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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 167001 (ALL)

RAJU v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS

/1086/2025 · 2025-09-23

Saurabh Lavania

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 1086 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J. 1. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State and perused the record. 2. This criminal revision has been filed by the revisionist impeaching the impugned judgment and order dated 15.07.2025, passed by the Additional Principal Judge-II, Family Court, Raebarelly (in short "Family Court") in Case No.378/2020 (Anita & Others Versus Raju). By the impugned judgment and order the Family Court allowed the application filed by the opposite party Nos.2 to 4 under Section 125 of Cr.P.C. awarded the maintenance of Rs.3000/- to the opposite party No.2 and Rs.1000/- each to the opposite party Nos. 3 and 4. 3. The brief facts of the case, which to the view of this court are relevant for deciding the present case, are as under :- (i) According to application under Section 125 Cr.P.C., the marriage of the revisionist and the opposite party No.2 was solemnized as per Hindu rites and rituals and after Gauna ceremony the opposite party No.2 started living with the revisionist. (ii) Out of the wedlock of the revisionist and the opposite party No.2, opposite party Nos. 3 and 4 were born. (iii) It is to be noted that aforesaid has not been refuted. (iv) As per version of the opposite party No.2 in the application under Section 125 Cr.P.C. revisionist had illicit relations with one lady of the same village, therefore, the revisionist started avoiding the opposite party No.2 and her children. (v) Due to the above reason, the opposite party No.2 left her matrimonial home along with the opposite party Nos. 3 and 4 and started living with her parents. (vi) Due to the financial crunch, when the opposite party No.2 was unable to maintain herself and her children, she filed the application under Section 125 Cr.P.C. for maintenance before the Family Court. (vii) The Family Court, after considering the submissions advanced by learned counsel for the parties and appreciating the evidence on record, by means of the impugned judgment and order awarded the meager maintenance amount as aforesaid. Versus Counsel for Revisionist(s) : Dilip Kumar Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Raju .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others .....Opposite Party(s) 4. On being asked as to on which issue the Family Court has recorded perverse findings, Shri Dilip Pandey, learned counsel for the revisionist has very fairly stated that the finding on Issue No.2 is perfectly justified. The Issue No.2 and finding on the issue are extracted herein under : "िनस्तारण अवधारणीय िबन्दु संख्या– 2. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others .....Opposite Party(s) 4. On being asked as to on which issue the Family Court has recorded perverse findings, Shri Dilip Pandey, learned counsel for the revisionist has very fairly stated that the finding on Issue No.2 is perfectly justified. The Issue No.2 and finding on the issue are extracted herein under : "िनस्तारण अवधारणीय िबन्दु संख्या– 2. यह अवधारणीय िबन्दु इस आशय का िवरिचत है िक क्या आवेदकगण अपना भरण-पोषण करने में असमथर् है, एवं िवपक्षी ने आवेदकगण की उपेक्षा की है, तथा क्या वे सभी िवपक्षी से भरण-पोषण प्राप्त करने के अिधकारी हैं?" उल्लेखनीय है िक जहाँ तक आवेदकगण का अपना भरण-पोषण करने में असमथर् होने का प्रश्न है, इस सम्बन्ध में आवेिदका का यह सशपथ कथन िक िवपक्षी द्वारा जब से मारपीट कर घर से िनकाल िदया गया है, तब से वह अपने मायके में िनवास कर रही है, इस दौरान िवपक्षी द्वारा उसकी कोई खोज खबर भी नहीं ली गई है। आवेिदका ग्रामीण पिरवेश की अनपढ़ गैर हुनरमंद मिहला है, उसके समक्ष गंभीर भरण-पोषण आिद का संकट बना हुआ है। वह अपना व अपने बच्चों का भरण-पोषण कर पाने में पूरी तरह से अक्षम है। िवपक्षी ने दौरान प्रितपरीक्षा स्वीकार भी िकया है िक जब से आवेदकगण अपने नायके में रह रहे हैं, इस दौरान उसने कोई खचार् आिद नहीं िदया है। अतः यह स्पष्ट है िक आवेदकगण अपना भरण-पोषण करने में असमथर् है। जहाँ तक उपेक्षा िकय जाने का प्रश्न है तो प्रस्तुत मामले में यह स्वीकृ त है िक िवगत 7-8 वषोर्ं से आवेिदका अपने मायके में िकसी प्रकार से जीवन व्यतीत कर रही है। इस दौरान िवपक्षी द्वारा अवेिदका की कोई खोज खबर भी नहीं ली गई है। िवपक्षी ने अपनी प्रितपरीक्षा में यह भी स्वीकार िकया है िक जब से आवेिदका अलग रह रही है, उसने कोई पैसा नहीं िदया ना ही कभी हाल चाल िलया। पत्रावली पर भी ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है िजससे यह प्रतीत हो िक िवपक्षी ने आवेिदका को वाद लड़ने के दौरान ही कोई आिथक मदद की हो, या उसकी खोज बीन की हो। अतः यह तथ्य भी िवपक्षी द्वारा आवेिदका की उपेक्षा िकये जाने का प्रमाण है। उल्लेखनीय है िक आवेिदका िवपक्षी की िववािहता पत्नी है तथा दो बच्चों की माँ है। भारतीय सामािजक ताने बाने में िवपक्षी का यह दाियत्व है िक वह अपनी हैिसयत अनुसार अपनी िववािहत पत्नी व बच्चों का भरण-पोषण करें। अवधारणीय िबन्दु सं० 1 से स्पष्ट है िक आवेिदका युिक्तयुक्त कारण से िवपक्षी से पृथक रह रही है, अतः वह िवपक्षी से भरण-पोषण प्राप्त करने की अिधकािरणी है। तदनुसार अवधारणीय िबन्दु संख्या 2 भी आवेदकगण के पक्ष में िनस्तािरत िकया जाता है। 5. Learned counsel for the revisionist has further stated that the findings on Issue No.1 and Issue No. 3 are perverse. The Issue Nos.1 and Issue No. 3 and the findings on the same are extracted herein under :- "8- िनस्तारण अवधारणीय िबन्दु संख्या-1 यह अवधारणीय िबन्दु इस आशय का िवरिचत है िक क्या आवेिदका सं० 1, श्रीमती अनीता, िवपक्षी राजू की ब्याहता पत्नी है, तथा क्या अवयस्क संतान क्रमशः िशवदेवी व आिदत्य, िवपक्षी की संतान हैं, एवं क्या आवेदकगण युिक्तयुक्त कारण से िवपक्षी से पृथक रह रहे हैं? उल्लेखनीय है िक प्रस्तुत मामले में यह स्वीकृ त तथ्य है िक आवेिदका सं० 1, श्रीमती अनीता, िवपक्षी राजू, की पत्नी है, तथा अवयस्क संतान क्रमशः िशवदेवी व आिदत्य, िवपक्षी की संतान है, अतः भारतीय साक्ष्य अिधिनयम-2023 की धारा 53 के अन्तगर्त इन तथ्यों को िकसी अितिरक्त साक्ष्य से सािबत करने की आवश्यकता नहीं है। जहाँ तक आवेदकगण का िवपक्षी से युिक्तयुक्त कारण से पृथक रहने का प्रश्न है तो उक्त के सम्बन्ध में आवेिदका ने अपने साक्ष्य शपथ पत्र के माध्यम से अपने वाद पत्र में किथत तथ्यों की पुिष्ट की है तथा दौरान प्रितपरीक्षा सशपथ कथन िकया है िक मैं राजू से आठ साल से अलग रह रही हूँ। जब मैं राजू से अलग हुई थी तब राजू ठीक था। उसका टी०बी० का कोई इलाज नहीं चल था। मैं राजू के साथ रहना चाहती हैं। आठ साल पहले राजू से झगड़ा हुआ तब मैं बच्चे लेकर मायके चली आयी, तब से मायके में ही हूँ। क्योंिक मेरे सास ससुर और मेरे पित ने जबरदस्ती िनकाल िदया। राजू से झगड़ा होने के बाद मायके चली गई तो उसके पाँच छह CRLR No. 1086 of 2025 2 साल बाद न्यायालय में मुकदमा िकया था। मेरे पित का गांव की िजस मिहला से अवैध सम्बन्ध है, मैं उसका नाम नहीं जानती हूँ। मैंने उस मिहला के घर पर अपने पित को देखा। मैं जब अपने पित के घर से मायके आयी थी यह उसी साल की घटना है। मेरे पित को िकतने साल से टी०बी० है नहीं पता, लेिकन टी०बी० हो गयी है। यह कहना गलत है िक मेरे पित राजू को टी०बी० हो गई, इसिलए मैं उसे छोडकर मायके चली गयी। अपने कथनों के समथर्न में आवेिदका ने अपनी माँ कृ ष्णावती बतौर पी. डब्लू 2 परीिक्षत िकया है, िजन्होने भी अपने साक्ष्य शपथ पत्र के माध्यम से आवेिदका के कथनों की पुिष्ट की है, तता दौरान प्रितपरीक्षा सशपथ कथन िकया है िक मैंने अनीता की शादी राजू के साथ आज से पन्द्रह सोलह साल पहले की थी। मेरी लडकी अनीता और राजू का सम्बन्ध सात-आठ साल से खराब चल रहा है। मैं अपनी लड़की अनीता को ससुराल भेजना चाहती हूँ। िवपक्षी, राजू द्वारा स्वयं को परीिक्षत करते हुए दौरान प्रितपरीक्षा सशपथ कथन िकया है िक मेरी शादी हुए 25-26 साल हो गये हैं। िशवदेवी मेरी लड़की है। आिदत्य मेरा पुत्र है। यह कहना गलत है िक गांव की एक बहू जो पासी िबरादरी की थी, उससे मेरा अवैध सम्बन्ध हो गया था। यह भी कहना गलत है िक मेरी पत्नी अनीता ने अवैध सम्बन्ध को लेकर मुझे मना िकया था, और मैंने मारपीटकर घर से िनकाल िदया। जब से मुकदमा चल रहा है मैंने तब से अनीता और अपने बच्चों को गुजारा भत्ता के िलए कु छ नहीं िदया। मैं अपने बच्चों को गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं हूँ क्योंिक मैं कमा नहीं पाता। जब से पत्नी व बच्चे मायके गये हैं, िबदा कराने नहीं गया। यह कहना गलत है िक गांव की पािसन को आज भी मैं गुजारा दे रहा हूँ। ओ.पी.डब्लू. 2, छेदीलाल, जो िवपक्षी के िपता हैं, ने प्रितपरीक्षा में कथन िकया है िक राजू मेरा लड़का है, अनीता मेरी बहन है। अनीता राजू की शादी बारह तेरह साल पहले हुई थी। छह -सात साल से अनीता अपने बच्चों को लेकर मायके में रह रही है। अनीता अपने मायके में रह रही है, इसिलए कोई खचार् नहीं िदया। मैंने सुना है िक मेरे लड़के राजु का सम्बन्ध पासी से रहा है। मैंने आँखों से देखा है। यह कहना गलत है िक अनीता ने अवैध सम्बन्ध को लेकर िवरोध िकया था और मैंने और राजू ने अनीता को घर से िनकाल िदया। अनीता मायके में है इसिलए मैंने बच्चों की पढ़ाई िलखाई का इंतजाम नहीं िकया। मेरे लड़के को टी०बी० थी, अब सही हो गई है। अपनी बहू अनीता, नाती नाितन को लेने के िलए अपने समिधयाने नहीं गया। उल्लेखनीय है िक आवेिदका द्वारा अपने वाद पत्र में िवपक्षी का गांव की िकसी अन्य मिहला के साथ अवैध सम्बन्ध होना तथा आवेिदका के िवरोध करने पर उसे मारपीट कर घर से िनकाल देने, के कारण अपने नायके में रहने का कथन िकया गया है। िजसकी पुिष्ट आवेिदका ने अपने प्रितपरीक्षा में भी की है। दौरान प्रितपरीक्षा िवपक्षी साक्षी ओ.पी.डब्लू. 2 ने भी स्वीकार िकया है िक उसके बेटे का सम्बन्ध में गाँव की पासी िबरादरी की लड़की से रहा है, िजसे उसने अपनी आखों से भी देखा है। अतः स्पष्ट है िक पक्षों के मध्य हुए िववाद के कारण आवेिदका अपने बच्चों के साथ िवगत कई वषोर्ं से मायके में रह रही है। िवपक्षी ने आवेिदका की िबदाई हेतु कोई प्रयास िकया हो ऐसा भी कोई साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। िवपक्षी ने स्वयं यह स्वीकार िकया है िक इस दौरान उसने आवेदकगण की कोई खोज खबर नहीं ली ना ही उसने कोई आिथक मदद ही की है। आवेिदका श्रीमती अनीता यह िसद्ध करने में सफल रही हैं िक वह िवपक्षी से युिक्तयुक्त कारण से पृथक रह रही हैं। तदनुसार अवधारणीय िबन्दु, संख्या 1, आवेदकगण के पक्ष में िनस्तािरत िकया जाता है। 10- िनस्तारण अवधारणीय िबन्दु संख्या- 3 यह अवधारणीय िबन्दु इस आशय का िवरिचत है िक क्या िवपक्षी, आवेदकगण का भरण- पोषण करने में समथर् है? यिद हँ, तो िवपक्षी द्वारा आवेदकगण को भरण-पोषण हेतु िकतनी धनरािश िदलाई जा सकती है ? आवेिदका ने अपनी प्रितपरीक्षा में कथन िकया है िक ससुर छेदीलाल के पास चार-पाँच बीघा जमीन है, मेरे पित के पास कोई जमीन नहीं है। मेरे पित िदल्ली में ट्रक चलाते हैं, मेरे पित के पास ट्रक चलाने का ड्राइिवग लाइसेंस है, िजससे हर महीने बीस हजार रुपये कमाते हैं, परन्तु िवपक्षी की आय के सम्बन्ध में आवेिदका द्वारा कोई अिभलेखी साक्ष्य पत्रावली में प्रस्तुत नहीं िकया गया है। िवपक्षी ने अपनी प्रितपरीक्षा में स्वयं को टी०बी० की मरीज होने का कथन िकया है, तथा िदल्ली में ट्रक चलने का तथ्य से इन्कार िकया है, परन्तु अपनी बीमारी के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य पत्रावली पर दािखल नहीं िकया है, तथा िवपक्षी साक्षी ओ.पी.डब्लू. 2 छेदीलाल ने अपनी प्रितपरीक्षा में कथन िकया है िक मेरा लड़का ज्यादातर िदल्ली में रहता है, तथा ट्रक की CRLR No. 1086 of 2025 3 ड्राइवरी करता है, तथा टी०बी० की बीमारी से अब वह ठीक है, तथा खाने पीने भर की आमदनी खेती बाड़ी से हो जाती है। उपरोक्त िवश्लेषण से स्पष्ट है िक िवपक्षी ट्रक ड्राइवरी का काम करता है तथा उसके िपता के नाम खेती योग्य जमीन भी है। आवेिदका िवपक्षी की ब्याहता पत्नी है तथा िवपक्षी दो बच्चों का िपता है। वतर्मान समय में यह तथ्य महत्वपूणर् है िक वह िवगत 9-10 वषोर्ं से आवेदकगण मायके में रह रहे हैं तथा उनके पास आय का कोई साधन नहीं है। इस दौरान िवपक्षी द्वारा उसे कोई आिथक सहायता भी नहीं दी गयी, जबिक भारतीय सामािजक व्यवस्था में पित का यह कतर्व्य है िक वह पत्नी व बच्चों के भरण-पोषण, िचिकत्सा व कल्याण का दाियत्व वहन करें। िवपक्षी शरीर से हष्ट पुष्ट नवयुवक है, तथा सामान्य प्रज्ञा का यह तथ्य है िक वतर्मान समय में शरीर से स्वस्थ हष्ट पुष्ट वगर् का व्यिक्त भी मेहनत मजदूरी करके प्रितमाह 12-15 हजार रुपये कमा सकता है। अतः प्रकरण के तथ्य एवं पिरिस्थितयों में आवेदन प्रा. पत्र प्रस्तुत करने की ितिथ से आवेिदका सं० 1 श्रीमती अनीता, को 3,000/- (तीन हजार) रुपये प्रितमाह की दर से तथा आवेदक सं० िशवदेवी को उसके वयस्क होने तक मु० 1000/- (एक हजार) रुपये प्रितमाह की दर से तथा आवेदक सं० 3, आिदत्य को उसके वयस्क होने तक मु० 1000/- ( एक हजार) रुपये प्रितमाह की दर से भरण-पोषण िदलाया जाना न्यायोिचत है। तदनुसार अवधारणीय िबन्दु संख्या 3 िनस्तािरत िकया जाता है। आदेश प्रकीणर् दािण्डक वाद संख्या 378/2020, श्रीमती अनीता आिद बनाम राजू, अन्तगर्त धारा 125 दण्ड प्रिक्रया संिहता, िनम्नानुसार, स्वीकार िकया जाता है। िवपक्षी, राजू, को आदेिशत िकया जाता है िक वे आवेदन प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत करने की ितिथ से आवेिदका सं० 1 श्रीमती अनीता, को 3,000/- (तीन हजर) रुपये प्रितमाह की दर से तथा आवेिदका सं० िशवदेवी, को उसके वयस्क होने तक मु० 1,000/- (एक हजार) रुपये प्रितमाह की दर से तथा आवेदक सं० 3, आिदत्य को उसके वयस्क होने तक मु० 1,000/-(एक हजार ) रुपये प्रितमाह की दर से अथार्त कु ल मु० 5,000/- (पाँच हजार) रुपये प्रितमाह की दर से भरण-पोषण अदा करें। यह धनरािश प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में देय होगी। आवेदन की ितिथ से िनणर्य की ितिथ तक की बकाया भरण-पोषण धनरािश िवपक्षी चार समान त्रैमािसक िकश्तों में अदा करें।" 6. Upon due consideration, this Court finds that the findings on the issue Nos. 1 and 3 are perfectly justified. It is for the following reasons :- (i) According to the revisionist, the opposite party No.2 along with minors left her matrimonial house only on account of the fact that the revisionist was a patient of Tuberculosis (T.B.). The aforesaid is not justified, as according to the statement of the father of the revisionist namely Chhedi Lal (O.P.W.-2) for some period, the revisionist was suffering from T.B. and thereafter the revisionist became fit. Further, this witness Chhedi Lal (O.P.W.-2) in cross examination also stated regrding illicit/extramarital relationship of opposite party No.2. For this reason the opposite party No.2 along with opposite party No.3 and 4 refused the company of the revisionist, as per application under Section 125 Cr.P.C. (ii) The admitted position as per Chhedi Lal (O.P.W.-2), father of the revisionist, that the revisionist was/is a truck driver and accordingly, it can be inferred that his earning is sufficient. (iii) The amount awarded i.e. Rs.3,000/- to the opposite party No.2 and Rs.1,000/- each to the opposite party Nos.3 and 4, respectively, who are minors born out of the wedlock of the revisionist and opposite party No.2, is a meager amount. 7. At this stage, on being asked, after considering the meager amount i.e. Rs.5,000/- per month awarded by the Family Court after recording the finding that under the CRLR No. 1086 of 2025 4 compelling circumstances the opposite party No.2 left the matrimonial home, that whether the amount awarded by the Family Court could be reduced, which itself is meager, the learned counsel for the revisionist has failed to reply. 8. Considered the aforesaid and also the judgments on the issue ( See: Anju Garg and another vs. Deepak Kumar Garg, reported in 2022 SCC OnLine SC 1314; Sanjeev Kapoor vs. Chandana Kapoor and others, reported in (2020) 13 SCC 172; Chander Parkash Bodh Raj vs. Shila Rani Chander Prakash: 1968 SCC Online Del 52; Rajnesh vs. Neha, (2021) 2 SCC 324 : (2021) 2 SCC (Civ) 220 : 2020 SCC OnLine SC 903 at page 347; Kulbhushan Kumar Vs. Raj Kumari, (1970) 3 SCC 129; Kalyan Dey Chaudhary Vs. Rita Dey Chaudhary Nee Nandy, (2017) 14 SCC 200). 9. Upon due consideration of the aforesaid including the judgments on the issue according to which 25% of net income of the husband should be paid to the wife as maintenance and the amount awarded to the opposite party Nos. 2, 3 and 4 by the Family Court i.e. vide order dated 15.07.2025 i.e. Rs.3000/- per month from the date of application to the opposite party No.2 and Rs.1000/- each to the opposite party Nos. 3 and 4 till the date they attain the age of majority is a meager amount, this Court is of the view that no interference in the impugned judgment and order dated 15.07.2025 is required by this Court. 10. The instant revision is accordingly dismissed. No order as to costs. September 23, 2025 ML/- CRLR No. 1086 of 2025 5 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench