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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 166903 (ALL)

DAMPY SINGH AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

NABAIL/1370/2025 · 2025-09-26

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1370 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता िवश्वेष प्रताप िसह तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री सत्येन्द्र श्रीवास्तव को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. धारा 482 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 212 सन 2025 अन्तगर्त धारा 2(b)(i)/3 उत्तर प्रदेश िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 थाना उचौिलया िजला लखीमपुर में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. गैंग चाटर् में प्राथीर् संख्या 1 की कु ल 7 प्रकरणों में संिलप्तता दशार्यी गयी है तथा प्राथीर् संख्या 2 की कु ल 3 प्रकरणों में संिलप्तता दशार्यी गयी है। यद्यिप मात्र एक प्रकरण- मु०अ०सं०- 106 सन 2025, को िगरोहबन्द अिधिनयम अिधरोिपत करने का आधार बनाया गया है। 4. जमानत प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक दोनों ही प्राथीर्गण कु ल 3 आपरािधक प्रकरणों में संिलप्त हैं िजन तीनों में दोनों अिभयुक्तों को जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने उनको प्राप्त िलिखत अनुदेशों में मात्र एक आपरािधक प्रकरण में दोनों प्राथीर्गण की संिलप्तता दशार्यी गयी है। िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिग्रम जमानत की प्राथर्ना का िवरोध िकया है, लेिकन वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके । 6. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर्गण को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर्गण किथत अपराध के दोषी हैं। Versus Counsel for Applicant(s) : Vishwesh Pratap Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Dampy Singh And Another .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s) 7. प्राथीर्गण की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। 8. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर्गण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभािवत कर सकते हैं या प्राथीर्गण फरार हो जाएंगे और मुकदमे का सामना नहीं करेंगे या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उनके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है। 9. उपरोक्त समीक्षा को दृिष्टगत रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, यह न्यायालय इस िवचार पर है िक प्राथीर्गण अिग्रम जमानत पर िरहा िकए जाने के अिधकारी हैं। 10. तदनुसार, अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 11. आवेदकगण, प्रत्येक, को उत्तर प्रदेश गैंगस्टसर् एवं असामािजक िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए: क- आवेदकगण, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होंगे; ख- आवेदकगण मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देंगे िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए: ग- आवेदकगण अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेंगे; घ- आवेदकगण को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदकगण अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेंगे / धमकी नहीं देंगे; च- आवेदकगण िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे। September 26, 2025 Ankit NABAIL No. 1370 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench