DEEKSHA SHUKLA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
/6865/2025 · 2025-11-27
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 184529 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6865 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा ũी पंकज कु मार शुĆला की तरफ से उपिĥथत िवDZान अिधवǘा ũी Xानेęŝ पाठक तथा राčय सरकार के िवDZान अिधवǘा ũी राम कु मार मौयाă को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस यािचका DZारा यािचकाकतȃ ने Šधान ęयायाधीश पिरवािरक ęयायालय, गोĔडा को वाद संćया 1297 सन 2025 (ũीमती दीWा शुĆला बनाम आिदĕय पाĔडेय) के शीŏ िनĥतारण का िनदȆश िदये जाने का अनुरोध िकया है।
3. िवDZान ĥथायी अिधवǘा ने Šारंिभक आपिǥ करते ɷए कथन िकया िक इस यािचका मȅ राčय सरकार को गलत ɴप से पWकार बनाया गया है, जबिक राčय सरकार वाद मȅ पWकार नहȂ है और वह इस यािचका मȅ न तो आवģयक और न ही उिचत पWकार है।
4. इस आपिǥ के उǥर मȅ यािचकाकतȃ के िवDZान अिधवǘा कोई उǥर नहȂ दे सके । तėनुसार, यािचका पWकारȋ के कु संयोजन के कारण ɮिषत है।
5. Šģनगत वाद िहęɮ िववाह अिधिनयम की धारा 13बी के अंतगăत िदनांक 06.11.2025 को Šĥतुत िकया गया है तथा पािरवािरक ęयायालय ने पWȋ को िदनांक 13.01.2026 को मĘयĥथता की कायăवाही के िलए उपिĥथत होने का आदेश िकया तथा वाद की सुनवाई हेतु िदनांक 07.05.2026 की ितिथ िनयत कर दी। इस यािचका मȅ यह कहा गया है िक जहाँ पWȋ की आपसी सहमित से िववाह िवċछेद मांगा जा रहा हो वहाँ 6 माह बाद यािचका के िनĥतारण की कोई आवģयकता नहȂ है।
6. िहęɮ िववाह अिधिनयम की धारा 13बी के Šािवधान िनĞन Šकार हȈ- "जब अिधिनयम मȅ ही 6 माह बाद यािचका के िनĥतारण का Šािवधान है तो इस वैधािनक Šािवधान का उġलंघन सामाęयतः Versus Counsel for Petitioner(s) : Pankaj Kumar Shukla Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Deeksha Shukla .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another .....Respondent(s)
नहȂ िकया जाना चािहए।"
7. यǯिप माननीय उċचतम ęयायालय ने अपने िनणăय अमरदीप िसह बनाम हरवीन कौर (2017) 8 SCC 746 मȅ यह अवधािरत िकया है िक िवशेष पिरिĥथितयȋ मȅ 6 माह की अविध मȅ छू ट दी जा सकती है, यािचका मȅ कोई भी ऐसी िवशेष पिरिĥथित विणत नहȂ की गयी है। ऐसी पिरिĥथित मȅ इस यािचका मȅ हĥतWेप करने का कोई समुिचत आधार नहȂ है।
8. यािचका बलहीन है तėनुसार, िनरĥत की जाती है।
9.
यािचकाकतȃ पािरवािरक ęयायालय के समW समुिचत कारण दिशत करते ɷए शीŏ िनĥतारण हेतु Šाथăना-पś देने के िलए ĥवतंś हȋगे। November 27, 2025 Ankit A227 No. 6865 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench