K.V.S. SANSTHAN THRU. MANAGER KRISHNA KUMAR YADAV AND 17 OTHERS v. STATE OF U.P. THRU. ITS PRIN. SECY. HIGHER EDU. LKO.
/10270/2025 · 2025-11-20
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[ 2025 DAILYLAW 180688 (ALL) · dailylaw.ai ]
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW WRIT - C No. - 10270 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ũी अजय Šताप िसह, िवDZान अपर मुćय ĥथायी अिधवǘा ũी राɷल शुĆला, राčय सरकार के िवDZान अिधवǘा ũी िśदीप नारायण पाĔडेय एवं राčय सरकार के िवDZान अिधवǘा ũी राजीव ũीवाĥतव को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया।
2. िरट यािचका संćया 10270 सन 2025 अǜारह शैिWक संĥथानȋ की तरफ से Šĥतुत की गयी है जो सभी बेिसक टीिचग सिटिफके ट (BTC) / Diploma in Elementary Education तथा B.Ed. कोसă संिचलत करते हȈ।
3. िरट यािचका संćया 10288 सन 2025 C.J.Y. शैWिणक संĥथान की तरफ से Šĥतुत की गयी है जो वीर बहाɭर िसह पूवाȁचल िवǶिवǯालय, जौनपुर (उ०Š०) से संबǪ है। इस िवǶिवǯालय DZारा संचािलत िकये जा रहे पाǟŌमȋ का कोई उġलेख यािचका मȅ नहȂ है तथा िवǶिवǯालय ĥनातक एवं पराĥनातक ĥतर के कोसă संचािलत कर रहा है।
4. िरट यािचका संćया 10293 सन 2025 माँ Šेमा देवी जन सेवा ęयास DZारा Šĥतुत िकया गया है जो फॉमȆसी मȅ ĥनातक तथा िडĚलोमा कोसă संचािलत करते हȈ।
5. िरट यािचका संćया 10302 सन 2025 बारह िवǯालयȋ DZारा Šĥतुत की गयी है तथा यह िवǯालय भी फॉमȆसी मȅ िडĚलोमा तथा ĥनातक कोसă संचािलत कर रहे हȈ।
6. उपरोǘ सभी यािचकाɛ के माĘयम से िजस शासनादेश िदनांक 08.09.2025 की वैधता को चुनौती दी गयी है, उसके Šािवधान िनĞनवत् हȈः-
"िवषय- Šदेश के समĥत िनजी िवǶिवǯालयȋ, िनजी व अशासकीय सहायता ŠाĚत महािवǯालयȋ एवं उċच शैWिणक संĥथानȋ मȅ माęयता एवं Šवेश ŠिŌया की सघन जाँच के सĞबęध मȅ। महोदय, Versus Counsel for Petitioner(s) : Ajay Pratap Singh Counsel for Respondent(s) : C.S.C. K.V.S. Sansthan Thru. Manager Krishna Kumar Yadav And 17 Others .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Its Prin. Secy. Higher Edu. Lko.
.....Respondent(s)
कृ पया Šदेश के समĥत िनजी िवǶिवǯालयȋ, िनजी व अशासकीय सहायता ŠाĚत महािवǯालयȋ एवं उċच शैWिणक संĥथानȋ मȅ माęयता एवं Šवेश ŠिŌया, अिधिनयम के अनुपालन एवं छाśȋ के िहतȋ के ɯिǸगत Šĕयेक जनपद मȅ िजलािधकारी की अĘयWता मȅ एक िवशेष जाँच सिमित का गठन िकया जाता है, िजसमȅ सिमित के सदĥयȋ का िववरण िनĞनवत् हैः- 1- िजलािधकारी- अĘयW 2- विरǹ पुिलस अधीWक/पुिलस अधीWक (पुिलस किमģनरेट के जनपद होने की दशा मȅ पुिलस किमģनर DZारा नािमत पुिलस अधीWक से अिनĞन ũेणी का अिधकारी) 3- िशWा िवभाग का एक अिधकारी 2-उǘ सिमित Šĕयेक संĥथा से शपथ पś लȅगी, िजसमȅ यह ĥपǸ उġलेख होगा िक संĥथान DZारा के वल माęयता ŠाĚत कोसă की संचािलत िकये जा रहे है। संचािलत सभी कोसȍ की सूची भी सिमित ŠाĚत करȅगी और उनके साथ िवǶिवǯालय अनुदान आयोग और अęय सĞबिęधत सांिविधक संĥथा जैसे आल इिĔडया काउिęसल फॉर टेिĆनकल एजुके शन (AICTE), बार काउिęसल ऑफ इिĔडया (BCI), िडĥटेęस एजुके शन काउंिसल (DEC), डेęटल काउंिसल ऑफ इिĔडया (DCI); इिĔडयन निसग काउंिसल (INC), मेिडकल काउंिसल आफ इिĔडया (MCI), नेशनल काउंिसल फार टीचसă एजुके शन (NCTE), फामȆसी काउंिसल आफ इिĔडया (PCI) इĕयािद की माęयता का िववरण, सीटȋ की संćया सिहत अथवा िवǶिवǯालय/बोडă/िनयामक िनकाय की ĥवीकृ ित का ĥपǸ उġलेख होगा। सिमित यह भी सुिनिdzत करȅगी िक िकसी भी छाś का Šवेश िबना माęयता वाले कोसă मȅ नहȂ ɷआ है। 3-सिमित DZारा यिद िकसी संĥथा मȅ अवैधािनक Šवेश या िबना माęयता ŠाĚत कोसă संचािलत पाये जाते हȈ तो संĥथान पर कठोर कायăवाही का Šĥताव उपलĜध करायेगी। ऐसे मामलȋ मȅ छाśȋ से िलये गये सĞपूणă शुġक को Ĝयाज सिहत वापस कराने की िजĞमेदारी संĥथान की होगी। 4-इस सĞबęध मȅ मुझे यह कहने का िनदेश ɷआ है िक उǘ जाँच कायăवाही को सĞपािदत करते ɷए Šĕयेक जनपद से ŠाĚत िरपोटă को संकिलत कर 15 िदन के अęदर शासन को समेिकत िरपोटă Šĥतुत करने का कǸ करȅ।"
7.
यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ने कहा िक उ०Š० राčय उċचतर िशWा अिधिनयम, 1995 के अंतगăत धारा 2(ख) के अंतगăत पिरषद की पिरभाषा इस Šकार की दी गयी है िक पिरषद का ताĕपयă उपरोǘ अिधिनयम की धारा 3 के अęतगăत गिठत पिरषद से है। अिधिनयम की धारा 3 मȅ Šावधािनत है िक उ०Š० राčय उċचतर िशWा पिरषद एक िनगिमत िनकाय होगी। धारा 4 मȅ पिरषद के गठन का Šािवधान है िजसके अनुसार पिरषद का अĘयW राčय सरकार िकसी जाने माने िशWािवद, जो कु लपित अथवा विरǹ Šशासिनक अिधकारी, जो भारत सरकार के अपर सिचव से नीचे का पद को धािरत न करता हो तथा िजसके िशWा के Wेś मȅ अनुभव तथा योĈयता हो, पिरषद का अĘयW होगा। उċचतर िशWा िवभाग का Šमुख सिचव / सिचव पिरषद का सदĥय सिचव होगा तथा िवǥ िवभाग का Šमुख सिचव / सिचव, योजना िवभाग का Šमुख सिचव / सिचव, WRIC No. 10270 of 2025 2
िवǶिवǯालय अनुदान आयोग का अपर सिचव से अिनĞन ĥतर का अिधकारी, उċचतर िशWा िनदेशक, Šािविधक िशWा िनदेशक, राčय सरकार DZारा नािमत तीन कु लपित, राčय सरकार DZारा िशWा, अिभयंśण तथा िविध के Wेś से नािमत तीन से अनिधक Šćयात िशWािवद, पिरषद DZारा िवǯालयȋ के Šधानाचायȍ मȅ से नािमत िकया गया एक Dzिǘ तथा पिरषद DZारा ćयाितलĜध उǯोगपितयȋ मȅ से नािमत कोई एक Dzिǘ िजसका उċचतर िशWा के Wेś मȅ िवशेष योगदान हो, पिरषद के सदĥय हȋगे। अिधिनयम की धारा 11 मȅ पिरषद की शिǘयाँ एवं गितिविधयȋ का कथन है जो िक योजना एवं समęवय, शैिWक गितिविधयाँ, सलाहकारी गितिविधयाँ, िवǥीय गितिविधयाँ एवं अęय गितिविधयȋ से संबंिधत हȈ। धारा 18 मȅ यह Šािवधान है िक राčय सरकार पिरषद को अिधिनयम के उǩेģयȋ की पूित के िलए आवģयक िनदȆश िनगăत कर सकती है।
8. यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा का कथन है िक अिधिनयम मȅ Šावधािनत पिरषद DZारा ही उċच िशWा संĥथानȋ, िवǶिवǯालयȋ से संबंǪ महािवǯालयȋ मȅ कोई भी जांच की कायăवाही की जा सकती है तथा पिरषद से िभęन कोई भी जांच सिमित महािवǯालयȋ मȅ जांच नहȂ कर सकती है। यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ने कहा िक शासनादेश िदनांक 08.09.2025 के माĘयम से गिठत सिमित मȅ िजलािधकारी को अĘयW बनाया गया है तथा विरǹ पुिलस अधीWक / पुिलस अधीWक अथवा पुिलस किमģनर DZारा नािमत पुिलस अधीWक से अęय ũेणी के अिधकारी को सदĥय बनाया गया है। शैWिणक संĥथानȋ मȅ िजलािधकारी अथवा पुिलस अधीWक को जांच करने का कोई अिधकार ŠाĚत नहȂ है।
9.
यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ने यह भी कहा िक इसी Šģन को सिĞमिलत करते ɷए इस ęयायालय के समW बɷत सी यािचकाएँ लंिबत हȈ तथा इस यािचका को भी लंिबत कर िदया जाय तथा अęय सभी यािचकाɛ के साथ ही सुना एवं िनणȃत िकया जाय। यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ने यह भी कहा िक ऐसा ही एक Šģन एक जनिहत यािचका संćया 11201 सन 2010 मȅ भी सिęनिहत है जो आपरािधक Šकीणă यािचका संćया 8810 सन 2023 तथा अęय अनेक यािचकाɛ से सĞबǪ होकर लंिबत है। ऐसा ही Šģन एक अęय ęयायमूित पीठ के समW िरट सी. संćया 9680 सन 2025 मȅ भी सिęनिहत है। उǘ यािचका मȅ िदनांक 26.09.2025 को पािरत एक आदेश DZारा एकल पीठ ने यह कहा था िक Šकरण आपरािधक Šकीणă िरट यािचका संćया 8810 सन 2023 को सुन रही पीठ के समW रखकर यह ĥपǸ करा िदया जाय िक Ćया एकल पीठ िरट यािचका सुन सकती है या नहȂ। िरट यािचका संćया 9680 सन 2025 मȅ िदनांक 13.10.2025 को खĔडपीठ ने आदेश पािरत करके कहा िक खĔडपीठ माś िविध िवǶिवǯालयȋ के संबंध मȅ परीWण कर रही है तथा अęय संĥथानȋ के संबंध मȅ नहȂ एवं अęय संĥथानȋ के संबंध मȅ सुनवाई एकल पीठ मȅ की जा सकती है।
10. Šĥतुत िरट यािचका के Šĥतर 4 मȅ कहा गया है िक समĥत यािचकाकताăगण बेिसक टीिचग सिटिफके ट (िडĚलोमा इन एलीमेęŖी एजुके शन) तथा बी.एड कोसă संचािलत कर रहे हȈ अतः खĔडपीठ DZारा िरट सी. संćया 9680 सन 2025 मȅ पािरत आदेश िदनांक 13.10.2025 के अनुसार यह ęयायालय इस यािचका की सुनवाई कर सकती है।
11.
शासनादेश मȅ अंिकत है िक तीन सदĥयीय सिमित Šदेश के समĥत िनजी िवǶिवǯालयȋ, िनजी WRIC No. 10270 of 2025 3
व अशासकीय सहायता ŠाĚत महािवǯालयȋ एवं उċच शैWिणक संĥथानȋ मȅ माęयता एवं Šवेश ŠिŌया, अिधिनयमȋ के अनुपालन एवं छाśȋ के िहतȋ के ɯिǸगत तीन सदĥयीय सिमित का गठन िकया गया है जो सिमित संĥथा से इस आशय का शपथ-पś लेगी िक संĥथान मȅ के वल माęयता ŠाĚत कोसă संचािलत िकये जा रहे हȈ तथा संचािलत सभी पाǟŌमȋ की सूची ŠाĚत करेगी। सिमित िवǶिवǯालय अनुदान आयोग और अęय संबंिधत वैधािनक संĥथाएँ जैसे ऑल इिĔडया कȎिसल फॉर टेिĆनकल एजूके शन, बार कȎिसल ऑफ इिĔडया, िडĥटȅस एजुके शन कȎिसल, डेĔटल कȎिसल ऑफ इिĔडया, इिĔडयन निसग कȎिसल, मेिडकल कȎिसल ऑफ इिĔडया, नेशनल कȎिसल फॉर टीचसă एजुके शन, फॉमȆसी कȎिसल ऑफ इिĔडया इĕयािद की माęयता का िववरण, सीटȋ की संćया सिहत अथवा िवǶिवǯालय / बोडă / िनयामक िनकाय की ĥवीकृ ित का ĥपǸ उġलेख होगा। सिमित यह भी सुिनिdzत करेगी िक िकसी भी छाś की Šवेश िबना माęयता ŠाĚत कोसă मȅ नहȂ है तथा उǘ के उġलंघन की दशा मȅ संĥथान के िवɳǪ कायăवाही का Šĥताव उपलĜध करायेगी।
12. शासनादेश DZारा गिठत सिमित DZारा जांच की कायăवाही माś संĥथानȋ से शपथ-पś ŠाĚत करके संपािदत करना Šĥतािवत है तथा जांच सिमित को शपथ-पś ŠाĚत करने के उपराęत माś यह देखना है िक संĥथा मȅ िबना माęयता ŠाĚत कोसă संचािलत न हो रहा हो एवं अवैधािनक Šवेश न िकये जा रहे हȋ।
13.
िबना माęयता ŠाĚत कोसă संचािलत करना अथवा अवैधािनक Šवेश लेना छाśȋ के िहतȋ के िवɳǪ कायă है तथा ऐसे अनेक Šकरण सामने आये हȈ िजनमȅ संĥथानȋ मȅ िबना माęयता ŠाĚत कोसă मȅ Šवेश िलए गये अथवा Wमता से अिधक सीटȋ पर Šवेश िलये गये िजसमȅ छाśȋ के धन हािन के साथ-साथ समय की भी Wित होती है एवं उनके िहतȋ पर ऐसा Šितकू ल Šभाव पíता है िजसकी Šितपूित माś शुġक वापसी से संभव नहȂ होती है। ऐसे कृ ĕय करना िविध मȅ दĔडनीय अपराध भी है। ऐसी पिरिĥथित मȅ यिद राčय सरकार ऐसी घटनाɛ की पुनरावृिǥ रोकन के उǩेģय से सिमित गिठत करके जांच करना चाहती है तो संĥथानȋ को िवरोध करने का कोई वैधािनक आधार ŠाĚत नहȂ है Ćयȋिक इस सिमित की जांच का दायरा उ०Š० राčय उċचतर िशWा पिरषद अिधिनयम के अंतगăत जांच के दायरे से िभęन तथा वृहद है।
14. िवDZान अपर मुćय ĥथायी अिधवǘा ũी राɷल शुĆला ने मĘय Šदेश राčय बनाम कु मारी िनवेिदत जैन AIR 1981 SC 2045 के िनणăय का आũय िलया िजसमȅ माननीय उċचतम ęयायालय ने यह अवधािरत िकया है िक भारतीय संिवधान के अनुċछेद 162 के अंतगăत राčय सरकार को Šशासिनक शिǘयां उन सभी Wेśȋ मȅ ŠाĚत होती हȈ िजसमȅं उनको िवधायी शिǘयां ŠाĚत हȈ। ũी राɷल शुĆला का तकă है िक जबिक राčय सरकार को िशWा संĥथानȋ के संबंध मȅ िवधायी शिǘयां ŠाĚत हȈ तो इस संबंध मȅ Šशासिनक शिǘयां भी राčय सरकार मȅ िनिहत हȈ। Šशासिनक शिǘयȋ का उपयोग करते ɷए राčय सरकार ने उǘ शासनादेश िनगăत िकया है जो राčय सरकार के Wेśािधकार की सीमा से परे नहȂ कहा जा सकता है।
15. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ने कहा िक भारतीय संिवधान के अनुċछेद 162 के परęतुक मȅ Šावधान है िक राčय सरकार की Šशासिनक शिǘयां िवधायी शिǘयȋ के अधीन हȋगी तथा Šशासिनक शिǘयȋ का Šयोग करते ɷए िकसी िवधायी Šावधान के िवपरीत आदेश िनगăत नहȂ WRIC No. 10270 of 2025 4
िकया जा सकता।
16. Šĥतुत शासनादेश िकसी भी िवधायी Šावधान का उġलंघन नहȂ करता है तथा इस कारण से शासनादेश अवैधािनक नहȂ है।
17.
यािचकाकताăगण के िवDZान अिधवǘा ने िजलािधकारी, गाजीपुर DZारा कु छ Ĝलाक मȅ जांच सिमित DZारा िवǯालयȋ को िदये गये एक Šपś की Šित ęयायालय के समW Šĥतुत की िजसमȅ संĥथान मȅ संचािलत पाǟŌमȋ की वांिछत सूचना िनधाăिरत Šाɴप पर मांगी गयी है। उǘ Šाɴप मȅ संĥथान का नाम पाǟŌम / कोसă का नाम, महािवǯालय / संĥथान िकस िनयामक संदाय से माęयता ŠाĚत है, माęयता िक ितिथ (पśांक एवं िदनांक सिहत), माęयता का Šमाण-पś संćया तथा उसकी Šमािणत Šित संलĈन करना, महािवǯालय / संĥथान मȅ पाǟŌमवार Šवेश हेतु अनुमęय सीटȋ की संćया (िवǶिवǯालय / िनयामक संकाय DZारा) Šदǥ अनुमित पś के साथ तथा पाǟŌम / कोसă मȅ वतăमान मȅ िकतने छाś नामांिकत हȈ, अंिकत करना है। राčय सरकार DZारा शासनादेश िनगăत कर जांच सिमित DZारा उपरोǘ जानकारी ŠाĚत करना िकसी भी वैधािनक Šावधान का उġलंघन नहȂ कर रहा तथा इसमȅ कोई अवैधािनकता न होने की िĥथित मȅ शासनादेश मȅ इस िरट यािचका के माĘयम से कोई हĥतWेप करने का कोई आधार नहȂ है।
18. तėनुसार, यह यािचका िनरĥत की जाती है। November 20, 2025 Ankit WRIC No. 10270 of 2025 5 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench