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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 184897 (ALL)

SMT. NEELAM DEVI v. SMT. BRIJ KUNWARI @ SHIV KALA

A227/6138/2025 · 2025-11-06

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6138 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा ने पूरक शपथ-पś Šĥतुत िकया िजसे अिभलेख पर िलया जाए। 2. यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा ũी उमेश चęŝ तथा िवपWी के िवDZान अिधवǘा ũी राजेęŝ Šसाद यादव को सुना व पśावली का अवलोकन िकया। 3. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस िरट यािचका DZारा यािचकाकतȃ ने िसिवल जज अवर खĔड गोĔडा DZारा मूल वाद संćया 385 वषă 2005 मȅ पािरत आदेश िदनांक 04.11.2024 की वैधता को चुनौती दी है िजसके DZारा यािचकाकतȃ का अĥथायी िनषेधाXा Šाथăना-पś िनरĥत कर िदया गया है। आदेश 04.11.2024 की वैधता को चुनौती देते ɷए यािचकाकतȃ ने Šकीणă िसिवल अपील संćया 56 वषă 2024 Šĥतुत की जो िवDZान अपर जनपद ęयायाधीश/िवशेष ęयायाधीश (पॉĆसो एĆट), गोĔडा मȅ िनणăय तथा आदेश िदनांक 09.07.2025 के माĘयम से िनरĥत कर दी तथा अपीलीय आदेश की वैधता को भी इस यािचका के माĘयम से चुनौती दी है। 4. Šģनगत संपिǥ पर िवपWी एक पंजीकृ त वसीयत िदनांक 31.05.2000 के माĘयम से अपना ĥवािमĕव का दावा करते हȈ िजसकी वैधता को यािचकाकतȃ ने वाद के माĘयम से चुनौती दी है। 5. यǯिप यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा ने यािचका के समथăन मȅ िवĥतृत तकă िकए हȈ, िकतु अंततः उęहȋने इस अनुतोष के िलए अपने तकă सीिमत िकए िक िवचारण ęयायालय मूल वाद को शीŏतापूवăक िनĥतािरत करȅ तथा मूल वाद के िनĥतारण तक िवपWी Šģनगत संपिǥ पर िकसी तृतीय पW के अिधकारȋ का सृजन न करȅ। 6. यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा के इस सीिमत अनुरोध पर िवपWी के िवDZान अिधवǘा Versus Counsel for Petitioner(s) : Umesh Chandra, Pradeep Kumar Shukla Counsel for Respondent(s) : Rajendra Prasad Yadav Smt. Neelam Devi .....Petitioner(s) Smt. Brij Kunwari @ Shiv Kala .....Respondent(s) को कोई आपिǥ नहȂ है। 7. तदनुसार, यािचका इस िनदȆश के साथ िनĥतािरत की जाती है िक िवDZान िसिवल जज अवर खĔड गोĔडा मूल वाद संćया 385 वषă 2005 (अंगनू बनाम ũीमती िŢज कु मारी) का िनĥतारण िविधनुसार शीŏतापूवăक, िबना िकसी पW को अनावģयक ĥथगन देते ɷए करना सुिनिdzत करȅगे। वाद मȅ Šģनगत संपिǥ के संबंध मȅ कोई भी पW िकसी तृतीय पW के संबंध मȅ अिधकार का सृजन नहȂ करȅगे। November 6, 2025 Sumit A227 No. 6138 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench