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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 5607 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ũी िदनेश कु मार ũीवाĥतव तथा उċच ęयायालय के िवDZान अिधवǘा ũी िवजय दीिWत (जो इस ęयायालय के आदेश िदनांक 17.09.2025 के अनुपालन मȅ िवचारण ęयायालय से संगत अनुदेश ŠाĚत करके इस ęयायालय के समW उपिĥथत हȈ) को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस यािचका DZारा यािचकाकताă ने िसिवल जज (अवर खĔड), Šतापगî को मूल वाद संćया 1558 सन 1999 के शीŏ िनĥतारण का िनदȆश िदये जाने का अनुरोध िकया है।
3. ęयायालय के पीठासीन अिधकारी से ŠाĚत अनुदेशȋ के आधार पर िवDZान अिधवǘा ũी िवजय दीिWत ने इस ęयायालय को सूिचत िकया िक वतăमान पीठासीन अिधकारी ने वषă 2024 मȅ पदभार Ŏहण िकया तब वाद मृत पWकारȋ के उǥरािधकािरयȋ के Šितĥथापन के ĥतर पर था। इसके पdzात जब वाद वादी साĨय के ĥतर पर पɷंचा तो वादी ने कई बार सुनवाई का ĥथगन चाहा है। िदनांक 12.11.2025 को वादी को साĨय का अंितम अवसर देते ɷए Šकरण िदनांक 27.01.2026 के िलए िनयत िकया गया तथा अब Šकरण िदनांक 27.01.2026 के िलए िनयत है।
4. जबिक, वाद 26 वषă से अिधक पुराना हो चुका है। ऐसी पिरिĥथित मȅ िवचारण ęयायालय को लंबे अंतराल पर ितिथयां नहȂ िनयत करनी चािहए।
5. तėनुसार, उपरोǘ तĖयȋ के आलोक मȅ यह यािचका इस िनदȆश के साथ िनĥतािरत की जाती है िक िवDZान िसिवल जज (अवर खĔड), Šतापगî मूल वाद Versus Counsel for Petitioner(s) : Dinesh Kumar Srivastava Counsel for Respondent(s) : Vijay Dixit Lalit Kumar Yadav .....Petitioner(s) Ram Sumer @ Sumer .....Respondent(s)
संćया 1558 सन 1999 का िनĥतारण िबना िकसी पW को अनावģयक ĥथगन देते ɷए, शीŏतापूवăक, िविधनुसार तथा छोटे अंतराल पर ितिथयां िनयत करते ɷए करना सुिनिdzत करȅगे। December 5, 2025 Ankit A227 No. 5607 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench