LAJ THAKRANEY and ORS. v. STATE OF U.P. THROUGH PRINCIPAL SECRETARY HOME DEPTT. and ANR.
/1609/2020 · 2025-12-09
Gautam Chowdhary
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 188565 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPLICATION U/S 482 No. - 1609 of 2020 Court No. - 29 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदकगण लाज ठकराने एवं अęय की ओर से धारा 482 दं०Š०सं० के अęतगăत यह आवेदन पś, पिरवाद सं. 236 सन 2018 अęतगăत धारा 498ए/ 323/ 504 भा०दं०िव० एवं धारा 3/4 दहेज Šितषेध अिधिनयम, थाना गाजीपुर, िजला लखनऊ के िवDZान िवशेष सी.जे.एम (कĥटम) , सोनभŝ, DZारा पािरत ŠसंXान/तलबी आदेश िद० 13.02.2020 के िवɳǪ दायर िकया गया।
2. आवेदकगण के िवDZान अिधवǘा एवं िवDZान अपर शासकीय अिधवǘा को सुना तथा पśावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदकगण के िवDZान अिधवǘा के तकȍ को ũवणोपराęत, पśावली के पिरशीलन से ęयायालय ने पाया िक पिरवाद मȅ लगाए गए आरोप एक संXेय अपराध के कािरत होने का खुलासा करते हȈ और वह आरोप 200 व 202 दं.Š.सं. के बयान से पिरलिWत होता है। उन आरोपȋ को इस ęयायालय DZारा धारा 482 दं०Š०सं० के तहत अपनी शिǘ का Šयोग करते ɷए, बयान और आरोपȋ की शुǪता और िवǶसनीयता का आकलन करने की आवģयकता नहȂ है। इस ĥतर पर आवेदक/अिभयुǘ के िववािदत बचाव पर िवचार नहȂ िकया जा सकता है। तėनुसार उपरोǘ वाद की कायăवाही को रǩ करने की Šाथăना और पिरणामी कायăवाही अĥवीकृ त की जाती है।
4. इस ĥतर पर, आवेदकगण के िवDZान अिधवǘा का अनुरोध है िक आवेदक को अभी तक उपरोǘ मामले मȅ िगरफ् तार नहȂ िकया गया है और पुिलस आवेदकगण को िगरफ् तार करने के Šयास मȅ है, और संबंिधत अवर ęयायालय DZारा आवेदकगण के िखलाफ दĔडाĕमक ŠिŌया जारी की जा सकती है, इसिलए आवेदकगण के जमानत आवेदन पś पर िवचार करने के िलए Versus Counsel for Applicant(s) : Nadeem Murtaza, Harpreet Singh, Shubham Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Chandra Bhushan Laj Thakraney And Ors. .....Applicant(s) State Of U.P. Through Principal Secretary Home Deptt. And Anr. .....Opposite Party(s)
संबंिधत अवर ęयायालय को िनदȆश जारी कर िदया जाय।
5. माननीय उċचतम ęयायालय DZारा Satendra Kumar Antil Vs.
Central Bureau of Investigation and another (Apecial Leave to Appeal (Crl.) No. 5191 of 2021 के Šकरण को आदेश िद० 7-10-2021 DZारा पहले ही जमानत हेतु िदशा-िनदȆश देते ɷए िनĥतािरत िकया जा चुका है, इसके पdzात् अब संबंिधत अवर ęयायालय को जमानत देने के िलए उनके िववेक और िवचार को िनयंिśत करने वाले वैधािनक Šािवधानȋ को Šभािवत िकए िबना, इस ęयायालय DZारा कोई िविशǸ िनदȆश जारी करने की आवģयकता नहȂ है, Ćयȋिक यह अपेWा की जाती है िक संबंिधत िवचारण ęयायालय आवेदक के जमानत Šाथăना पś को िनĥतािरत करते समय माननीय उċचतम ęयायालय DZारा पहले से जारी आवģयक िदशा-िनदȆशȋ को Ęयान मȅ रखेगा।
6. उपरोǘ िटĚपिणयȋ के साथ, यह आवेदन पś अिęतम ɴप से िनĥतािरत िकया जाता है। December 9, 2025 S.Mishra A482 No. 1609 of 2020 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench