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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 17738 (CHH)
XYZ v. STATE OF CHHATTISGARH
CRA/813/2025 · 2025-08-03
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 17738 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025}
2025:CGHC:38549 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक अपु ल क्रमां"क
-813
/2025
1. अ स -----अपु लर्थी, तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार र्थीना प्रभार , पुलिलस र्थीना-सपुल, लि4ल-दाग5, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा अपु लर्थी, द्वार : श्री समां र लिस"ह, अलि9वेक्ता । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री तिप्रया शमां5, पु=नाल अलि9वेक्ता । मांनाना या न्यायामां>ति5 श्री स"4या क मांर 4यासवेल
, न्याया9 श
!! तिनार्ण5या पु ठ पुर पुरिर !! 04/08/2025
1. भार या नागरिरक सरक्षा स"तिह, 2023 कE 9र-415 (2) क ह प्रस् इस दाण्डिक अपु ल मांJ तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्याया9 श (एफ०टी ०स ०), दाग5, लि4ल-दाग5, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमां"क-38/2023 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ अ स” मांJ पुरिर तिनार्ण5या तिदाना"क-01/04/2025 कR चनाS दा गई ह= । लि4सक ह अपु लर्थी, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.05 16:44:51 +0530
2 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025} कR तिनाम्नानासर दाRषलिसद्ध कर दाण्डि तिकया गया ह= । लि4स आग स"क्षापु मांJ “प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” स स"Rलि9 तिकया 4 रह ह=Z- दाRषलिसतिद्ध दादाश 9र-376 (2)(ढ) भार या दा स"तिह, 1860 10 वेष5 क सश्रीमां करवेस एवे" 5,000/- रूपुया क अर्थी5दा र्थी अर्थी5दा रतिश अदा ना करना कE दाश मांJ 03 मांह क अतिरिरक्ता सश्रीमां करवेस कE स4 स दाण्डि तिकया गया ।
2. उल्लेखना या ह= तिक “प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” क ह अपु लर्थी, कR 9र-313 भार या दा स"तिह क अपुर9 स दाRषमांक्ता तिकया गया ह= ।
3.
प्रकरर्ण क थ्या स"क्षापु मांJ इस प्रकर ह= तिक पु तिa (अ०स०-1) एक वेयास्क मांतिहल रह
ह= । अपु लर्थी,, रिरश् मांJ उसक मांमां कE टी क दावेर ह= । पु तिa क अपु लर्थी, स पुरिरचया तिदाना"क 22.12.2015 कR सपुल मांJ आयाRलि4 मांमां कE टी क सगई समांरRह मांJ हcआ । तिदाना"क 23.12.2015 कR श"करपुर, सपुल मांJ आयाRलि4 तिलक समांरRह क दाSरना दाRनाd क च च और मांलक हcई । अपु लर्थी, ना पु तिa कR शदा क प्रलRभाना तिदाया । तिदाना"क 01.11.2016 कR दाRपुहर मांJ उसक श"करपुर, सपुल ण्डिस्र्थी तिनावेस पुर 4कर उसक सर्थी शर रिरक स""9 स्र्थीतिपु तिकया र्थी याह कहकर तिवेश्वेस तिदालया तिक वे दाRनाd एक ह 4ति क हf और वेह श घ्र उसस तिवेवेह करग, वेह तिकस प्रकर कE तिच" ना कर । इस प्रकर तिवेवेह क आश्वेसना दाकर अपु लर्थी, लगर पु तिa क सर्थी शर रिरक स""9 ना रह । पुश्च मांJ अपु लर्थी,, तिवेवेह कR टील हcए याह कह रह तिक पुहल उसकE हना क तिवेवेह हR 4ए, त्पुश्च वेह तिवेवेह करग । 4 पु तिa
3 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025} ना दावे नाया R अपु लर्थी, ना उसस आया5 समां4 मां"तिदार मांJ तिवेवेह R कर लिलया, तिक" उस अपुना सर्थी कभा नाहi रख । उसक पुश्च भा श"करपुर, सपुल आकर उसक सर्थी शर रिरक स""9 ना रह । अ"तिमां र तिदाना"क 13.10.2022 कR dगरगढ़ ण्डिस्र्थी वे=लकमां लj4 मांJ दाRनाd क च शर रिरक स""9 स्र्थीतिपु हcआ । त्पुश्च पु तिa द्वार तिदाना"क 15.11.2022 कR र्थीना सपुल मांJ लिललिख रिरपुRटी5 (प्रदाश5 पु -1) प्रस् कE, लि4सक आ9र पुर प्रर्थीमां स>चना रिरपुRटी5 (प्रदाश5 पु -2) दा45 कE गई । उभायापुक्षा क तिचतिकत्सकEया पुर क्षार्ण करया गया, मांSक नाक्श =यार तिकया गया, सतिक्षायाd क कर्थीना लिलए गए र्थी स"पु>र्ण5 तिवेवेचना उपुर" अतिभायाRग-पुत्र प्रस् तिकया गया ।
4.
अतिभायाR4ना द्वार अपुना पुक्षा समांर्थी5ना मांJ क ल-6 सतिक्षायाd क पुर क्षार्ण र्थी 46 दास्वे4 प्रदाश5 तिचन्ह"तिक करया गया । 9र-313 दा प्रतिक्रया स"तिह क ह याना मांJ अपु लर्थी, ना पु तिa क सर्थी तिवेवेह करना कE कR स्वे कर तिकया और अपुना तिवेपुर
सतिक्षायाd क कर्थीनाd कR इनाकर कर हcए कह ह= तिक वेह तिनादाlष ह=, उस झू>ठ फ" स गया ह= । उभायापुक्षा क सना 4कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लर्थी, कR इस तिनार्ण5या कE कण्डिक-1 क अनासर दाRषलिसद्ध कर दाण्डि तिकया गया । लि4स इस अपु ल मांJ चनाS दा
गई ह= ।
5. अपु लर्थी, क तिवेद्वाना अलि9वेक्ता क क5 ह= तिक पु तिa एक वेयास्क मांतिहल ह=, 4R प्रर"भा स ह पु>र्ण5 रूपु स सहमां पुक्षा रह ह= । अपु लर्थी, एवे" पु तिa क मांध्या आया5 समां4 मां"तिदार मांJ तिवेलि9वे रूपु स तिवेवेह भा स"पुन्न हcआ ह= । इसक अतिरिरक्ता अपु लर्थी, कR भार या दा स"तिह कE 9र 313 क अ"ग5 दाRषमांक्ता तिकया 4 चक ह= । ऐस मांJ 4 पु तिa सहमांति क सर्थी स""9 मांJ रह ह=, R अपु लर्थी, क तिवेरुद्ध भार या दा स"तिह कE 9र 376(2)
4 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025} (ढ) क अ"ग5 अपुर9 प्रमांतिर्ण नाहi हR ह= । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार सक्ष्या कE उतिच रूपु स समां क्षा ना कर हcए अपु लर्थी, कR दाRषलिसद्ध कर दाण्डि तिकया गया ह= । अपु लर्थी, कE दाRषलिसतिद्ध स"दाह स पुर स्पुष्ट, पुया5प्त और तिवेश्वेसना या सक्ष्या पुर आ9रिर नाहi ह= ।
“प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” ण्डिस्र्थीर रख 4ना याRग्या नाहi ह= । अZ अपु ल स्वे कर कर उस दाRषमांक्ता तिकया 4या । तिवेद्वाना अलि9वेक्ता द्वार अपुना क5 क समांर्थी5ना मांJ न्यायादृष्ट" Amol Bhagwan Nehul v. The State of Maharashtra and another, 2025 SCC OnLine SC 1230 क हवेल तिदाया गया ह= ।
6. उत्तीरवेदा /रज्या पुक्षा कE ओर स उपुण्डिस्र्थी तिवेद्वाना अलि9वेक्ता ना इस अपु ल क तिवेरR9 कर हcए क5 तिकया ह= तिक अतिभायाR4ना सतिक्षायाd ना पु>र्ण5 रूपु स अतिभायाR4ना मांमांल क समांर्थी5ना तिकया ह= लि4नापुर अतिवेश्वेस तिकया 4ना क कRई करर्ण नाहi ह= । तिवेचरर्ण न्यायालया क
“प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” सक्ष्या कE उतिच समां क्षा पुर आ9रिर ह= । अतिभायाR4ना ना अपु लर्थी, क तिवेरूद्घ अपुना मांमांल स"दाह स पुर प्रमांतिर्ण तिकया ह= । अपु लर्थी, पुक्षा द्वार अपु ल मांJ उठया गया क5 स्वे कर याRग्या नाहi ह= । अZ अपु ल खरिर4 तिकया 4या ।
7.
उभायापुक्षा क क5 श्रीवेर्ण तिकया गया र्थी अतिभालख क स>क्ष्मांपु>वे5क पुरिरश लना तिकया गया ।
8. अतिभालख मांJ उपुलब्9 थ्या, सक्ष्या एवे" पुलिलस क अ"तिमां प्रतिवेदाना स याह ण्डिस्र्थीति स्पुष्ट रूपु स पुरिरलतिक्षा हR ह= तिक पु तिa (अ०स०-1) एक वेयास्क मांतिहल रह ह= । याह भा थ्या तिनातिवे5वेदा ह= तिक वेह वेष5 2016 स लकर पुलिलस रिरपुRटी5 दा45 करए 4ना क अपु लर्थी, क स स"पुक5 मांJ रह ह=, 4R तिक उसस दा>र क पुरिरवेरिरक रिरश् मांJ ह= । स्वेया" पु तिa ना अपु लर्थी, क सर्थी अपुना तिवेवेह क स""9 मांJ आया5 समां4, तिभालई नागर, वेyत्ती ख-6, लि4ल-दाग5, छत्ती सगढ़ द्वार 4र तिवेवेह प्रमांर्ण-पुत्र (प्रदाश5 पु -6 एवे" पु -7) प्रस् तिकए
5 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025} हf, लि4नाक अनासर दाRनाd क तिवेवेह तिदाना"क 25.02.2022 कR स"पुन्न हcआ र्थी । उक्ता तिवेवेह कR अपु लर्थी, ना भा 9र 313 दा प्रतिक्रया स"तिह क अ"ग5 दा45 याना मांJ स्पुष्ट रूपु स स्वे कर तिकया ह= ।
9. अपु लर्थी, पुक्षा द्वार अपुना क5 क समांर्थी5ना मांJ न्यायादृष्ट" Amol Bhagwan Nehul (Supra) तिनार्ण5या क हवेल तिदाया गया ह=, लि4समांJ मांनाना या उच्चमां न्यायालया द्वार याह स्पुष्ट रूपु स अवे9रिर तिकया गया ह= तिक यातिदा उभायापुक्षा क मांध्या दा र्घ5कल ना स""9 आपुस
सहमांति पुर आ9रिर रह हd, R ऐस मांमांल मांJ मांत्र तिवेवेह क प्रलRभाना क आ9र पुर शर रिरक स""9 कR लत्कर कE श्रीर्ण मांJ लया 4ना न्यायाRतिच नाहi हRग । मांनाना या उच्चमां न्यायालया ना उक्ता तिनार्ण5या कE कण्डिक-9 मांJ तिनाम्नानासर मांहत्वेपु>र्ण5 अवे9रर्ण प्रतिपुतिदा कE ह=–
“9. In our considered view, this is also not a case where there was a false promise to marry to begin with. A consensual relationship turning sour or partners becoming distant cannot be a ground for invoking criminal machinery of the State. Such conduct not only burdens the Courts, but blots the identity of an individual accused of such a heinous offence. This Court has time and again warned against the misuse of the provisions, and has termed it a folly Naim Ahmed v. State (NCT) of Delhi (2023) SCC OnLine SC 89 to treat each breach of promise to marry as a false promise and prosecute a person for an offence under section 376 IPC. 10.
उपुरRक्ता न्यायादृष्ट" क प्रकश मांJ इस मांमांल मांJ आए थ्या और सक्ष्या पुर तिवेचर करJ R याह ण्डिस्र्थीति स्पुष्ट हR ह= तिक पु तिa (अ०स०-1) एक वेयास्क मांतिहल रह ह=, लि4सना स्वेया" अपु लर्थी, स आया5 समां4 मां"तिदार मांJ तिवेवेह तिकए 4ना कE कह ह= । उस तिवेवेह क प्रमांर्णपुत्र प्रदाश5 पु -6 और प्रदाश5 पु -7 क रूपु मांJ प्रस् भा तिकया गया ह= ।
11. स्वेया" पु तिa क स"पु>र्ण5 न्यायालया ना याना स याह थ्या स्पुष्ट हR ह= तिक अपु लर्थी,, 4R तिक उसक दा>र क स""9 ह=, स उसकE 4ना-पुहचना तिवेवेह समांरRह क दाSरना हcई, तिफर दाRनाd
6 / 6 {Cr. A. No.-813 of 2025} क च मांRइल पुर लगर च हR रह । वेह अपु लर्थी, क सर्थी समांया-समांया पुर र्घर स हर भा 4 रह और दाRनाd लj4 आतिदा मांJ सर्थी ठहर रह, 4ह} उनाक च शर रिरक स""9 भा ना । गभा59रर्ण एवे" उसक पुश्च गभा5पु कE र्घटीनाए" भा हcई", तिक" इसक वे4>दा उनाक स""9 ना रह और अ"Z आया5 समां4 मां"तिदार मांJ तिवेवेह भा स"पुन्न हcआ ।
12. इस प्रकर, पु तिa क स"पु>र्ण5 याना एवे" प्रस् सक्ष्या स याह तिनाष्कष5 तिनाकल ह= तिक वेह वेयास्क मांतिहल हRकर सहमां पुक्षा रह ह= । ऐस पुरिरण्डिस्र्थीति मांJ, 4 तिक स""9 दा र्घ5कलिलक, स्वे=ण्डिच्छक एवे" आपुस सहमांति पुर आ9रिर रह ह=, अपु लर्थी, क तिवेरुद्ध 9र 376(2)(ढ) भार या दा स"तिह क अ"ग5 अपुर9 प्रमांतिर्ण नाहi हR । लि4सस
“प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” ण्डिस्र्थीर रख 4ना याRग्या नाहi पुया 4 ।
13. अZ अपु ल स्वे कर कE 4 ह= । “प्रश्ना9 ना तिनार्ण5या” अपुस् तिकया 4 ह= र्थी अपु लर्थी, कR आरRतिपु अपुर9 स दाRषमांक्ता तिकया 4 ह= ।
14. अपु लर्थी, कR 4ल मांJ तिनारूद्घ या गया ह= । यातिदा उसकE अन्या मांमांल मांJ आवेश्याक ना हR R उस त्कल रिरह तिकया 4या ।
15.
तिनार्ण5या कE प्रति क सर्थी तिवेचरर्ण न्यायालया कR मां>ल अतिभालख र्थी तिनार्ण5या कE सत्याप्रतिलिलतिपु स""लि9 4ल अ9 क्षाक कR आवेश्याक कया5वेह ह स>चनार्थी5 एवे" पुलनार्थी5 श घ्रपु>वे5क प्रतिष हR । सह /- (स"4या क मांर 4यासवेल) न्याया9 श पुRमांना