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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL APPEAL No. - 201 of 2011 Court No. - 13 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard learned counsel for the appellant(s) and learned AGA for the State Sri Badul Hasan. 2. The instant Criminal Appeal under Section 374 (2) Cr.P.C. has been filed by the appellants namely Jitendra S/o Munnu and Chandan S/o Alok Soni challenging the judgment and order 21.12.2010 passed by learned Additional Sessions Judge, F.T.C. No. 30, Barabanki in Session Trial No. 38 of 2009 thereby sentencing the appellants under Section 489 IPC for a period of six months and fine of Rs. 5000/- each. 3. The story of prosecution, in nutshell, is to the effect that on 23.06.2008 accused- appellants namely Jitendra S/o Munnu and Chandan S/o Alok Soni were apprehended by the police party consisting of S.I. R.C. Pandey, Constable/Arvind Singh, Constable/Manoj Kumar, S.I./Shyam Babu Shukla, Constble/Rampratap, at about 06:30 PM. 4. From the possession of accused/Jitendra S/o Munnu eight fake currency notes of Rs. 100/- having No. 3 A N 686677 were recovered. Six fake currency notes of Rs. 100-/ having No. 6 A N 686677 were recovered from the possession of the accused /Parasnath Verma. Six fake notes of Rs. 100/- having No. 6 A N 686677 were recovered from the possession of the accused/Chandan. 5. After the aforesaid, recovery memo (Ext. Ka-1) was prepared. Thereafter, upon completion of investigation charge sheet(s) (Ext. Ka-1 and 2) were submitted before the Court concerned. It is to be noted that the Site Plan (Ext. Ka-3), Chik FIR (Ext. Ka-7) and Expert report (Ext. Ka-8) were also submitted before the Court concerned. 6. After submission of charge sheet, learned Magistrate took cognizance and thereafter the said case was committed to the Court of Session where it was registered as Session Trial No. 38 of 2009 and charges were framed against the appellants, which they denied and claimed trial. Versus Counsel for Appellant(s) : R.N. Shukla Counsel for Respondent(s) : Govt. Advocate Jitendra And Another .....Appellant(s) State of U.P. .....Respondent(s)
7. In order to substantiate its case, prosecution examined as many as nine witnesses namely S.I. Shyambabu Shukla/PW-1, S.I. Rameshchandra Pandey/PW-2, Jagdish Prasad Singh/PW-3, S.I. Ahmad Zalal Zaidi/PW-4 and Jagannath Swami/PW-5. These prosecution of witnesses established the case of the prosecution and proved the documentary evidence viz. charge sheet(s) (Ext. Ka-1 and 2), Site Plan (Ext.
Ka-3), Chik FIR (Ext. Ka-7) and Expert report (Ext. Ka-8). 8. That after closing of the evidence, statements of accused/ appellants were recorded in terms of Section 313 Cr.P.C. by the trial court, after explaining the entire evidence and other circumstances, in which the appellants denied the prosecution story and the entire prosecution story was said to be wrong and concocted. 9. After recording of the statement(s) under Section 313 CrPC Defence also produced its witnesses namely Om Prakash Verma/DW-1, Ajay Kumar/DW-2, Hansraj Verma/D.W.-3, Mohd. Sabbir/D.W.-4 and Sunil Soni/D.W.-5. 10. Thereafter, the learned trial court after hearing learned counsel for both the parties and appreciating the entire evidence, oral as well as documentary, found the accused/appellants guilty and convicted them as above.
Relevant portion of the order dated 21.12.2010 is extracted here-in-under:- "साWी संćया-1 एस०आई० ģयामबाबू शुĆला एस०ओ०जी० ने मुćय परीWण मȅ कहा िक िदनांक 23.6.08 को मȈ एस०आई० के पद पर थाना कोतवाली मȅ बडेल चौकी पर तैनात था। उस िदन मेरे साथ एस०आई० आर०सी० पाĔडेय कां० अरिवęद िसह, मनीस कु मार, कॉ० रामŠताप के साथ शािęत Dzवĥथा के सĞबęध मȅ व वांिछत अिभयुǘ की तलाश मȅ पġहरी चौराहे पर मामूद थे और तभी पġहरी चौराहे पर जिरए मुखिबर सूचना िमली तीन आदमी जो जाली नोटȋ का कारोबार करते हȈ वह जैदपुर की तरफ से आ रहे है। इस सूचना पर आर०सी० पाĔडेय व हम लोग जनता के गवाह लोगȋ का Šयास िकया लेिकन कोई तैयार नहȂ ɷए थे और हम लोग वहȂ पर खíे आने वाले लोगȋ का इंतजार करने लगे। तभी तीन आदमी जैदपुर जाने वाली रोड पर आते िदखायी िदए। तभी मुखिबर इशारा कर वह चला गया। जैसे वह लोग पास आए उęहȅ ɴकने के िलए कहा गया तभी तीनȋ पलटकर पीछे की तरफ भागने लगे िक तभी फै जाबाद रोड से जैदपुर मोí पर 20-25 कदम की ɮरी पर शाम 6.30 बजे पकí िलया गया। तब आर०सी० पाĔडेय DZारा उन लोगȋ का नाम पता पूछा व अलग-अलग जामा तलाशी ली गयी। िजसमȅ से एक ने अपना नाम िजतेęŝ बताया। जमाता तलाशी लेने पर उसकी जेब से 100-100 ɴपए के आठ नोट िमले तथा ɮसरे ने अपना नाम पारसनाथ वमाă उसकी तलाशी पर शटă की जेब से 100-100 ɴपए के 6 नोट िमले, तीसरे ने अपना नाम चęदन बताया उसकी तलाशी पर 100-100 ɴपए 6 नोट शटă की उपरी जेब से िमली। सभी नोट देखने मȅ असली Šतीत होते थे लेिकन सभी नोटȋ के सीरीज व नĞबर एक ही होने के कारण जाली नोट मालूम हो रहा था। पूछताछ मȅ बताया िक इन नोटȋ को हम लोग रĆसैला िबहार के खान साहब नामक आदमी के पास से लाते है तथा ये नोट यासीन िनवासी रसौली के माĘयम से हम लोग लेकर चलाते हȈ और उनको बाजार मȅ चलाए जा रहे हȈ और अपनी गलती मानने लगे। तब दरोगा जी ने बताया िक इस कायă से देश की Dzवĥथा को काफी नुकसान होता है तथा दरोगा Wरा उęहȅ उनके जुमă से अवगत कराया गया और उęहȅ िहरासत मȅ िलया गया। नोटȋ को अलग-अलग िलफाफȋ मȅ रखकर सीलकर नमूना मोहर तैयार िकया था। फदă मौके पर ही दरोगा के बोलने पर मेरे DZारा िलखी गयी थी। फदă िलखने के बाद
हमरािहयान व अिभयुǘगण के हĥताWर व िनशनी अंगुठा बनवाया गया तथा फदă की नकल अिभयुǘगणȋ को दी गयी। फदă मेरे लेख व हĥताWर मȅ थी। मौके से अिभयुǘ व बरामद ɴपयȋ व Šपśȋ के साथ हम लोग थाने आए और दरोगा जी ने फदă के आधर पर मुकदमा पंजीकृ त कराया। िववेचक ने मेरा बयान िलया था। Šित परीWण मȅ कहा िक मुखिबर ने सूचना आर०सी० पाĔडेय एस०आई० को िदया था। घटनाĥथल पġहरी चौराहे पर नहȂ था बिġक उससे 20-25 कदम दिWण पूवă जैदपुर रोड पर था। वहां आसपास होटल हȈ साइिकल की ɭकाने हȈ पान की ɭकाने है और 25 कदम की ɮरी पर टैĞपो ĥटैĔड है। मुिġजमȋ ने कहा था िक इन नोटȋ को चलाने के िलए ले जा रहे है। साWी संćया-2 एस०आई० रमेशचęŝ पाĔडेय ने मुćय परीWण मȅ कहा िक िदनांक 23.06.08 को मȈ इसी पद पर CRLA No. 201 of 2011 2 िसटी चौकी इंचाजă के पद पर तैनात था। उस िदन मȈ अपने साथ एस०आई० ģयाम बाबू शुĆला व रामŠताप के साथ पġहरी चौराहे पर थे और आपस मȅ बातचीत हो रही थी तभी जिरए मुखिबर सूचना दी गयी िक तीन लोग जो जैदपुर की तरफ से आ रहे हȈ वे लोग नकली नोटȋ का कारोबार करते हȈ तथा जाली नोटȋ को चलाने के उǩेģय से आ रहे हȈ। तब मȈने वहां उपिĥथत जनता के लोगȋ से गवाही के िलए कहा लेिकन कोई तैयार नहȂ ɷए तब हम सभी लोग वहȂ पर मय मुखिबर के खíे होकर िक तभी तीन लोग जो पैदल आ रहे थे मुखिबर ने तीनȋ की ओर इशारा िकया और चला गया। पास आने पर तीनȋ को रोका टोका गया तो पीछे मुíकर भागे तो उęहȅ 20-25 कदम दौíाकर शाम करीब 6.30 बजे पकí िलया गया। नाम पूछते ɷए जामा तलाशी ली गयी तो एक ने अपना नाम िजतेęŝ पुś मुęनू वमाă बताया तथा तलाशी से उसके पैĔट की दािहनी जेब से 100-100 ɴपए के आठ नोट िजस पर एक
ही िसरीज और नĞबर 3 ए एन के थे तथा 6 नोट 100-100 के भी 3 ए एन िसरीज के थे। चęदन के कĜजे से 6 नोट सौ ɴपए के 3 ए एन िसरीज के थे कĜजे से बरामद ɷए। अिभयुǘगण चęदन, िजतेęŝ व पारस से बरामद नोट आज ęयायालय पर एक िलफाफे मȅ जो संćया मȅ 20 है, Šĥतुत िकए गए है। बरामद सभी नोटȋ पर कमशः वĥतु Šदशă-1 ता 20 डाला गया तथा िलफाफा पर वĥतु Šदशă-21 डाला गया। िलफाफे पर सी०जे०एम०, बाराबंकी के हĥताWर है। मौके पर बरामद नोटȋ की फदă तैयार की गयी थी। फदă िलखने के बाद उपिĥथत पुिलस कमăचारी व अिभयुǘगण के आलामात बनवाए। फदă की नकले अिभयुǘ को दी गयी। फदă मेरे लेख व हĥताWर मȅ थी। फदă पśावली मȅ संलĈन नहȂ है। फदă पîकर अिभयुǘगणȋ व पुिलस कमăचारीगण को सुनायी गयी थी। मौके से सबरामद नोटȋ व अिभयुǘगणȋ को व Šपśȋ के साथ थाने आए और थाने पर मुकदमा पंजीकृ त कराया। घटना के सĞबęध मȅ िववेचक ने मेरा बयान िलया था। पकíे गए लोगȋ ने बताया िक हम लोग ये नोट यासीन पुś अĜɭġला िनवासी रसौली थाना सफदरगंज के DZारा रĆसौल ŠाĚत िबहार िनवासी खान साहब नाम के Dzिǘ से लाते थे। पकíे गए लोगȋ को उनके DZारा िकए गए अपराध से अवगत कराया गया िक आप लोगȋ DZारा जाली भारतीय नोटȋ को बाजार मȅ चलाकर असली बताते ɷए चलाया है िजससे भारतीय अथăDzवĥथा कमजोर होती है जो दĔडनीय अपराध है बताकर िहरासत पुिलस मȅ िलया गया। बरामद ɴपयȋ को मौके पर ही अलग-अलग िलफाफȋ मȅ रखकर सवăमुहर कर नमूना मुहर तैयार िकया था। फदă मौके पर टाचă की रोशनी मȅ मेरे बोलने पर एस०आई० ģयाम बाबू शुĆला DZारा िलखी गयी थी। िगरěतारी की सूचना अिभयुǘगणȋ के बताए गए पते पर भेजी गयी थी। इस मुकदमȅ की कायमी मेरे DZारा रपट संćया 48 समय 19.55 बजे िदनांक 23.06.08 को रोजनामचाआम पर मूल के कम मȅ मेरे DZारा की गयी थी। कायमी
की मूल जी०डी० भी साथ लेकर आया ɸँ। जो पśावली मȅ संलĈन काबăन कापी ब13 है िजसे मूल से मȈ Šमािणत कर रहा ɸँ। िजस पर Šदशă क-8 डाला गया। Šित परीWण मȅ कहा िक पġहरी चौराहे पर मुझे ģयाम बाबू शुĆला अपने हमरािहयȋ का० रामŠताप के साथ थे। पġहरी चौराहे पर मȅ आधा घĔटा पहले से मौजूद था। इस पġहरी चौराहे से आगे बîकर फै जाबाद रोड पर टैĆसी ĥटैĔड है। पġहरी चौराहे से जैदपुर जाने वाली सíक पर कोġड ĥटोर है। यह घटना पġहरी से जैदपुर वाली रोड पर करीब 25 कदम की ɮरी पर ɷई थी। आगे कहा िक फदă एस०आई० ģयाम बाबू शुĆला ने मेरे बोलने पर अपने लेख मȅ िलखा था जो बोला था वही िलखा था। पîकर सुनाया तब हĥताWर बनाए थे। साWी संćया-3 जगदीश Šसाद िसह ने मुćय परीWण मȅ कहा िक िदनांक 02.08.08 को मȈ Šभारी िनरीWक के पद पर कोतवाली नगर मȅ तैनात था। थाने पर दजă मुकदमा अपराध संćया 776/08 अęतगăत धारा 489बी, 489सी भा०द०स० की िववेचना पुिलस अधीWक महोदय के आदेश से पूवă िववेचक एस०आई० अहमद जलाल जैदी DZारा की जा रही थी। उǘ आदेश से िववेचना मेरे DZारा Ŏहण कर ŠारĞभ की गयी। पूवă िकता की गयी सी०डी० का अवलोकन िकया। बरामद जाली नोटȋ का परीWण िरपोटă ŠाĚत ɷई। िजसका उǪरण सी०डी० मȅ अंिकत िकया। अवलोकन से सभी बरामद नोट 3 ए एन िसरीज के थ िजसमȅ 19 नोट 3 ए एन 686677 तथा एक नोट 3 ए एन 686667 का था। सी०डी० के अवलोकन से 8 नोट 3 ए एन और शेष नोट पर 6 ए एन िसरीज अंिकत था। िदनांक 20.08.08 को पचाă 4 िकता िकया। िजसमȅ पुनः बयान एफ०आई०आर० लेखक कां० मो० जगęनाथ सोनी का िलया गया िजसमȅ उęहȋने अपने बयान मȅ बताया िक सभी नोट 3 ए एन िसरीज के थे। बोलते समय सहबन 6 ए एन िसरीज अंिकत कर िदया। कां०मो० लवकु श ने कĞĚयूटर पर 6 ए एन टाइप सहबन करने की
बात बतायी थी। पचाă िततĞभा Šथम िदनांक 27.09.08 को िकता िकया। िजसमȅ मुिġजम सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान जो अपराध संćया 771/08 मȅ िगरěतार कर जेल गया था का वारĔट अपराध संćया 776/08 मȅ िरपोटă देकर वारĔट बनवाया गया। पचाă िततĞमा िDZतीय िदनांक 14.10.08 को िकता िकया गया िजसमȅ जेल मȅ जाकर मुिġजम का बयान लेने की अनुमित ŠाĚत की गयी। पचाă िततĞमा तृतीय िदनांक 16.10.08 को िकता िका गया। अनुमित के आधार पर िजला कारागार बाराबंकी जाकर सफात उफă बċचू उफă मुबारक खान का बयान अंिकत िकया गया तथा आरोप पś संćया 362ए/08 अिभयुǘ सफात खान उपरोǘ के िवɴǪ आरोप पś Šेिषत िकया। िदनांक 20.08.08 को पयाăĚत CRLA No. 201 of 2011 3 साĨय पाते ɷए अिभयुǘगण िजतेęŝ, पारसनाथ व चęदन के िवɴǪ आरोप पś संćया 362/08 ęयायालय Šेिषत िकया था। आरोप पś संćया 362/08 व 362ए/08 मेरे हĥताWर मȅ है। शािमल पśावली है कागज संćया अ4 व 5 है। जो एस०टी० नं0-38/09 व 465/09 मȅ संलĈन है। िजन पर कमश Šदशă क-1 व Šदशă क-2 डाला गया। मेरे DZारा नोटȋ से सĞबिęधत परीWण िरपोटă ŠाĚत की गयी थी वह पśावली मȅ संलĈन है। कागज संćया अ7, अ8 व अ9 है। Šित परीWण मȅ साWी ने कहा िक जांच हेतु जाली नोट मेरे पूवă िववेचक DZारा भेजे गए थे। जब मȈने चाजăशीट लगायी थी तो उससे पहले मȈने एफ०आईआर० व सी०डी० का अवलोकन िकया था। एफ०आई०आर० मȅ परीWण मȅ नोट संćया 3 ए एन 686667 का उġलेख िकसी भी अिभयुǘ के पास बरामदगी होने का उġलेख नहȂ है। पूवă िववेचक DZारा इस नĞबर की नोट परीWण हेतु भेजी गयी थी तभी परीWण िरपोटă मȅ यह नĞबर अंिकत होकर आया है। साWी संćया-4 एस०आई० अहमद जलाल जैदी ने मुćय परीWण मȅ कहा िक मȈ िदनांक 23.06.08 को बहैिसयत चौकी इंचाजă िसिवल लाइन कोतवाली बाराबंकी मȅ कायăरत था। मुकदमा अपराध संćया 776/08 धारा 489बी व 489सी भा०द०स० की िववेचना मुझे एस०आई० को ŠाĚत ɷई। मुकदमा उपरोǘ मȅ परचा
नĞबर एक िदनांक 24.06.08 िजसमȅ मूल िचक, रकल रपट, बयान लेखक एफ०आई०आर० घटनाĥथल का िनरीWण, समयी साĨय अंिकत िकया गया। परचा नĞबर 2ए उपरोǘ ितिथ मȅ िजसमȅ बयानात गवाहान चģमदीद अंिकत िकया गया तथा परचा नĞबर 3 िदनांक 02.08.08 को मुकदमा उपरोǘ की िववेचना आदेशानुसार एस०पी० महोदय बाराबंकी DZारा िववेचना तĕकालीन Šभारी िनरीWक कोतवाली जे०बी० िसह DZारा Ŏहण िकया गया। उनके DZारा अिŎम कायăवाही की गयी। घटनाĥथल का िनरीWण वादी की िनशांदेही पर मेरे DZारा िकया गया िजस पर मेरे हĥताWर है जो शािमल पśावली पर है कागज सćया अ6 है इस पर Šदशă क-3 डाला गया। Šित परीWण मȅ कहा िक यह मुकदमा मेरी अदम मौजूदगी मȅ कायम ɷआ। मुझे िदनांक 24.06.08 को िववेचना िमली। आगे कहा िक तीनȋ पचाă मȅ मȈने तěतीश शुɴ करने व समाĚत करने का समय नहȂ अिकत िकया है जो सहबन रह गया है। साWी संćया-5 कां० जगęनाथ ĥवामी ने मुćय परीWण मȅ कहा िक िदनांक 23.06.08 को भी मȅ इसी पद पर इसी थाने मȅ तैनात था। उस िदन मुकदमा अपराध संćया 776/08 के वादी मुकदमा एस०आई० रमेशचęŝ पाĔडे थाना कोतवाली नगर बाराबंकी अिभयुǘगण व फदă के साथ उपिĥथत आए और फदă के आधार पर कĞĚयूटर आपरेटर कां० वलीउġला खां को बोलकर मȈने मुकदमा अपराध संćया 776/08 अęतगăत धारा 489बी, 489सी भा०द०स० बनाम िजतेęŝ आिद फीड कराया था। इसकी कायमी वादी एस०आई० आर०सी० पाĔडेय DZारा ĥवयं की गयी थी। कायमी की मूल जी०डी० साथ लेकर आया ɸँ। पśावली मȅ संलĈन कĞĚयूटराइčड िचक को मूल से िमलान करने के बाद Šमािणत कर रहा ɸँ। िचक पर Šदशă क-7 डाला गया। िववेचक ने मेरा बयान िलया था। Šित परीWण मȅ कहा िक मȈने इस एफ०आई०आर० के पहले कोई भी एफ०आई०आर० दजă नहȂ की थी, न ही इसके बाद ही कोई एफ०आई०आर० दजă की थी। फदă के आधार पर मȈने िचक एफ०आई०आर० दजă की थी। बचाव साWी संćया-1 ओमŠकाश वमाă ने मुćय परीWण मȅ कहा िक मȈ िजतेęŝ पुś िशवकु मार के घर के सामने रहता
ɸँ। करीब दो वषă सन् 2008 के माह जून मȅ रात के करीब 10 बजे जैदपुर थाने का िसपाही कबीर व एक अęय दरोगा िजतेęŝ के घर आए थे और िजतेęŝ के घर का दरवाजा खटखटाया िजतेęŝ घर से बाहर िनकले िसपाही ने कहा िक बíे साहब ने तुĞहे पूछताछ के िलए थाने बुलाया है। जीप मȅ चęदन नाम का लíका जो कĥबे मȅ ही रहता है, बैठा था। िजतेęŝ भी कĥबा जैदपुर मȅ मोटरसाइिकल के पाटăस की ɭकान है। जब हम लोग सोकर सुबह उठे तो पता लगा िक िजतेęŝ अभी तक थाने से नहȂ लौटे हȈ। बाद मȅ पता चला िक उęहȅ बाराबंकी थाने कोतवावली भेज िदया गया है। बाद मȅ पता चला िक कोतवाली नगर पुिलस ने िजतेęŝ का िकसी मुकदमȅ मȅ चालान कर िदया है। अिभयोजन पW DZारा Šित परीWण करने पर कहा िक मुझे अदालत से सĞमन नहȂ िमला है िजतेęŝ मेरे घर के सामने रहते है। मोहġले के नाते िजतेęŝ मुझे चाचा कहते हȈ। िजतेęŝ की माता जी ने बताया था िक िजतेęŝ का फजȃ चालान कर िदया है। बचाव साWी संćया-2 अजय कु मार ने मुćय परीWण मȅ कहा िक मȈ िजतेęŝ पुś िशवकु मार के घर के बगल मȅ पूरब तरफ रहता ɸँ। सन् 2008 के जून महीने मȅ रात करीब 10 बजे जैदपुर थाने के िसपाही कबीर व एक अęय दरोगा जीप से िजतेęŝ के घर आए थे उनका दरवाजा खटखटाया िजतेęŝ घर से बाहर आए तो िसपाही ने िजतेęŝ से कहा िक बíे साहब ने तुĞहे पूछताछ के िलए थाने बुलाया है। जीप मȅ करबे का एक लíका चęदन बैठा था। बाद मȅ मुझे पता चला िक थाना जैदपुर की पुिलस ने उसे थाना कोतवाली भेजकर िकसी फजȃ के स मȅ फं सा िदया है। िजतेęŝ की मोटरसाइिकल पाटăस की कĥबे मȅ ɭकान है। अिभयोजन पW DZारा Šित परीWण करने पर कहा िक मȈ अपने घर के बाहरी कमरे मȅ ही लेटा था िजसमȅ िखíकी लगी है। मȈ नहȂ बता
सकता िक जीप मȅ कु ल िकतने लोग थे िकęतु दो तीन CRLA No. 201 of 2011 4 लोग थे। बचाव साWी संćया-3 हंसराज वमाă ने मुćय परीWण मȅ कहा िक मȈ पारसनाथ को जानता ɸँ। यह मेरे पडोसी है। इनके पास खेती है। उसी से वह अपना व अपने पिरवार का पालन पोषण करते है। िदनांक 22.06.08 को रात करीब 11 बजे पारसनाथ के घर पर पुिलस आयी थी। मȈ भी मौके पर पɷंचा तो मȈने पुिलस वालȋ से बात िकया तो उęहȋने कहा िक पारसनाथ को बíे साहब ने पूछताछ के िलए थाने बुलाया है। मेरे व गांव के लोगȋ के सामने पुिलस ने पारसनाथ के घर की तलाशी ली थी। मेरे सामने पारसनाथ की भी तलाशी पुिलस वालȋ ने ली थी तो उसके पास से िकसी भी अवैध वĥतु की बरामदगी नहȂ ɷई थी। िफर पुिलस वालȋ पारसनाथ को थाने ले गए। बाद मȅ हम लोगȋ को पता चला िक िकसी मुकदमȅ मȅ पुिलस वालȋ ने पारसनाथ का फजȃ चालान कर िदया। Šधान होने के नाते मȈ हर Dzिǘ के सुख ɭख व सċचाई कहने के िलए Šयĕनरत रहता ɸँ। अिभयोजन पW DZारा Šित परीWण करने पर कहा िक जब पुिलस वाले आए थे तो एक दरोगा व तीन चार िसपाही व एक अनęतराम नाम का आदमी साथ था। जो इनके यहां िमठाई बनारे का काम करता था इस कारण पहचानता है इससे पारसनाथ का पहले झगíा हो चुका था। बचाव साWी संćया-4 मो० शĜबीर ने मुćय परीWण मȅ कहा िक चęदन सोनी पुś आलोक कु मार का घर मेरे घर के सामने है। जून 2008 मȅ मȈ अपने घर की छत पर बैठा था। रात करीब 9.30 बजे थाने के िसपाही व दरोगा जीप से चęदन के घर आए और चęदन को थाने पूछताछ को कहकर बुला ले गए। बाद मȅ मुझे पता चला िक थाना जैदपुर से चęदर को थाना कोतवाली नगर भेजकर फजȃ चालान कर िदया गया था। चęदन सोनी की फोटोŎाफी की ɭकान
कĥबा जैदपुर मȅ ही है। अिभयोजन पW DZारा Šित परीWण करने पर कहा िक जीप मȅ एक Řाईवर, एक िसपाही व एक दरोगा थे। तीनȋ वदȃ मȅ थे। चęदन पर अęय कोई मुकदमा नहȂ चल रहा है। चęदन अब भी फोटोŎाफी का काम कर रहे है। बचाव साWी संćया-5 सुनील सोनी ने मुćय परीWण मȅ कहा िक मȈ चęदन सोनी पुś आलोक कु मार के घर के बगल मȅ रहता ɸँ। चęदन सोनी फोटोŎाफी का काम करते है। माह जून 2008 मȅ रात करीब 9.30 बजे एक िसपाही व दरोगा जीप से चęदन के घर आए थे और यह कहकर चęदन को बुला ले गए थे िक बíे साहब ने पूछताछ के िलए बुलाया है। सुबह मालूम ɷआ िक चęदन घर वापस नहȂ लौटे है। बाद मȅ पता चला िक चęदन का चालान कोतवाली नगर की पुिलस DZारा िकया गया है। अिभयोजन पW DZारा Šित परीWण करने पर कहा िक चęदन मेरी िबरादरी के है। पुिलस रात को करीब 9.30 बजे ले गयी थी। चęदन के िपताजी नीचे चęदन को पुिलस DZारा ले जाते समय रोका गया िक नहȂ मȈ नहȂ बता सकता Ćयȋिक मȈ गमȃ के कारण छत पर था। जहां तक सś परीWण संćया 38/09 राčय Šित िजतेęŝ आिद का Šģन है इस Šकरण मȅ घटना िदनांक 22.06.08 समय 18.30 बजे की दिशत की गयी है। िजसकी Šथम सूचना िरपोĠअ िदनांक 22.06.
08 को ही 19.15 बजे अथाăत एक घĔटा 25 िमनट बाद िलखायी गयी है। वादी मुकदमा उ०िन० आर०सी० पाĔडेय है िजसके DZारा दी गयी फदă बरामदगी के आधार पर अिभयुǘगण िजतेęŝ, पारसनाथ एवं चęदन के िवɴǪ अिभयोग अęतगăत धारा 489बी, 489 सी भा०द०स० मȅ पंजीकृ त िकया गया। पśावली पर Šथम सूचना िरपोटă की कĞĚयूटर की Šित Šĥतुत की गयी है और अिभयोजन साĨय मȅ यह तĖय Šकाश मȅ लाया गया है िक सुसंगत समय की बɷत सारी Šथम सूचना िरपोटă कायाăलय मुćय ęयाियक मिजĥŖेट से चोरी हो गयी थी िजसके बारे मȅ Šथम सूचना िरपोटă कोतवाली मȅ दजă ɷई थी। इस Šकार मूल Šथम सूचना िरपोटă व फदă बरामदगी उपलĜध नहȂ है लेिकन फदă बरामदगी के आधार पर िलखी गयी फदă िचक की कĞĚयूटर Šित ęयायालय मȅ Šĥतुत है और जो िक थाना Šभारी के हĥताWर से है तथा साWी DZारा ęयायालय मȅ Šमािणत िकया गया है। िजस पर Šदशă क-7 डाला गया है। अतः मेरे ɯिǸकोण से यह कĞĚयूटर से तैयार की गयी मूल Šित की अनुसार ही साĨय मȅ Ŏाǽ है। अतएव फदă बरामदगी व Šथम सूचना िरपोटă गायब हो जाने का कोई Šितकू ल Šभाव अिभयोजन कायăवाही पर नहȂ पíता है Ćयȋिक इसके िलए िकसी भी Šकार से अिभयोजन पW को दोषी नहȂ माना जा सकता। जहां तक अिभयुǘगण के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489बी एवं 489 सी भा०द०स० िसǪ होने का Šģन है, अिभयोजन पW से परीिWत साWी संćया-1 उ०िन० ģयाम बाबू शुĆला घटना के समय वादी मुकदमा उ०िन० रमेशचęŝ पाĔडेय का हमराह रहा है िजसने अपने मुćय परीWण मȅ अिभयोजन कथानक व वादी मुकदमा के कथन का सारवान ɴप से समथăन िकया है और घटना के समय घटनाĥथल से अिभयुǘ िजतेęŝ की जामा तलाशी सलेने से उसकी जेब से 100-100 ɴपए के आठ नोट, ɮसरे अिभयुǘ पारसनाथ की जामा तलाशी से उसके शटă की जेब से CRLA No. 201 of 2011 5 100-100 ɴपए के 6 नोट होना तĥदीक िकया है। िचक के अनुसार अिभयुǘ िजतेęŝ के पास सेस बरामद नोटȋ का नĞबर एक ही था िजन पर 3 ए एन 786677 अंिकत था। इस तहरीर के अनुसार ɮसरे अिभयुǘ पारसनाथ के पास से बरामद नोटȋ पर कमांक 6 ए एन 686677 तथा अिभयुǘ चęदन के पास से बरामद नोटȋ का भी Ōमांक 6 ए एन 686677 दिशत िकया है। इस Šकार िचक के अनुसार सभी नोटȋ के सीिरयल नĞबरȋ मȅ िभęनता है। यǯिप सबके अंक एक जैसे है। Šदशă क-8 जो
िक बȈक नोट मुŝणालय देवास मĘय Šदेश से नोट की जांच से सĞबिęधत आćया है, मȅ सभी नोटȋ की Ōम संćया 3 ए एन 686677 पाया गया है। बचाव पW DZारा मुćय ɴप से यह िबęɭ बचाव मȅ उठाया गया है िक िचक मȅ दिशत नोट जो िक अिभयुǘ पारसनाथ व चęदन के पास से बरामद िकये गए थे उनका सीिरयल नĞबर 6 ए एन है जब िक बȈक नोट मुŝणालय देवास मĘय Šदेश DZारा जारी जाच आćया के अनुसार तमाम सीिरयल नĞबर 3 ए एन की है। इस िबęɭ पर साWी संćया-3 जगदीश Šसाद िसह िववेचक एवं साWी सćया- 5 कां० जगęनाथ ĥवामी जो िक घटना के समय थाने पर तैनाती कांĥटेिबल मोहिरर की थी ने तहरीर को कĞĚयूटर मȅ फीड िकए जाने के बारे मȅ बयान िदया है और कहा है िक फदă के आधार पर कĞĚयूटर ऑपरेटर कां० वलीउġला खां को बोलकर वादी मुकदमा ने ĥवयं िलखाया था और फदă के आधार पर िचक एफ०आई०आर० िलखा था। साWी सćया-3 जगदीश Šसाद िसह ने अपने बयान मȅ कहा है िक बरामद जाली नोटȋ की परीWण िरपोटă ŠाĚत ɷई िजसका उǪरण सी०डी० मȅ अंिकत िकया था, के अवलोकन से सभी बरामद नोट 3 ए एन िसरीज की थी। िजनमȅ 19 नोटȋ का अंक एक ही था जो िक 686677 था तथा एक नोट का अंक 686667 था। जब िक सी०डी० के अवलोकन से 8 नोट 3 ए एन िसरीज और शेष नोट पर 6 ए एन िसरीज अंिकत थ। िजसके कारण िववेचक ने िदनांक 20.08.08 को सी०डी० का पचाă नं0-4 दोबारा िकता िकया और एफ०आई०आर० लेखक कां०मो० जगęनाथ सोनी का दोबारा बयान िलया िजसने अपने बयान मȅ बताया िक सभी नोट 3 ए एन िसरीज के थे बनाते समय सहबसन 3 ए एन िसरीज अंिकत करा िदया। कां० मो० लवकु श कĞĚयूटर पर 6 ए एन टाइप करने की बात सहबन śुिट थी और पचाă संćया-1 िदनांक 27.09.08 को िकता िकया था। यह ĥपǸ है िक बȈक नोट मुŝणालय
देवास मĘय Šदेश को नोट ęयायालय मुćय ęयाियक मिजĥŖेट बाराबंकी के माĘयम से भेजा गया था और सभी नोटȅ 3 ए एन िसरीज की पायी गयी थी िजसमȅ 19 नोटȅ के अंक एक ही थे और एक नोट के अंक मȅ मामूली िभęनता थी। इस तरह का कोई भी साĨय पśावली पर िवǯमान नहȂ है िक ęयायालय DZारा परीWण हेतु Šेिषत िकए गए माल को िकसी Šकार से बदला गया और पुिलस के िलए उसी कमांक के अितिरǘ नोटȅ बनाकर सैĞपुल को Šभािवत करने की सĞभावना भी नहȂ के बराबर है यǯिप नोटȋ की कू टरचना के सĞभव लेिकन उęहȂ कमाकȋ की अितिरǘ नोटȅ अितिरǘ, पुिलस DZारा तैयार िकया जाना संभव नहȂ था अतः संćया-3 िववेचक के बयान व बैक नोट मुŝणालय देवास की िरपोटă से यह ĥपǸ है िक िचक मȅ सीरीयल की śुिट गलत बोले जाने की मानवीय भूल के कारण ɷई जबिक वाĥतिवक तमाम बरामद नोटȋ का सीिरयल 3 ए एन ही था और साWी संćया-1 व 2 ने अपने बयान मȅ घटना के समय अिभयुǘगण से इन नोटȋ का बरामद होना युिǘयुǘ सęदेह से परे पुिǸ की है िजसे बȈक नोट मुŝणालय देवास की जांच मȅ कू टरिचत पाया गया था। बचाव पW से बचाव मȅ अिभयुǘ िजतेęŝ के िलए बचाव साWी संćया-1 व 2 ने अपने बयान मȅ अिभयुǘ िजतेęŝ को रात के करीब 10 बजे जैदपुर थाने के िसपाही कबीर व एक अęय उप िनरीWक DZारा िजतेęŝ के घर जाकर दरवाजा खोलवाकर साथ ले आने की बात कही है। दोनȋ ही सािWयȋ के बयान एक ही तरह के है। दोनȋ ही पíोसी होने का दावा करते है लेिकन 10 बजे रात की घटना मȅ जब िक Ŏामीण Wेśȋ मȅ सामाęयतः हर Dzिǘ सो जाता है इनका घटना के हर पल का ŠĕयWदशȃ साWी होने का कथन िवǶास उĕपęन नहȂ करता है और इस अवधारणा की पुिǸ इस तĖय से भी होती है िक अिभयुǘ िजतेęŝ का तथाकिथत फजȃ चालान पुिलस DZारा िकए जाने पर
और िजसकी जानकारी पूरे गांव को होने के पdzात भी गांव के लोगȋ और ŎाĞय Šितिनिधयȋ DZारा िकसी Šकार की कोई ŠितिŌया नहȂ की गयी। िकसी उċचािधकारी को कोई िशकायत नहȂ की गयी अपने आप मȅ यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार है िक बचाव साWी संćया 1 व 2 िकराए के िसखा पîाकर तैयार िकए गए साWी हȈ। इसी Šकार अिभयुǘ पारसनाथ के बारे मȅ बचाव साWी संćया-3 हंसराज वमाă ने बयान देते ɷए अिभयुǘ पारसनाथ को रात के करीब 11 बजे पुिलस DZारा बुला ले आना कहा है। Šित परीWण मȅ इस साWी ने घटना के समय गांव के अęय ɮसरे लोगȋ की उपिĥथित बतायी गयी है। इस Šकरण मȅ घटना शाम 18.30 बजे की है जब िक मिहना जून का था पूरा उजाला रहता है और Šथम सूचना िरपोटă भी 19.55 बजे दजă की गयी है। िजसकी पुिǸ सभी अिभयोजन साWीगण DZारा िकया गया है। ऐसी दशा मȅ करीब 11 बजे रात को अिभयुǘ पारसनाथ को उसके घर से बुलाए जाने के तĖय का कथन िवǶसनीय नहȂ है। साWी ने अपने Šित परीWण मȅ कहा है िक एक Řाइवर एक िसपाही व एक दरोगा थे। अिभयुǘ िजतेęŝ की उपिĥथित के बारे मȅ कु छ नहȂ कहा गया है। अतः यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार िवǯमान है िक बचाव साWी संćया-3 एक िसखा पîाकर तैयार िकया गया बचाव साWी है। उसका कथन िवǶास CRLA No. 201 of 2011 6 उĕपęन करने वाला नहȂ है। अिभयुǘ चęदन सोनी के िलिए बचाव पW से परीिWत साWी संćया-4 मो० शĜबीर सने भी अिभयुǘ चęदन सोनी को रात करीब 9.30 बजे घर से पूछताछ करने के िलए घर से बुलाकर ले जाने की बात कही है। इसी Šकार बचाव साWी संćया 5 सुनील सोनी ने भी बयान देते ɷए कहा है िक रात करीब 9.30 बजे एक िसपाही वव दरोगा जीप से चęदन के घर आए थे और यह कहकर चęदन को बुला ले गए थे िक बíे साहब ने पूछताछ
के िलए बुलाया है। दोनȋ साWी ने यह ĥवीकार िकया है िक अिभयुǘ चęदन के बुलाने पर गवाही देने आए है। Šित परीWण मȅ कहा है िक पुिलस रात को करीब 9.30 बजे ले गयी थी। चęदन के िपताजी ने चęदन को पुिलस DZारा ले जाते समय रोका गया िक नहȂ मȈ नहȂ बता सकता Ćयȋिक मȅ गमȃ के कारण छत पर था। अतः यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार िवǯमान है िक बचाव साWी संćया-4 एवं 5 का कथन भी िवǶास उĕपęन करने वाला नहȂ है। अतः मȈ इस िवनŤ व सुिवचािरत िनĤकषă का ɸँ िक घटना के समय अिभयुǘ िजतेęŝ के पास से 8 नोट व अिभयुǘ पारसनाथ व चęदन के पास से 6-6 कू टरिचत नोटȅ बरामद होना युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ होता है। जहां तक सś परीWण संćया 38/09 मȅ अिभयुǘगण के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489बी भा०द०स० िसǪ होने का Šģन है, साWीगण 1 व 2 DZारा यह कहा गया है िक अिभयुǘगण यह नोट चलाने के िलए ले जा रहे थे परęतु िकसी Dzिǘ से चलाने की वाताă करते ɷए िकसी वĥतु की खरीद-फरोćत अथवा नोटȋ को असल नोटȋ से वादी मुकदमा का कोई अपकृ ĕय करते ɷए नहȂ पाया गया था। यिद साWी संćया 1 व 2 के बयान पर पूरा िवǶास कर भी िलया जाए तो माś कू टरिचत नोटȋ को असली के ɴप मȅ Šयोग िकए जाने की मंशा माś िसǪ होती है और धारा 489वी भा०द०स० के अęतगăत कू टरिचत नोटȋ को असली नोट के ɴप मȅ चलाने की मशा रखना अथवा चलाने के Šयास करने के अपकृ ĕय को दĔडनीय अपकृ ĕय नहȂ बनाता है। उनका Šयोग िकया जाना आवģयक होता है। अतः मȈ इस िवनŤ व सुिवचािरत िनĤकषă का ɸँ िक अिभयुǘगण के िवɴǪ धारा 489 बी भा०द०स० युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ नहȂ होता है। जहां तक अिभयुǘगण के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489सी भा०द०स० िसǪ होने का Šģन है, साWीगण 1
व 2 के बयान व बैक नोट मुŝणालय देवास मĘय Šदेश की िरपोटă से ĥपǸ है िक सभी नोटȅ कू टरिचत थी और एक ही अंक की थी। अिभयुǘ िजतेęŝ व चęदन सोनी Dzवसायी हȈ और अिभयुǘ पारसनाथ कृ िष कायă करता है लेिकन पîा िलखा Dzिǘ है। हर सामाęय Dzिǘ को इस बात की जानकारी होती है िक कोई भी दो नोटȅ एक नĞबर की नहȂ होती हȈ जब िक इन अिभयुǘगणȋ के पास से बरामद सभी नोटȅ एक अंक की थी। अतः यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार िवǯमान है िक एक सामाęय Dzिǘ भी ऐसी नोटȋ को कू टरिचत होना मानेगा और यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार िवǯमान है िक अिभयुǘगण को इस तĖय की पूणă जानकारी थी िक तथाकिथत कू टरिचत बȈक नोटȅ हȈ और 1972 िकिमनल लॉ जनरल 1114 मȅ बासी रेǠी के Šकरण मȅ माननीय मैसूर उċच ęयायालय DZारा िदए गए िनणăय िसǪाęत के ɯिǸगत अिभयुǘगण के पास से बरामद जाली नोटȋ की संćया के ɯिǸगत यह अवधािरत करने का पयाăĚत आधार िवǯमान है िक अिभयुǘगण DZारा कू टरिचत नोटȋ को धारण करने का आशय उęहȅ वाĥतिवक नोटȋ के ɴप मȅ Šयोग मȅ लाया जाना था। अतः अिभयुǘ िजतेęŝ, पारसनाथ व चęदन सोनी के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489सी भा०द०स० भी युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ होता है। जहां तक सś परीWण संćया 465/09 मȅ अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489बी, 489सी एवं 120 बी भा०द०स० का Šģन है, इस Šकरण मȅ अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के पास से कोई नोट बरामद नहȂ ɷई है। अतः धारा 489बी एवं 489सी भा०द०स० युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ नहȂ होता है। धारा 489बी, 489सी सपिठत धारा 120बी भा०द०स० िसǪ होने का Šģन है। अिभयुǘ के बारे मȅ अिभयोजन पW से माś यह साĨय Šĥतुत िकया गया है िक उęहȅ यह नोट िबहार के एक खान साहब से
ŠाĚत होती थी और तथाकिथत खान साहब के ɴप मȅ अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान की पहचान ɷई और उसे इस मामले मȅ सह अिभयुǘ बनाया गया। िकęतु अिभयोजन पW का िकसी भी सह अिभयुǘ से इकबाली साWी नहȂ बनाया और न तो अिभयोजन साWी के ɴप मȅ ही ęयायालय मȅ Šĥतुत िकया। िजस समय सह अिभयुǘगण ने वादी मुकदमा को यह कथन कहा जाना अिभयोजन पW से बताया जा रहा था उस समय सभी अिभयुǘगण पुिलस अिभरWा मȅ थे। अतः ĥवयं अिभयुǘगण के िवɴǪ भी उǘ कथन धारा 25 व 26 साĨय अिधिनयम के अęतगăत साĨय मȅ Ŏाǽ नहȂ था। जहां तक सह अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के िवɴǪ अिभयुǘगण िजतेęŝ, पारसनाथ एवं चęदन की संĥवीकृ ित का Šģन है िक उनकी इन नोटȋ की आपूित अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान DZारा की जाती थी CRLA No. 201 of 2011 7 रामचęŝ Šित उǥर Šदेश राčय ए०आई०आर० 1857 सुŠीम कोटă 381, ęयूिनस कापȌरेशन Šित भगवान दास (1972) 74 पंजाब लॉ िरपोटă पȅज 274, भीसासाव Šित उíीस राčय ए०आई०आर० 1956 उíीस 177 मȅ दी गयी िविध Dzवĥथा के ɯिǸगत मȈ इस िवनŤ व सुिवचािरत िनĤकषă का ɸँिक सह अिभयुǘ DZारा पुिलस के समW की गयी संĥवीकृ ित अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के िवɴǪ सारवान साĨय नहȂ है व कथन साĨय मȅ Ŏाǽ नहȂ है और माś इस आधार पर िक सह अिभयुǘ के ęयाियक अिभरWा मȅ रहते ɷए नोटȋ की आपूित सह अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान को दोषी करार नहȂ िदया जा सकता है। यǯिप इस आशय की Šबल सĞभावना िवǯमान है िक नोटȋ की आपूित की गयी हो िकęतु इस सĞभावना के आधार पर अिभयोजन पW अिभयुǘ के िवɴǪ लगाया गया आरोप युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ करने के उǥरदाियĕव से मुǘ नहȂ होता है और मȈ इस िवनŤ व सुिवचािरत िनĤकषă का ɸँिक अिभयुǘ सफात
खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489बी, 489सी सपिठत धारा 120बी भा०द०स० युिǘयुǘ सęदेह से परे िसǪ नहȂ होता है। अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान सęदेह का लाभ पाने का पाś है। सś परीWण संćया 38/09 मȅ अिभयुǘ िजतेęŝ, पारसनाथ एवं चęदन सोनी को धारा 489सी भा०द०स० के अपराध के िलए दोषिसǪ करार िदया जाता है। दोषिसǪ अिभयुǘगण िजतेęŝ, पारसनाथ एवं चęदन Dzिǘगत ɴप से ęयायालय मȅ उपिĥथत है। उनके Dzिǘगत बंधपś द जमानत पś खिĔडत िकए जाते हȈ। अिभयुǘगण को अिभरWा मȅ िलया जाए। सजा के Šģन पर राčय की ओर से िवDZान सहायक िजला शासकीय अिधवǘा फौजदारी ũी एम०पी० वमाă एवं बचाव पW से विरǹ िवDZान अिधवǘा ũी राजेश चęŝ िमũा एवं ũी ओमशंकर गुĚता को सुना गया। िवDZान सहायक िजला शासकीय अिधवǘा फौजदारी का तकă है िक सभी अिभयुǘगण ने गĞभीर अपराध िकया है अतः उęहȅ िविध DZारा िनधाăिरत अिधकतम दĔड से दिĔडत िकया जाए। जब िक बचाव पW का कथन है िक सभी अिभयुǘगण नवयुवक हȈ। उनका Šथम अपराध है। उनका कोई आपरािधक इितहास नहȂ है। अतः उęहȅ Šथम अपराधी पिरवीWा अिधिनयम के उपबęधȋ का लाभ िदया जाए। अिभयुǘ िजतेęŝ की उŤ 22 वषă, चęदन की उŤ 23 वषă तथा अिभयुǘ पारसनाथ की उŤ 53 वषă बतायी गयी है। बचाव पW अिधवǘा ने यह तकă भी Šĥतुत िकया िक अिभयुǘ पारसनाथ की Šथम दोषिसिǪ है और वह अपने पिरवार का जीवकोपाजăक है। अिभयोजन पW DZारा दोषिसǪ अिभयुǘगण का कोई आपरािधक इितहास नहȂ Šĥतुत िका गया है और अपराध अęतगăत धारा 489सी भा०द०स० सात वषă तक के कारावास अथवा अथăदĔड अथवा दोनȋ से दĔडनीय है। चूंिक अिभयुǘगण की यह Šथम दोषिसिǪ है और अपराध कारागार अथवा अथăदĔड से दĔडनीय है। अिभयुǘ िजतेęŝ के पास से सौ-सौ ɴपए के आठ नोट तथा अिभयुǘ चęदन व पारसनाथ के पास से सौ-सौ ɴपए के 6-6 नोटȅ बरामद ɷई हȈ। तėनुसार मेरे िवचार से अिभयुǘगण को समुिचत अथăदĔड से
िकया जाना ęयाय की मंशा पूरी करता है। आदेश सś परीWण संćया 38/09 मȅ दोषिसǪ अिभयुǘगण िजतेęŝ, पारसनाथ एवं चęदन को दोषिसǪ अपराध अęतगăत धारा-489सी भा०द०स० के अपराध के िलए पाच-पांच हजार ɴपए के अथăदĔड से दिĔडत िकया जाता है। जुमाăना अदा न करने पर 6-6 माह के सũम कारावास से दिĔडत िकया जाए। सś परीWण संćया 465/09 मȅ अिभयुǘ सफात खान उफă बċचू खान उफă मुबारक खान के िवɴǪ लगाया गया आरोप अęतगăत धारा 489बी, 489सी एवं 120बी भा०द०स० मȅ सęदेह का लाभदेते ɷए दोषमुǘ िकया जाता है। अिभयुǘगण से बरामद कू टरिचत नोटȅ अपील अविध समाĚत होने अथवा अपील मȅ पािरत िदशा-िनदȆशȋ के अधीन राčय के पW मȅ जĜत की जाएं। िनणăय की एक Šित सś परीWण संćया 465 / 09 पर रखी जाय।" CRLA No. 201 of 2011 8 11. In the aforesaid background of the case, learned counsel for the appellant submitted that the trial Court committed error of fact and law both in not considering the facts of the case in the light of ht evidence produced before it and as such interference of this Court is required in the matter and appellants are liable to be acquitted. 12. Sri Arun Kumar, learned AGA appearing for the State submitted that judgment of the trial court is justified as prosecution has established its case as indicated in the FIR. 13. Upon due consideration of submissions of learned counsel for the parties and the evidence available on record, this Court finds that the trial Court has not committed any irregularity or illegality in passing the judgment under appeal dated 21.12.2010. It is for the following reason(s)- (i) The recovery of fake currency from the possession of the accused-appellant and documentary evidence, indicated above, were proved before the trial Court by the prosecution witnesses namely S.I. Shyambabu Shukla, S.I. Ramesh Chandra Pandey, Incharge Police Station-Jagdish Prasad Singh, S.I. Ahmad Jalal Zaidi and Constable Jagannath Swami.
(ii) The fact that the currency recovered from the possession of the accused-appellants was fake was established/proved by providing the expert report (Ext. Ka-8). 14. For the reason(s) aforesaid, the instant appeal is dismissed. 15. Copy of this judgment and trial Court record be sent back to the Court concerned. November 14, 2025 Vinay/- CRLA No. 201 of 2011 9 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench