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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPLICATION U/S 482 No. - 2088 of 2021 Court No. - 29 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीिWत।
2. कायाăलय आćया, िदनांिकत 27.09.2021 के अनुसार िवपWी सं० 3 को नोिटस िनगăत की गयी थी, िजसके आćया के अनुसार िवपWी सं० 3 का िदनांक 20.04.2020 को ही मृĕयु हो चुकी है।
3. आवेदक की ओर से धारा 482 दं०Š०सं० के अंतगăत Šĥतुत यह आवेदन पś, मु०अ०सं० 424 वषă 2019 अęतगăत धारा 363, 366 भारतीय दĔड संिहता व धारा 16, 17 पॉĆसो एĆट, थाना कै सरगंज, िजला बहराइच से उǭूत आपरािधक वाद सं० 11 वषă 2020 मȅ अपर िजला सś ęयायधीश/िवशेष ęयायधीश पाĆसो एĆट, बहराइच DZारा पािरत ŠसंXान/तलबी आदेश िदनांक 16.01.2020 व 20.02.2021 के िवɴǪ योिजत िकया गया है।
4. संWेप मȅ अिभयोजन कथानक यह है िक अिभयोगी DZारा थाने पर इस आशय का Šाथăôा पś Šĥतुत िकया गया िक Šाथȃ बनाम 1. रामानęद पुś ũी िकशन 2. िवनोट पुś ɴप नरायन, थाना कै सरगंज, जनपद बहराइच िवपWीगण Šाथăना पś बावत दजă िकये जाने Šथम सूचना िरपोटă व िकये जाने वैधािनक कायăवाही। िनवेदन है िक Šाथी की पुśी आयु करीब 16 वषă जो कWा 11 की छाśा है। िवपWीगण जो बािलग है मȅ Šाथȃ की पुśी के ĥकू ल आने जाने मȅ Šाथȃ की पुśी के अपिरपक मानिसकता का नाजायज लाभ लेकर बहका फु सलाकर Šेम जाल मȅ फं सा कर िदनाक 02.09.2019 को भगा ले गये थे िवपWीगण ने Šाथȃ की पुśी सीमा पर अपने जाल मȅ फं साकर मानिसक ɳप से इतना दबाव बना िदया है िक आप बीती बयान करने सहमी ɷई है। िवपWीगण ने Šाथȃ की पुśी का कै िरयर िवġकु ल खराब कर िदया है। उǘ घटना मȅ िवपWी सं 01 को Šेिरत करके घटना का अंजाम िदया है। अतः अनुरोध है िक एफ.आई.आर. दजă कर Versus Counsel for Applicant(s) : Baljeet Singh, Ashok Kumar Shukla, Suneel Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sewanand @ Ramanand .....Applicant(s) State of U.P. and Others .....Opposite Party(s)
आवģयक कायăवाही करने की कृ पा करे।
5. आवेदक के िवDZान अिधवǘा एवं अपर शासकीय अिधवǘा ũीमती पाɴल काęत को सुना तथा पśावली का पिरशीलन िकया।
6.
आवेदक के िवDZान अिधवǘा ने तकă Šĥतुत िकया िक आवेदक एवं िवपWी संćया 4 एक ही Ŏाम के िनवासी, समान जाित एवं धमă के हȈ तथा परĥपर के िमś हȈ। दोनȋ समय-समय पर िमलते रहे, पिरचय गहरा ɷआ, आकषăण बîा और दोनȋ के मĘय Šेम-संबंध ĥथािपत हो गए। िवपWी पW संćया 4 घटना के तĕसमय बािलग थी, जैसा िक Ŏाम िवकास अिधकारी, Ŏाम नौगोइयां, Ĝलॉक कै सरगंज, जनपद बहराइच DZारा िविभęन ितिथयȋ मȅ िनगăत जęम Šमाण-पśȋ से िसǪ है। जब िवपWी पW संćया 3 (अिभभावक) को उनके Šेम-संबंध की जानकारी ɷई तो उęहȋने इसका कíा िवरोध िकया तथा िमलने-जुलने पर रोक लगा दी। िवपWी संćया 3 DZारा कíा Šितबंध एवं मारपीट िकए जाने के कारण कु मारी सीमा ने िनणăय िलया िक वह आवेदक से िववाह करेगी, िकतु इस दौरान िवपWी संćया 3 ने एक झूठी एवं मनगîंत कहानी बनाकर 04.09.2019 को Šथम सूचना िरपोटă अपराध संćया 424/2019, धारा 363, 366 भादिव मȅ दजă करा दी, तदोपरांत िदनांक 07.09.2019 को पीिíता का िचिकĕसकीय एवं रेिडयोüॉजी परीWण कराया गया, िजसमȅ रेिडयोलॉिजकल Šपś के अनुसार पीिíका की आयु लगभग 18 वषă पाई गई। िचिकĕसीय िरपोटă के अनुसार कु मारी सीमा बािलग थी, िकतु िफर भी उसे नारी िनके तन लखनऊ मȅ अवैध ɴप से रखा गया। इस अिभयोग के िवɴǪ आवेदक एवं पीिíता ने मा० उċच ęयायालय मȅ यािचका संćया 25549 वषă 2019 योिजत कर िगरěतारी-ĥथगन की मांग की, िजसमȅ 18.09.2019 को माननीय ęयायालय ने अंतिरम संरWण Šदान िकया गया। Šासंिगक तĖय यह भी है िक अिभयोग दजă होने के उपरांत तėŌम मȅ पीिíता का धारा 164 द. Š.सं. का बयान िदनांक 16.09.2019 दजă ɷआ, िजसमȅ उसने ĥपǸ कहा िक— "मेरी उŤ 19 वषă है… मȈ अपनी मजȃ से घर छोíकर अके ले थाने गई थी… मुझे िकसी ने बहलाया-फु सलाया नही" तथा माननीय उċच ęयायालय के आदेश मȅ ĥपǸ कहा गया िक धारा 164 द.Š.सं.
के बयान के अनुसार अिभयोजन-कथा असĕय है, तथा यह िक कु मारी सीमा अपनी इċछा से गई थी और उसे आũय गृह मȅ रखना अवैध है। यहां अित Šासंिगक तĖय यह है िक पीिíता DZारा आवेदक के साथ िववाह कर िलया है तथा तब से वह आवेदक/अिभयुǘ की पĕनी के ɴप मȅ उसके साथ दांपĕय जीवन का िनवăहन कर रही है। आवेदक व पीिíता के िववाह का Šमाणपś िदनांिकत 08.11.2019 अनुलĈनक 15 पर संलĈन है। माननीय सवȌċच ęयायालय DZारा Suhani v. State of U.P., िसिवल अपील संćया 4532/2018 मȅ यह िसǪांत Šितपािदत िकया गया है िक यिद अिभयोिजत लíकी बािलग हो एवं ĥवेċछा से अिभयुǘ के साथ गई हो तथा िववाह िकया हो, तो धारा 363/366 भादिव की कायăवाही ęयायिहत मȅ िनरĥत की जानी चािहए। वतăमान वाद पूणăतः उस िनणăय से आċछािदत है। इसिलए, अिभलेखीय सामŎी से Šथम ɯǸया याची संćया-1 के िवɳǪ कोई अपराध िसǪ नहȂ होता रहा है। अतः आपरािधक कायăवाही जारी रखना आवेदकगण के भावी भिवĤय व ęयाियक संकġपना मȅ ęयोयोिचत नहȂ A482 No. 2088 of 2021 2
है। इसिलए, Šģनगत आदेश खिĔडत िकए जाने योĈय है।
7. िवDZान अपर शासकीय अिधवǘा DZारा उपयुăǘ तĖयȋ का िवरोध िकया गया, िकतु यह ĥवीकार िकया गया िक वतăमान मȅ पीिíता, आवेदक की िविधवत पĕनी है और दोनȋ पित-पĕनी के ɴप मȅ दांपĕय जीवन का िनवăहन कर रहे हȈ।
8. ęयायालय DZारा उभय पW के िवDZान अिधवǘागण के तकȍ को सुना गया तथा तकȍ के पिरŠेĨय मȅ पśावली पर उपलĜध साĨय एवं Šģनगत आदेश का पिरशीलन िकया गया।
9. यहां Šासंिगक है िक, माननीय उċचतम ęयायालय ने State of Madhya Pradesh vs. Laxmi Narayan (AIR 2019 SC 1296); State of Madhya Pradesh vs. Dhruv Gurjar (AIR 2019 SC 1106); तथा Parbatbhai Aahir vs. State of Gujarat (AIR 2017 SC 4842) के मामलȋ मȅ यह कहा है िक समाज के िवɳǪ िकए गए अपराध के वल समझौते या कमजोर साĨय के आधार पर समाĚत नहȂ िकए जाने चािहए।
10.
यह भी Šासंिगक है िक यǯिप, दĔड Šिकया की धारा 320 मȅ उिġलिखत अपराधȋ के अितिरǘ िकसी अęय अपराध के समझौते का Šावधान नहȂ है, िफर भी कु छ मामलȋ मȅ पीिíता , भले ही अपराध असंयोजनीय (non-compoundable) हो, आरोिपत के आचरण को Wमा करने के िलए तैयार हो सकता है। ऐसे मामलȋ मȅ ęयायालय धारा 482 Cr.P.C. के अंतगăत अपनी िनिहत शिǘ का Šयोग कर सकता है, भले ही अपराध धारा 320 Cr.P.C. के अंतगăत संयोजनीय न हो।
11. हालाँिक, उċच ęयायालय को सामाęयतः मिहलाɛ और बċचȋ के िवɳǪ यौन अपराधȋ मȅ के वल समझौते के आधार पर हĥतWेप नहȂ करना चािहए, परęतु धारा 482 Cr.P.C. की असाधारण शिǘ का Šयोग पूरी तरह से विजत नहȂ है। ऐसे मामलȋ मȅ ęयायालय को समŎ ɯिǸकोण (holistic approach) अपनानी चािहए और िनĞनिलिखत बातȋ पर िवचार करना चािहए-
(i) समाज की चेतना पर अपराध का Šभाव; (ii) चोट की गंभीरता, यिद कोई हो; (iii) आरोपी तथा पीिíता के बीच समझौते की ĥवैिċछक Šकृ ित; (iv) आरोपी का घटना से पूवă और घटना के पdzात Dzवहार तथा अęय Šासंिगक बातȅ।
12. यहां उġलेखनीय है िक Ankit Jatav vs. State of Rajasthan, S.B. Criminal Misc. Petition No. 3075/2023 मȅ राजĥथान उċच ęयायालय की एकल पीठ ने POCSO Act के अंतगăत कायăवाही इसिलए समाĚत कर दी थी, Ćयȋिक पीिíता ने अपने धारा A482 No. 2088 of 2021 3
164 दĔड ŠिŌया संिहता बयान मȅ कहा था िक आरोपी ने उस पर कोई अपराध नहȂ िकया और वह ĥवयं अपनी इċछा से िववाह करने हेतु घर से गई थी।
13.
वतăमान मामले मȅ, अिभलेख के अवलोकन करने पर यह ĥपǸ होता है िक पीिíता DZारा आवेदक के साथ िववाह कर िलया तथा तब से वह आवेदक/अिभयुǘ की पĕनी के ɴप मȅ उसके साथ दांपĕय जीवन का िनवăहन कर रही है। आवेदक व पीिíता के िववाह का Šमाणपś िदनांिकत 08.11.2019 अनुलĈनक 15 पर संलĈन है। साथ ही, पीिíता ने अपने बयानȋ मȅ भी आवेदक के साथ ĥवेċछा से जाने व Šेम करने का अिभकथन िकया गया है। तėनुसार, यह पिरलिWत है िक पीिíता, आवेदक की िविधवत पĕनी है और दोनȋ पित-पĕनी के ɴप मȅ दांपĕय जीवन का िनवăहन कर रहे हȈ।
14. तėनुसार, यह आवेदन ĥवीकार िकया जाता है।
15. अतः इस मामलȅ मȅ पśावली पर उपलĜध साĨयȋ तथा पीिíता DZारा आवेदक/अिभयुǘ के साथ िववाह कर लेने के तĖय को समŎ ɴप से Ęयान मȅ रखते ɷए तथा माननीय उċचतम ęयायालय DZारा Suhani v. State of U.P., िसिवल अपील संćया 4532/2018 मȅ यह िसǪांत Šितपािदत िविधक िĥथित को देखते ɷए उपरोǘ मामलȅ की समĥत कायăवाही अिभखिĔडत (quashed) की जाती है।
16. Šģनगत Šकरण मȅ यिद कोई अंतिरम आदेश हो तो उसे समाĚत समझा जाय। December 11, 2025 CP.sahani A482 No. 2088 of 2021 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench