ARUN SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.
BAIL/9170/2025 · 2025-09-25
Subhash Vidyarthi
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 166527 (ALL) · dailylaw.ai ]
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 166527 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9170 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री राहुल अिग्नहोत्री तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अिभषेक कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. प्राथीर् के अिधवक्ता ने एक पूरक शपथ पत्र प्रस्तुत िकया, िजसे अिभलेख पर िलया जाए।
3. धारा 483 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 341 सन् 2025, अन्तगर्त धारा 2(B)(ii)/3, उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986, थाना मैलानी, िजला लखीमपुर खीरी, में जमानत की प्राथर्ना की है।
4. गैंग चाटर् में मात्र एक प्रकरण में प्राथीर् संिलप्तता दशार्ई गई है, िजसमें उसको जमानत पर िरहा िकया जा चुका है।
5. शपथ पत्र में 8 अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्ई गई है, िजसमें से एक में उसे जमानत पर िरहा करने का आदेश हो चुका है तथा अन्य 7 प्रकरणों में प्राथीर् को कोई समन/नोिटस प्राप्त नहीं हुई है।
6. जमानत प्राथर्ना पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसे प्रस्तुत प्रकरण में झूठा फं साया गया है। जमानत प्राथर्ना पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ पत्र में यह भी कहा गया है िक प्राथीर् न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है।
7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने जमानत प्राथर्ना पत्र का िवरोध िकया है, लेिकन वह प्रकरण के उपरोक्त पहलुओं पर तकर् नहीं कर सके । Versus Counsel for Applicant(s) : Uday Kumar, Rahul Agnihotri Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Arun Singh .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. .....Opposite Party(s)
8. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान प्रकरण में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है और प्राथीर् िदनांक 20.08.2025 से न्याियक अिभरक्षा में है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है।
9. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है।
10.
पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है।
11. उपरोक्त तथ्यों के दृिष्टगत, प्रकरण के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, यह न्यायालय इस िवचार पर है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकए जाने का हकदार है।
12. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना पत्र स्वीकार िकया जाता है।
13. आवेदक को उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986, के अंतगर्त पंजीकृ त प्रकरण में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए:- (i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक को िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ पर उपिस्थत होना होगा, जब तक िक िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा उसकी उपिस्थित से छू ट न दी जाए;
September 25, 2025 Himanshu BAIL No. 9170 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench