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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 37609 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 441/2025 , अन्तगर्त धारा 69, 351(3) भारतीय न्याय संिहता, थाना अकबरपुर, िजला कानपुर देहात में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। किथत पीिड़ता पूवर् से शादीशुदा है तथा उसकी आयु लगभग 21 वषर् से अिधक है और वह अच्छी तरह जानती है िक सही-गलत क्या हैं, परंतु के वल आवेदक को भारी रािश हड़पने के िलए, आवेदक के िवरुद्ध यह झूठी और तुच्छ प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् की गई है। आवेदक बी िववािहत है। इस मालमें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक प्रथम सूचना िरपोटर् 9 िदन के िवलंब के पश्चात िदनांक 25.09.2025 को पंजीकृ त करायी गयी है, इसका कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। यह उल्लेख करना भी अत्यंत आवश्यक है िक उसी िदन शाम को सूचनाकतार् द्वारा प्राथर्ना पत्र िदया गया था िक उसने अन्य व्यिक्तयों के उकसावे पर सूचनाकतार् के िवरुद्ध प्राथर्ना पत्र िदया है, अब वह आगे कायर्वाही नहीं करना चाहती है। िदनांक 17.09.2025 के आवेदन की फोटोकॉपी इस शपथपत्र के अनुलग्नक संख्या- 6 के रूप में संलग्न िकया गया है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक और सूचनाकतार् िरश्तेदार थे और पत्नी के चाचा की छोटी बहन होने के कारण आवेदक और सूचनाकतार् के बीच मधुर संबंध थे, मधुर संबंधों का लाभ उठाने के िलए किथत पीिड़ता ने आवेदक से भारी धनरािश की मांग करने के िलए उसका शोषण करना शुरू िकया और जब आवेदक ने कहा िक वह बहुत बड़ी रािश देने में असमथर् है, तो सूचनाकतार् ने आवेदक को धमकी दी िक वह पिरणाम भुगतने के िलए तैयार रहे और इसके पिरणामस्वरूप आवेदक के िवरुद्ध वतर्मान झूठी और तुच्छ प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् की गई है। किथत पीिड़ता Versus Counsel for Applicant(s) : Ram Lal Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mukesh Yadav .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) के धारा 180 व 183 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहत के बयान से पिरलिक्षत हो रहा है िक वह सहमत पक्षकार है तथा स्वेच्छा से आवेदक के पास गयी थी। आवेदक का वतर्मान मामले के अलावा कोई आपरािधक इितहास नहीं है और न ही वह िकसी अन्य अपराध में दोषी ठहराया गया है। किथत पीिड़ता के िचिकत्सीय परीक्षण आख्या के अनुसार उसके शरीर पर कोई बाहरी चोट आना अंिकत नहीं है, इससे अिभयोजन कथानक और संिदग्ध पिरलिक्षत हो रहा है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में
सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 30.09.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4.
आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. BAIL No. 37609 of 2025 2
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 29, 2025 CP.sahani BAIL No. 37609 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad