYLAW 190883 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 5818 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 277/2024, अन्तगर्त धारा 376(2)एन, 323 भा०दं०िव० एवं धारा 5एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना सहतवार, िजला बिलया में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. कायार्लय आख्या, िदनांिकत 13.05.2025 के अनुसार सूचनाकतार् को नोिटस ्िि्व रूप से तामील करायी जा चुकी है, िकतु सूचनाकतार् ओर से कोई उपिस्थत नहीं है।
4.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् अित िवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्प्िीकरण नहीं िदया गया है। किथत पीिड़ता के धारा 161 व 164 दं०्ऺ०सं० के बयान से पिरलि्षत है िक वह समहत प्षकार है, िकतु दुराशय के तहत उसके ्षारा आवेदक को इस मामलें में नािमत िकया गया है। ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता िचिकत्सीय परी्षण के अनुसार बािलग है, िकतु पीिड़ता ्षारा अपने बयान में दुराशय के तहत किथत घटना पूवर् की िदखाकर अपने को घटना के समय अवयस्क दिशत िकया गया है, जबिक किथत पीिडता ने स्वयं बयान िदया िक वह हाईस्कू ल ्ऺमाण प्ऴ के अनुसार उसकी आयु 21 वषर् है तथा उसके ्षारा अपना बयान बािलग होने के उपरांत ही दजर् िकया गया है। सुसंगत तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता के िचिकत्सीय परी्षण आख्या के अनुसार अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है। आवेदक लगभघ एक वषर् से कारागार में िनरू्ध है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक Versus Counsel for Applicant(s) : Abhinav Kumar Pandey, Krishna Mohan Singh, Raj Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Jay Singh Alias Monu Kumar Sharma .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 17.11.2024 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5.
िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई
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वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 17, 2025 CP.sahani BAIL No. 5818 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad