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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 165968 (ALL)

RANA SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO. AND ANOTHER

/60/2025 · 2025-09-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPLICATION U/S 378 No. - 60 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. Order On Leave Application. 1. अपीलकतार् के िवद्वान अिधवक्ता श्री राम िनवास पाठक तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री मनीष िवक्रम िसह चौहान को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. अपर मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट अम्बेडकर नगर द्वारा पिरवाद संख्या 355/2025 अन्तगर्त धारा 138 परक्राम्य िलखत अिधिनयम में पािरत िनणर्य तथा आदेश िदनांक 30.07.2025, िजसके द्वारा पिरवाद िनरस्त िकया गया एवं िवपक्षी संख्या 2 को दोषमुक्त िकया गया, के िवरुद्ध अपील प्रस्तुत करने की अनुमित हेतु प्रस्तुत प्राथर्ना पत्र को सुना गया। 3. अपीलकतार् के िवद्वान अिधवक्ता ने कहा िक िवचारण न्यायालय ने मात्र इस आधार पर पिरवाद िनरस्त कर िदया िक पिरवादी का कथन है िक उसने रु०8,00,000/- नगद िवपक्षी संख्या 2 को िदए थे, िजसकी वापसी के िलए िवपक्षी संख्या 2 ने रु०8,00,000/- का चेक िदया था, जो अनादिरत हो गया। चेक िदए जाने के समय अपीलकतार् पढ़ाई कर रहा था। िवपक्षी संख्या 2 ने अपने द्वारा चेक िदए जाने से अस्वीकार िकया एवं कहा िक उसका चेक संख्या 678418 से 678425 तक गायब हो गए थे, िजसकी सूचना िदनांक 01.12.2014 को भारतीय स्टेट बैंक को देकर भुगतान को रुकवा िदया गया, िकन्तु अपीलकतार् ने चेक िदनांक 18.11.2015 को प्रस्तुत िकया तथा चेक अनादिरत होने पर दुबारा िदनांक 19.12.2015 को बैंक में प्रस्तुत िकया। 4. िवचारण न्यायालय ने उच्च न्यायालय के रल द्वारा पािरत पी०सी० हिर बनाम शाइन वगीर्स आिद में आपरािधक पुनरीक्षण संख्या 408/2024 में पािरत िनणर्य िदनांक 25.07.2025 का आश्रय िलया, िजसमें यह कहा गया है िक आयकर अिधिनयम 1961 के अन्तगर्त रु०20,000/- से Versus Counsel for Applicant(s) : Rama Niwas Pathak Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rana Singh .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. And Another .....Opposite Party(s) अधिक धनरािश नगद के रूप में उधार देने पर आयकर िवभाग को सूचना देनी होती है और ऐसा न करना आयकर अिधिनयम के अन्तगर्त अपराध है। प्रस्तुत प्रकरण में भी अपीलकतार् ने रु० 8,00,000/- नगद देना कहा है, िकन्तु वह अपनी आय के श्रोत को िसद्ध नहीं कर सका है। अतः अपीलकतार् परक्राम्य िलखत अिधिनयम की धारा 138 की उपधारण सािबत करने में असफल रहा है। 5. अपीलकतार् के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् िदया िक अपीलकतार् ने अपने बयान में कहा था िक उसने अपने पिरवारीजनों से नगद रुपया लेकर िवपक्षी संख्या 2 को िदया, िकन्तु इस कथन को िसद्ध करने के िलए अपीलकतार् ने स्वयं के अितिरक्त िकसी भी पिरवारीजन को साक्षी के रूप में परीिक्षत नहीं कराया। 6. ऐसी पिरिस्थित में िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत िनणर्य में प्रथम दृष्टया कोई अवैधािनकता प्रतीत नहीं होती है। 7. अपीलकतार् को प्रश्नगत िनणर्य तथा आदेश िदनांक 30.07.2025, िजसके द्वारा िवपक्षी संख्या 2 को दोषमुक्त िकया गया के िवरुद्ध अपील प्रस्तुत करने की िवशेष अनुमित देने का कोई आधार नहीं है। 8. तदनुसार, अपील प्रस्तुत करने की िवशेष अनुमित हेतु प्राथर्ना पत्र िनरस्त िकया जाता है। September 23, 2025 Himanshu A378 No. 60 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench