Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 171969 (ALL)

RAJU CHAUHAN v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/22560/2025 · 2025-10-29

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22560 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु.अ.सं० 35/2025 अन्तगर्त धारा 137(2)/ 87/ 115(2)/ 127(2)/ 352/ 65(1) बी.एऩ.एस. एवं धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट, थाना रवीन्द्रनगर धूस, िजला कु शीनगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा अिभयोजन साक्षी सं. 01 के बयान की प्रमािणत प्रितिलिप अनुलग्नक (X) के रूप में पत्रावली पर रखा जाए। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। मामले के अिभयोजन साक्षी सं. 02 पीिडता ने अपने बयान में कथन िकया िक मेरी मां छः बहन है, मेरे माता िपता जैसे ही मैं बािलग हुयी, मेरी शादी करना चाहते थे, लेिकन मैंने कहा िक मेरी शादी अभी नही होगी दो तीन साल बाद होगी, इस पर मेरे माता िपता मुझसे नाराज होकर शारीिरक रूप से प्रतािड़त करने लगे, मैं डर वश अपने मौसी के यहां चली गयी और वही पर आठ नौ िदन रही, मैं लखनऊ नही गयी थी, मेरे पास मोबाइल नही रहता है, मैंने राजू को फोन नहीं िकया, और न ही राजू मुझे कही ले गया था और न ही मुझे कही रखा था, राजू ने मेरे साथ कोई गलत काम नहीं िकया था, न ही शारीिरक संबंध ही बनाया था, इस प्रकार मामले की उक्त साक्षी पक्षद्रोही हो गयी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 20.03.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. Versus Counsel for Applicant(s) : Rakesh Kumar, Sanjay Pathak Counsel for Opposite Party(s) : Aashirwad Mishra, G.A., Sanjay Kumar Mishra Raju Chauhan .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 30, 2025 S.Mishra BAIL No. 22560 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad