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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 17791 (ALL)
AKHILESH YADAV AND ANOTHER v. STATE OF U.P.
BAIL/5393/2025 · 2025-08-03
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 17791 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:130953 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 5393 of 2025 Applicant :- Akhilesh Yadav And Another Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Kumar Parikshit,Nitesh Vishwakarma,Pavan Gupta Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदकगण अधखिलवेश यद्वादव एववं अजय वनषद्वाद उफर जणसस्टिक ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 44/2024, अवंतगरत धिद्वारद्वा 317(2), 317(5), 317(4), 305B बली.एन.एस., थद्वानद्वा जली.आर.पली. मऊ, धजलद्वा वद्वारद्वाणसली मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रसतसुत वकयद्वा गयद्वा हहै।
3. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रसतसुत वकयद्वा वक आववेदकगण कको इस प्रकरण मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उन्हहोंनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। वतरमद्वान घस्टिनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली भली सवंवदग्धि वसतसु ककी बरद्वामदगली दवशरत नहहीं ककी गयली हहै, जको भली बरद्वामदगली दवशरत ककी गयली हहै, वह पझूणरततः वमथ्यद्वा हहै एववं उसकद्वा ककोई सवतवंत सद्वाकली नहहीं हहै। यहद्वावं प्रद्वासवंवगक तथ्य हहै वक वतरमद्वान वद्वाद मम अन्य सह-अवभयसुक अकरम शवेखि ककी जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 44261/2024 मम वभन्न न्यद्वायपलीठ दद्वारद्वा वभन्न वतधथ कको सवलीकक त ककी जद्वा चसुककी हहै। अततः जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयसुक
सवे समद्वान भझूवमकद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदकगण भली जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारली हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदकगण ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली ववे ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएवंगवे और उन सभली शतरवं कको सवलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हह जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करमगवे। आववेदकगण वनदरष हह तथद्वा वह इस प्रकरण मम वद० 19.09.2024 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदकगण कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रसतसुत वकयद्वा वक आववेदकगण दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यहों एववं पररणसथवतयहों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद, सबझूतहों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणसथवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदकगण कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अततः वद्वाद कवे गसुण -दकोष पर वबनद्वा ककोई वस्टिप्पणली वकए हहए आववेदकगण कको उपरकोक ववणरत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्टि पर व्यवकगत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको -दको प्रवतभझू प्रसतसुत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदकगण ववववेचनद्वा यद्वा परलीकण कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ
छवेड़छद्वाड़ नहहीं करमगवे। ii. आववेदकगण अवभयकोजन सद्वावकयहों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायमगवे/धिमकद्वायमगवे नहहीं। iii. आववेदकगण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करमगवे , ववे परलीकण कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक सथगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणसथत हहोंगवे तथद्वा परलीकण मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोग करमगवे। iv. आववेदकगण जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी सवतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहली करमगवे और वकसली भली अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हहोंगवे न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करमगवे। v. आववेदकगण प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दमगवे न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करमगवे, धजसकवे कद्वारण उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यहों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकण न्यद्वायद्वालय आववेदकगण ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको सवतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad