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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 172170 (ALL)

MANOJ KUMAR BIND @ ANKIT SAHANI v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/33927/2025 · 2025-10-29

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33927 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत। 2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 87/2025, अन्तगर्त धारा 137(2), 87, 64(2M) भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 5J(ii)/6 पॉक्सो एक्ट, थाना बांसडीह रोड, िजला बिलया में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 3. िवपक्षी सं० 4/सूचनाकतार् की ओर से िवद्वान अिधवक्ता श्री अशोक कु मार मौयार् का वकालतनामा दािखल है, िकतु वह आज उपिस्थत नहीं है। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता न्यायालय के आदेश िदनांक 07.10.2025 के अनुपालन में मुख्य िचिकत्साअिधकारी बिलया द्वारा पीिड़ता का प्रेिषत ऑिसिफके शन प्रमाण पत्र दािखल िकया गया, इसे पत्रावली पर फ्लैग-X के रूप में रखा जाय। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्रथम सूचना िरपोटर् िवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। किथत पीिड़ता द्वारा अपने धारा 180 व 183 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के बयान में आवेदक पर किथत अपराध किरत करने का कोई आक्षेप आरोिपत नहीं िकया गया, अिपतु अपने सहेली के यहां स्वेच्छा से जाने का कथन िकया गया है। िकतु इसके उपरांत दुराशय व अपने पिरजनों के तहत किथत पीिड़ता द्वारा अपना मजीद बयान अंिकत कराया गया, िजसमें उसके द्वारा आवेदक पर बहला-फु सलाकर भगाने व किथत घटना कािरत करने का कथन िकया गया िकया गया है। प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता के ऑिसिफके शन टेस्ट के अनुसार बािलग है, जो Versus Counsel for Applicant(s) : Bhaiya Ghanshyam Singh Counsel for Opposite Party(s) : Ashok Kumar Maurya, G.A. Manoj Kumar Bind @ Ankit Sahani .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) अपना अच्छा-बुरा समझने में सक्षम है तथा उसके बयानों में भारी िवरोधाभाष है। इसिलए, आवेदक जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 8. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 9. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 10. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की BAIL No. 33927 of 2025 2 जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 30, 2025 CP.sahani BAIL No. 33927 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad