Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 16703 (ALL)
MOHIT YADAV v. STATE OF U.P.
BAIL/4345/2025 · 2025-07-21
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 16703 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 16703 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC:119934 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4345 of 2025 Applicant :- Mohit Yadav Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Abhishek Kumar,Ashish Mishra,Avanish Kumar Srivastava,Lal Mani Singh,Mandeep Singh,Sukrampal Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक मकोवहित यद्वादव ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 227/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 406, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा ककोतवद्वालली, धजलद्वा मसुजफ्फरनरर मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हिवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हिहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हिहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहिहीं वकयद्वा हिहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहिहीं वकयद्वा रयद्वा हिहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हिहै। घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहिहीं हिहै। आववेदक कक ष्रद्वा इन्टरप्रद्वाईजवेज सवे आनलद्वाईन टटवेवण्डिवंर कद्वा कद्वायर नहिहीं करतद्वा हिहै और न हिली 15 ललीटर आयल कवे एक्सटटहैक्ट कवे धलए ककोई कद्वावंटटवेक्ट वकयद्वा हिहै और न हिली ककोई इनवद्वाईस तहैयद्वार ककी हिहै। आववेदक सधजरकल इक्यसुपममट कद्वा कद्वायर करतद्वा हिहै और वकसली भली प्रकद्वार ककी घटनद्वा सवे पझूवर यद्वा पश्चद्वातत् एन्टवेण्डिद्वार आयल एक्सटटवेक्ट ककी टटवेवण्डिवंर नहिहीं ककी हिहै तथद्वा न हिली ककोई छल करनवे कवे धलए ककोई कझू टरवचत दस्तद्वाववेज तहैयद्वार वकयवे हिह। वतरमद्वान वद्वाद मम सहि-अवभयसुक हिरररद्वाम तवेलली ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 11057/2025, आदवेश वदनद्वावंवकत 29.04.2025 कको इसली न्यद्वायपलीठ दद्वारद्वा स्वलीकक त हिको चसुककी हिहै। अतत जमद्वानत प्रद्वाप्त सहि-अवभयसुक सवे आववेदक ककी समद्वान भझूवमकद्वा हिकोनवे कवे आधिद्वार पर आववेदक भली जमद्वानत प्रद्वाप्त करनवे कद्वा अधधिकद्वारली हिहै। पसुनत उनकद्वा यहि भली कथन हिहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यहि आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हिहै वक वहि कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहियकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हिहै और जब भली आवश्यकतद्वा हिकोरली वहि ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हिहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हिहै तथद्वा वहि इस प्रकरर मम वद० 21.01.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हिहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हिहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हिहै ,
इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हिकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हिहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हिहै।
6. अतत वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हिहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्टि पर व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहिहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पलीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहिहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा, वहि परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हिकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहियकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहिद्वा हिकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहिली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहिहीं हिकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहिहीं दवेरद्वा न हिली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हिम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहिनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हिहै। Order Date :- 22.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad