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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 185505 (ALL)

JAGDAMBA PRASAD SHUKLA @ JAGDAMBA v. LEARNED CIVIL JUDGE J.D. TEHSIL TARABGANJ DIST. GONDA AND ANOTHER

A227/6082/2025 · 2025-10-30

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6082 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ũी अɴण िसह को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया। 2. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ने कहा िक उęहȋने िसिवल जज (अवर खĔड), तरबगंज, गोĔडा को śुिटवश यािचका मȅ िवपWी बना िदया है तथा उęहȋने िसिवल जज का नाम यािचका मȅ िवपWी के ɴप से हटाने के िलए मौके पर अनुरोध िकया िजसे ĥवीकार िकया जाता है। यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा यािचका मȅ उपरोǘ संशोधन तुरंत समावेिशत करȅ। 3. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस यािचका DZारा यािचकाकताă ने िसिवल जज अवर खĔड तरबगंज गोĔडा को मूल वाद संćया 1905 वषă 2017 (जगदंबा Šसाद शुĆला बनाम रामलगन शुĆला) का शीŏ िनĥतारण करने का िनदȆश देने का अनुरोध िकया है। 4. यािचका मȅ मांगे गए अनुतोष एवं पािरत िकए जाने वाले आदेश के ɯिǸगत िवपWी को नोिटस िनगăत करने की आवģयकता नहȂ है। 5. उपरोǘ वाद यािचकाकताă ने िदनांक 04.09.2017 को Šĥतुत िकया था। Šितवादी ने िदनांक 22.10.2019 को िवचारण ęयायालय के समW उपिĥथित अंिकत की थी, िकतु उसने न तो Šितवाद पś Šĥतुत िकया और न ही बाद मȅ उपिĥथत ɷआ िजस कारण िदनांक 04.01.2023 को वाद एकपWीय ɴप से अŎसर हो गया। 6. िवपWी के Šाथăना-पś पर िदनांक 09.12.2024 को एकपWीय आदेश अपाĥत िकया गया तथा Šितवादी को अपना पW रखने हेतु अवसर Šदान िकया गया, िकतु यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा का कथन है िक Šितवादी ने अब तक Šितवाद पś Šĥतुत नहȂ िकया है तथा वाद के िनĥतारण मȅ िवलंब होने से यािचकाकताă को किठनाई हो रही है। Versus Counsel for Petitioner(s) : Arun Singh, Akshay Kumar Singh, Nadim Salmani Counsel for Respondent(s) : Jagdamba Prasad Shukla @ Jagdamba .....Petitioner(s) Learned Civil Judge J.D. Tehsil Tarabganj Dist. Gonda And Another .....Respondent(s) 7. उपरोǘ पिरिĥथितयȋ मȅ िसिवल जज अवर खĔड तरबगंज गोĔडा को मूल वाद संćया 1905 वषă 2017 (जगदंबा Šसाद शुĆला बनाम रामलगन शुĆला) िविधनुसार शीŏतापूवăक िबना िकसी पW को अनावģयक ĥथगन देते ɷए िनĥतािरत करने का िनदȆश िदया जाता है। तदनुसार, यािचका िनĥतािरत की जाती है। October 30, 2025 Sumit A227 No. 6082 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench