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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 172102 (ALL)

RAMESH CHANDRA v. STATE OF U.P.

BAIL/35472/2025 · 2025-10-27

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 35472 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु.अ.सं० 199/2025 अन्तगर्त धारा 115(2)/ 351(3)/ 352/ 64(1)/ 62/ 75(2) बी.एऩ.एस., थाना कोतवाली नगर, िजला एटा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक पुिलस में आरक्षी के पद पर तैनात था। उसकी तैनाती सन् 2008 में गािजयाबाद में उ०प्र० पॉवर कॉिरशन िल० गािजयाबाद में थी। वही पर उक्त मिहला का नन्दोई िबजली िवभाग में तैनात था, नन्दोई ने बताया िक उसकी साली नन्दग्राम में िकराये पर रहती है। उसका मकान मािलक उसको परेशान करता है और मकान मािलक खुद िबजली चोरी से चलाता है। इस पर आवेदक ने उस मकान मािलक पर कायर्वाही की और िबजली चोरी पकडी तो उपरोक्त मिहला ने अपने नन्दोई के माध्यम आवेदक का फोन नम्बर ले िलया और आवेदक के सम्पकर् में आ गयी। तब से लेकर आज तक तंग परेशान व ब्लैकमेल करती आ रही है। आवेदक ने कई बार वािदया की माँ को मना िकया, वह उसको फोन न करे, परन्तु वह नहीं मानी और बराबर पैसे ऐंठने की िनयत से आवेदक के सम्पकर् में बनी रही। जब कई बार वािदनी की माँ ने आवेदक से पैसे मांगे तो आवेदक ने 2,50,000/- रूपया अपने खाते से िदनांक 12.05.2021 को वािदया की माँ मंजू त्यागी के खाते में ट्रांसफर िकया, जो आज तक वापस नहीं िमला। ब्लैकमेल करने की नीयत से वािदया की माँ मंजू त्यागी ने आवेदक की अिटगा कार यू०पी० 83 ए०एन० 7978 को भी अपने नाम ट्रांसफर करा िलया। आवेदक को वािदया की माँ के द्वारा ब्लैकमेल कर एक प्लॉट खरीद िलया गया, िजसका बैनामा आवेदक ने वािदया के मां के नाम कराया, िजसमे वह स्वयं गवाह बना। इसी क्रम में वािदया द्वारा दबाव एवं ब्लैकमेल कर पुनः एक प्लॉट अपने नाम खरीदवाया गया, िजसमे आवेदक गवाह है। वािदया की माँ आवेदक को नौकरी के नाम पर िक वह उसकी नौकरी छु ड़वा देगी और उसकी झूठी िशकायत करके उसकी छिव को धूिमल कर देगी, कहकर बराबर मानिसक प्रताड़ना आवेदक को देती रही एवं धन ऐंठती रही। आवेदक ने उपरोक्त मुकदमा के वािदया के साथ न कोई छेड़छाड़ की है और न ही बलात्कार करने का प्रयास िकया है। उपरोक्त घटना का कोई प्रत्यक्ष साक्षी नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह Versus Counsel for Applicant(s) : Kuldeep Singh Sekera Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ramesh Chandra .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 18.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 1. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 1. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 1. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 1. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 28, 2025 S.Mishra BAIL No. 35472 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad