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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 166630 (ALL)

ZIYAUL HAQ v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

ABAIL/1070/2025 · 2025-09-25

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 1070 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् की तरफ से एक पूरक शपथ पत्र प्रस्तुत िकया गया, िजसे अिभलेख पर िलया जाता है। 2. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री अिमत कु मार अवस्थी तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अभय कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 3. भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता की धारा 482/438 दं०प्र०सं० के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 252 सन 2017 अन्तगर्त धारा 2/3, उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986, थाना धौरहरा, िजला लखीमपुर खीरी, में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 4. गैंग चाटर् में एकमात्र आपरािधक प्रकरण में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्ई गई है, िजसकी कारर्वाई पर इस न्यायालय द्वारा प्राथर्ना पत्र अंतगर्त धारा 482, संख्या 6163 सन 2017 में पािरत अंतिरम आदेश िदनांक 19/09/2017 से रोक लगाई जा चुकी है। उपरोक्त आदेश अभी भी प्रभावी है। 5. िपछली ितिथ को िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने चार अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्ई थी िकतु एक पूरक शपथपत्र के माध्यम से प्राथीर् ने कहा है िक उनमें से िकसी भी प्रकरण में प्राथीर् सिम्मिलत नहीं है। 6. प्राथर्ना पत्र में प्राथीर् को मात्र एक आपरािधक प्रकरण में सिम्मिलत होने के आधार पर िगरोहबन्द अिधिनयम के अन्तगर्त आरोपी बनाया गया है, िजस प्रकरण की कारर्वाई पर इस न्यायालय के आदेश िदनांक 19/09/2017 के द्वारा रोक लगाई जा चुकी है। प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में यह भी कहा गया है िक प्राथीर् न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है। 7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता जमानत की प्राथर्ना का िवरोध िकया है, लेिकन वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके । 8. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। 9. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Kumar Awasthi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ziyaul Haq .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. .....Opposite Party(s) 10. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है। 11. उपरोक्त चचार् के मद्देनजर, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, यह न्यायालय इस िवचार पर है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है। 12. तदनुसार, अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 13. आवेदक को उत्तर प्रदेश गैंगस्टसर् एवं असामािजक िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए: क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा; ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए: ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा; च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। September 25, 2025 Himanshu ABAIL No. 1070 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench