SHRI PAL AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. REVENUE DEPTT. LKO. AND 3 OTHERS
/6782/2025 · 2025-12-04
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 183469 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6782 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ũी भगवान दǥ शमाă को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस यािचका DZारा यािचकाकताăगण ने Dzवहार अपील संćया 190 सन 2015 मȅ िवDZान अपर िजला तथा सś ęयायाधीश / िवशेष ęयायाधीश आवģयक वĥतु अिधिनयम कW संćया- 4, अयोĘया DZारा पािरत आदेश िदनांक 05.08.2025 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके DZारा वाद मȅ संशोधन हेतु Šĥतुत Šाथăना-पś िनरĥत कर िदया गया।
3. िवDZान ĥथायी अिधवǘा ने Šारंिभक आपिǥ करते ɷए कथन िकया िक यािचका मȅ उǥर Šदेश राčय को िवपWी बनाया गया है जबिक उǥर Šदेश राčय को िवपWी बनाया गया है, जबिक उǥर Šदेश राčय मूल वाद अथवा अपील मȅ पWकार नहȂ है तथा उसके िवɳǪ कोई अनुतोष नहȂ मांगा गया है। इस कारण से उǥर Šदेश राčय वाद मȅ न तो आवģयक और न ही उिचत पWकार है एवं यािचका पWकारȋ के कु संयोजन के कारण ɮिषत है।
4. इसके पूवă यािचकाकताăगण ने इसी आशय से िरट- सी संćया.- 10748 सन 2025 Šĥतुत की थी िजसमȅ भी यही आपिǥ ली गयी थी िक उǥर Šदेश राčय को गलत तरह से पWकार बनाया गया तथा यह आपिǥ उठाये जाने पर यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ने यािचका पर कोई बल न देने के आधार पर िनरĥत करा िदया तथा नवीन यािचका Šĥतुत करने की अनुमित चाही थी। इसके उपराęत भी नवीन यािचका मȅ पुनः उǥर Šदेश राčय को िवपWी बना देना यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा DZारा बरती गयी घोर लापरवाही अथवा नासमझी का ǯोतक है।
5. आलोċय आदेश मȅ अंिकत है िक यािचककताăगण ने मूल वाद िदनांक 26.03.2009 को Versus Counsel for Petitioner(s) : Bhagwandeen Sharma Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Shri Pal And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Revenue Deptt. Lko.
And 3 Others .....Respondent(s)
योिजत िकया था जो िदनांक 30.04.2015 को िनणȃत ɷआ। वाद की आXिĚत के िवɳǪ आपील िदनांक 28.05.2015 को योिजत की गयी थी तथा संशोधन Šाथăना-पś िदनांक 16.12.2017 को Šĥतुत िकया गया। संशोधन Šाथăना-पś मȅ यह अंिकत िकया गया है िक पूवă मȅ यािचकाकताăगण ने एक अęय अिधवǘा को िनयुǘ िकया ɷआ था तथा वतăमान अिधवǘा ने अपील मȅ तैयारी के समय यह पाया िक वाद-पś के कथन अĥपǸ हȈ तथा िलखने-पîने मȅ कु छ śुिट हो गयी है। अपीलीय ęयायालय ने आदेश 6 िनयम 17 Dzवहार ŠिŌया संिहता के Šािवधानȋ का अवलोकन करने के उपराęत यह पाया िक Šĥतुत Šकरण मȅ इतने िवलंब के पdzात संशोधन Šाथăना-पś ęयायालय मȅ Šĥतुत करने का कारण वादी / अपीलाथȃ ने यह दिशत िकया है िक उसने जब अपने नये अिधवǘा को िनयुǘ िकया तो उसे यह िविधक राय िमली िक वाद-पś मȅ संशोधन करना आवģयक है। आदेश 6 िनयम 17 के परंतुक से यह ĥपǸ है िक मूल वाद मȅ िवचारण Šारंभ होने के पdzात वाद पś मȅ संशोधन तभी हो सकता है जबिक सĞयक तĕपरता बरतने के बावजूद भी पWकार िवचारण के पूवă उǘ मामलो को उठा सकने की िĥथित मȅ नहȂ था। Šĥतुत Šकरण मȅ िवलंब का कारण माś वादी / अपीलाथȃ को िविधक Xान न होना एवं नवीन अिधवǘा DZारा संशोधन की आवģयकता बताना कहा गया है। यह आधार आदेश 6 िनयम 17 Dzवहार ŠिŌया संिहता के परंतुक मȅ िदये गये शĜद "सĞयक तĕपरता" की ũेणी मȅ नहȂ माना जा सकता।
6. इसके पdzात अपीलीय ęयायालय ने बहस हेतु िदनांक 19.08.2025 की ितिथ िनयत कर दी। िदनांक 29.08.2025 से यह यािचका Šĥतुत करने की ितिथ िदनांक 18.11.2025 तक अपील मȅ Ćया कायăवाही ɷई इसका यािचका मȅ कोई कथन नहȂ िकया गया है िजससे यह Šतीत होता है िक यािचकाकताăगण येन-के न-Šकारेण माś कायăवाही को लंिबत रखने हेतु Šयासरत हȈ।
7. िवDZान अपर िजला एवं सś ęयायाधीश DZारा आलोċय आदेश िदनांक 05.08.2025 मȅ अंिकत कारणȋ मȅ कोई śुिट अथवा अवैधािनकता नहȂ है तथा उǘ आदेश मȅ हĥतWेप करने का कोई उिचत आधार नहȂ है।
8.
यािचका बलहीन है, तėनुसार िनरĥत की जाती है। December 4, 2025 Ankit A227 No. 6782 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench