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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 168619 (ALL)
RAMJEET VERMA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO
BAIL/11920/2024 · 2025-05-21
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 168619 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:30278 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 11920 of 2024 Applicant :- Ramjeet Verma Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko Counsel for Applicant :- Pradeep Kumar Shukla,Ramakar Shukla,Yogesh Prajapati Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रमप्राकर शशुक्लप्रा ककी तरफ सके उपससरत वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अवभिनवि धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री सत्यकेन्द शश्रीविप्रासतवि कको सशुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पसतशुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्राधररनश्री नके मशुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 281 सन 2017 अन्तगरत धिप्रारप्रा 498- , A 304- B भिप्रा०दसिं०ससिं० वि धिप्रारप्रा 3/4 दहकेज पवतषकेधि अधधिवनयम रप्रानप्रा बल्दश्रीरप्राय धजलप्रा सशुल्तप्रानपशुर मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 14.10.2017 कको पप्राधररनश्री, उसकके पवत, पशुतत्रों तरप्रा पशुवतयत्रों आवद कके वविरुद धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम कहप्रा गयप्रा वक वशकप्रायतकतप्रार नके अपनश्री बहन कप्रा वविविप्राह पप्रारर्थी कके सप्रार वदनप्रासिंक 22.05.2011 कको वकयप्रा रप्रा। सभिश्री अवभियशुकगण दहकेज कके धलए वशकप्रायतकतप्रार ककी बहन कको पतप्रावड़ित वकयप्रा करतके रके तरप्रा वदनप्रासिंक 11.10.2017 कको इन लकोगत्रों नके वशकप्रायतकतप्रार ककी बहन ककी हत्यप्रा कर दश्री।
4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम ककोई चकोर पकप्राश मम नहहीं आयश्री तरप्रा वविसरप्रा जप्रासिंच मम एल्यशुवमवनयम फफॉसफप्राइड नप्रामक वविष ककी उपससरवत पप्रायश्री गयश्री।
5. पप्रारर्थी तरप्रा उसकके समसत पररविप्रारश्रीजन नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर ककी विहैधितप्रा कको चशुननौतश्री दकेतके हहए इस न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रावचकप्रा ससिंख्यप्रा 28221
MB सन 2017 पसतशुत ककी रश्री जको वदनप्रासिंक 10.01.2018 कके आदकेश सके यह कहतके हहए वनसतप्राररत कर दश्री गयश्री रश्री वक धिप्रारप्रा 173 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगरत पशुधलस आख्यप्रा पसतशुत हकोनके तक पप्राधररनश्री तरप्रा उसकके पशुत कको वगरफ्तप्रार नहहीं वकयप्रा जप्रायकेगप्रा। पप्रारर्थी तरप्रा उसककी मप्रामाँ कके अवतररक अन्य सभिश्री पररविप्रारश्रीजन कके वविरुद आरकोपत्रों ककी पशुवष्टि न हकोनके पर वविविकेचक नके असिंवतम आख्यप्रा पसतशुत कर दश्री रश्री। वविविकेचक नके वदनप्रासिंक 04.09.2018 कको पप्रारर्थी तरप्रा उसककी मप्रामाँ कके
वविरुद आरकोप-पत पसतशुत कर वदयप्रा हहै।
6. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पसतशुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
7. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा एक अन्य अवभियशुकप्रा सशुषमप्रा कको जमप्रानत पप्राररनप्रा -पत ससिंख्यप्रा 4150 सन 2025 मम पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 15.05.2025 दप्रारप्रा वनयवमत जमप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चशुककी हहै।
8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद लगप्रायके गयके आरकोपत्रों ककी पशुवष्टि हहई।
9.
उपरकोक तथ्यत्रों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम पप्रारर्थी तरप्रा उसकके समसत पररविप्रारश्रीजन कके वविरुद एक समप्रान पकक वत कके आरकोप लगप्रायके गयके हह तरप्रा अन्य सभिश्री अवभियशुकत्रों कके वविरुद लगप्रायके गयके आरकोपत्रों ककी पशुवष्टि नहहीं हहई हहै ; वविविकेचनप्रा कके दनौरप्रान पप्रारर्थी तरप्रा उसककी मप्रामाँ ककी वगरफ्तप्रारश्री पर इस न्यप्रायप्रालय नके रकोक लगप्रायश्री हहई रश्री ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै , विह वदनप्रासिंक 19.09.2024 सके न्यप्रावयक अवभिरकप्रा मम हहै; वविविकेचनप्रा पसूणर हको चशुककी हहै; एक अन्य सह-अवभियशुकप्रा कको इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयवमत जमप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चशुककी हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी भिश्री जमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
10. तद्नशुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत सविश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
11. आविकेदक रप्रामजश्रीत विमप्रार कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजसरटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतशुवष्टि कके अनशुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पसतशुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभियकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभियकोजन पक कके गविप्राहत्रों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपससरत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench