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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 172357 (ALL)

SHOBHNATH @ VAKIL v. STATE OF U.P.

BAIL/37524/2025 · 2025-10-28

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 37524 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 758/2020 , अन्तगर्त धारा 376 भा०दं०िव०, थाना सराय लखंसी, िजला मऊ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्रथम सूचना िरपोटर्, किथत घटना से अत्यिधक देरी के उपरांत पंजीकृ त करायी गयी है। आवेदक, किथत भट्टे पर मजदूर का कायर् करता था तथा किथत पीिड़ता सहमत पक्षकार है। वास्तिवक तथ्य यह है िक आवेदक को गाँव की राजनीित व पुरानी रंिजश के कारण इस मामलें में नािमत िकया गया है। पीिड़ता की मेिडको लीगल जांच िरपोटर् के अवलोकन से पता चला िक पीिड़ता ने स्वयं अपनी मेिडकल जांच के िलए इनकार कर िदया था, जो अिभयोजन कथानक को संिदग्ध पिरलिक्षत कर रहा है। प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता द्वारा अपने धारा 164 दण्ड प्रिक्रया संिहता के बयान में िपछले बयान के िवपरीत बयान िदया और यह स्वीकार िकया गया िक हम दोनों की सहमित से शारीिरक संबंध बनाए गये...मैं अपने गांव जाकर शादी करना चाहती हूं। शोभनाथ से कोई मतलब अब नहीं है। इससे पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदक द्वारा किथत घटना में कोई भूिमका नहीं है। आगे यह भी कहा गया िक प्रथम सूचना िरपोटर् में आवेदक के िवरुद्ध लगाए गए आरोप पूणर्तः झूठे, काल्पिनक, िनराधार और काल्पिनक हैं, अतः उन पर कोई भरोसा नहीं िकया जा सकता। आगे यह भी कहा गया िक प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् करने के संबंध में तथ्य आवेदक के संज्ञान में नहीं था, इसिलए, बार-बार गैर-जमानती वारंट जारी होने और सीआरपीसी की धारा 82 के तहत प्रिक्रया होने पर भी न तो आवेदक जांच अिधकारी के समक्ष उपिस्थत हुआ और न ही उसने न्यायालय के समक्ष आत्मसमपर्ण िकया। Versus Counsel for Applicant(s) : Ajeet Singh, Anil Kumar Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Shobhnath @ Vakil .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) तत्पश्चात, िवद्वान िवचारण न्यायालय के समक्ष आवेदक के उपिस्थत न होने के कारण और िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, िजला मऊ द्वारा दंड प्रिक्रया संिहता (सीआरपीसी) की धारा 83 के अंतगर्त पािरत आदेश के अनुपालन में, िदनांक 30.03.2021 को गवाहों की उपिस्थित में आवेदक के आवास पर कु कीर् की कायर्वाही की गई। तब आवेदक ने िवद्वान िनचली अदालत के समक्ष उपिस्थत होकर जमानत यािचका दायर की। यहाँ यह उल्लेख करना भी उिचत है िक वतर्मान मामले में िजन सह-अिभयुक्तों के नाम भी शािमल हैं, उन्हें िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा पहले ही बरी कर िदया गया है।आवेदक घटना स्थल पर मौजूद नहीं था, इसिलए, आवेदक को उसके िखलाफ प्रथम सूचना िरपोटर् के पंजीकरण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसिलए , बेरोजगार होने के कारण वह अपनी आजीिवका चलाने के िलए मुंबई में स्थानांतिरत हो गया और आवेदक की पीठ पीछे, वतर्मान अिभयोजन शुरू िकया गया है। आवेदक पूणर्तः िनदोर्ष व्यिक्त है और उसने कभी िकसी असामािजक गितिविध में भाग नहीं िलया है और न ही अिभयोजन पक्ष द्वारा आरोिपत किथत अपराध िकया है, आवेदक का कोई भी आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 10.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. BAIL No. 37524 of 2025 2 आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। 8. सबंिधत िवचारण न्यायालय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस वाद से संबंिधत सत्र परीक्षण/परीक्षण का िनस्तारण शीघ्रता के आधार पर अितशीघ्र करना सुिनिश्चत करें। October 29, 2025 CP.sahani BAIL No. 37524 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad