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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 18046 (ALL)

NITIN GARG v. STATE OF U.P.

BAIL/4910/2025 · 2025-07-24

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:123293 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4910 of 2025 Applicant :- Nitin Garg Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ayush Mishra,Prabha Shanker Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A.,Vishal Mohan Gupta Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शदी ववशद्वाल ममोहन गगुपद्वा एवव रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कमो सगुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक वनवतन गगर ककी ओरि सवे मगु०अ०सव० 738/2024, अवतगरत धिद्वारिद्वा 305A, 317(2), 331(3) बदी.एन.एस., थद्वानद्वा ममोददीनगरि, धजलद्वा गद्वाधजयद्वाबद्वाद मम जमद्वानत परि मगुक करिनवे हवेतगु प्रस्तगुत वकयद्वा गयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तगुत वकयद्वा वक आववेदक कमो इस प्रकरिर मम गलत एवव फजर्जी ढवग सवे झझूठद्वा फव सद्वायद्वा गयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा कमोई भदी कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररिपमोरर अवत -ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा कमोई समगुवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक प्रथम सझूचनद्वा ररिपमोरर मम नद्वावमत नहहीं हहै , ददौरिद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घरनद्वा सवे सवबवधधित वकसदी भदी सववदग्धि वस्तगु ककी बरिद्वामदगदी दवशरत नहहीं ककी गयदी हहै , जमो भदी बरिद्वामदगदी दवशरत ककी गयदी हहै, वह पझूररततः फजर्जी एवव बनद्वावरदी तथ्ययों परि आधिद्वाररित हहै तथद्वा उक बरिद्वामदगदी ककी कमोई वशनद्वाख्त नहहीं करिद्वायदी गयदी हहै। आववेदक बबक कद्वा न तमो महैनवेजरि हहै , न कमरचद्वारिदी हहै। आववेदक बबक कद्वा मद्वात खद्वातद्वाधिद्वारिक हहै। सदी .सदी.रदी.वदी फगु रवेज मम भदी आववेदक दद्वारिद्वा कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित वकयद्वा जद्वानद्वा पररिलवक्षित नहहीं हमो रिहद्वा हहै एवव घरनद्वा कद्वा कमोई स्वतवत सद्वाक्षिदी नहहीं हहै। आववेदक कद्वा कमोई पझूवर आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पगुनतः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक ककी तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयमोग करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हमोगदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक्षि खगुद कमो उपलब्धि करिद्वाएगद्वा औरि उन सभदी शतरव कमो स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जमो न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिमोवपत करिवेगदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 25.01.2025 सवे कद्वारिद्वागद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कमो जमद्वानत परि छमोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवव ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिमोधि करितवे हहए तकर प्रस्तगुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवजवेय एवव गवभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कमो जमद्वानत परि न छमोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरव कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्ययों एवव पररिणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलमोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठमोस ववरिमोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी ककी अनगुपणस्थवत एवव उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवभद्वावनद्वा न हमोनवे कवे तथ्य कमो दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कमो जमद्वानत परि मगुक करिनवे कद्वा उपयगुक आधिद्वारि हहै। 6. अततः वद्वाद कवे गगुर -दमोष परि वबनद्वा कमोई वरप्परदी वकए हहए आववेदक कमो उपरिमोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवबवधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवतगुवष परि व्यवकगत बवधि-पत एवव अधधिक धिनरिद्वावश कवे कमोई भदी दमो प्रवतभझू प्रस्तगुत करिनवे परि वनमनधलधखत शतरव कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छमोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीक्षिर कवे ददौरिद्वान अवभयमोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयमोजन सद्वावक्षिययों व पदीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कमो ण्डिरिद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करिवेगद्वा , वह परिदीक्षिर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा कमोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हमोगद्वा तथद्वा परिदीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयमोग करिवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हमोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवततद्वा कद्वा दगुरूपयमोग नहदी करिवेगद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप नहहीं हमोगद्वा न कमोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पगुधलस अधधिकद्वाररिययों कमो कमोई प्रलमोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हदी उनसवे कमोई वद्वायदद्वा करिवेगद्वा , धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कमो उजद्वागरि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिमोक शतरव मम सवे वकसदी कवे उलवघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानगुसद्वारि रिद्द करिनवे कमो स्वतवत हहै। Order Date :- 25.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad