MITHUN KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. DISTT. MAGISTRATE DISTT. PRATAPGARH
/6838/2025 · 2025-12-04
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 176485 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6838 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ũी जय Šकाश िसह वĕस तथा राčय सरकार के िवDZान अिधवǘा ũी धीरज ओझा को सुना तथा पśावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुċछेद 227 के अंतगăत Šĥतुत इस यािचका DZारा यािचकाकताă ने जनपद ęयायाधीश, Šतापगî DZारा Dzवहार पुनरीWण संćया 45 सन 2025 मȅ पािरत आदेश िदनांक 17.09.2025 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके DZारा पुनरीWणकताă - उǥर Šदेश राčय DZारा आदेश 41 िनयम 27 Dzवहार ŠिŌया संिहता के अंतगăत Šĥतुत Šाथăना-पś ĥवीकार कर िलया गया। उǘ Šाथăना-पś मȅ पुनरीWणकताă - राčय सरकार की तरफ से कहा गया िक पुनरीWण Dzवहार ŠिŌया संिहता की धारा 47 के अंतगăत Šĥतुत वाद संćया 34 सन 2025 मȅ पािरत आदेश िदनांक 20.05.2025 के िवɳǪ Šĥतुत िकया गया है। धारा 47 के Šाथăना-पś की कायăवाही मȅ मूल वाद संćया 28 सन 1988 की पśावली संलĈन थी िकęतु पुनरीWण मȅ पśावली आɸत नहȂ है। पुनरीWण के िनĥतारण के िलए मूल वाद संćया 28 सन 1988 के अिभलेख तथा उċच ęयायालय DZारा यािचका संćया 1714 सन 1984 मȅ पािरत आदेश िदनांक 24.05.1984 की Šित ęयायालय के समW होना आवģयक है।
3. यािचकाकताă के िवDZान अिधवǘा ने कहा िक यह अिभलेख पुनरीWण मȅ धारा 41 िनयम 27 Dzवहार ŠिŌया संिहता के अंतगăत नहȂ Šĥतुत िकये जा सकते हȈ।
4. पुनरीWण मȅ िवचारण ęयायालय की पśावली मंगाया जाना आवģयक होता है िजससे िक पुनरीWणकताă ęयायालय अिभलेख से यह देख सके िक िवचारण ęयायालय ने Ćया śुिट कािरत की। राčय सरकार DZारा कोई Šाथăना-पś न देने की िĥथित मȅ भी पुनरीWण ęयायालय के िलए यह अिनवायă था िक वह मूल वाद तथा धारा 47 Dzवहार ŠिŌया संिहता के Šाथăना-पś की संपूणă Versus Counsel for Petitioner(s) : Jay Prakash Singh Vats, Ajay Kumar Soni Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Mithun Kumar .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Distt. Magistrate Distt. Pratapgarh .....Respondent(s)
पśावली मंगाकर ही पुनरीWण पर िनणăय करȅ। ऐसी पिरिĥथित मȅ राčय सरकार ने संगत अिभलेखȋ की छायाŠित पुनरीWण ęयायालय के समW Šĥतुत करने मȅ कोई śुिट कािरत नहȂ की है।
5.
जहाँ तक इस ęयायालय DZारा यािचका संćया 1714 सन 1984 मȅ पािरत आदेश िदनांक 24.05.1984 का Šģन है, इस ęयायालय का आदेश Šदेश की सभी ęयायालयȋ पर बाĘयकारी है तथा यिद उसे साĨय मȅ Šĥतुत नहȂ भी िकया जाय तो भी बहस के ĥतर पर पुनरीWण ęयायालय के समW इस ęयायालय के आदेश की Šित रखी जा सकती है तथा पुनरीWण ęयायालय को उसका संXान लेना ही होगा।
6. ऐसी पिरिĥथित मȅ यह यािचका इस िनदȆश के साथ िनĥतािरत की जाती है िक जनपद ęयायाधीश, Šतापगî मूल वाद संćया 28 सन 1988 तथा धारा 47 Dzवहार ŠिŌया संिहता के अंतगăत वाद संćया 34 सन 2025, िजससे पुनरीWण संćया 45 सन 2025 उĕपęन होता है, का सĞपूणă मूल अिभलेख मंगाकर उसका अवलोकन करके ही पुनरीWण िनणȃत करȅगे तथा पुनरीWण पर िनणăय लेते समय इस ęयायालय DZारा यािचका संćया 1714 सन 1984 मȅ पािरत आदेश िदनांक 24.05.1984 को भी ɯिǸगत रखȅगे। December 4, 2025 Ankit A227 No. 6838 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench