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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 165574 (ALL)

SUNEEL KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY.HOME DEPTT. LKO. AND ANOTHER

ABAIL/1045/2025 · 2025-09-22

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 1045 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् की िवद्वान अिधवक्ता कु मारी आरती शुक्ला तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री मनीष िवक्रम िसह चौहान को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा एक पूरक शपथ-पत्र प्रस्तुत िकया गया िजसे अिभलेख पर िलया जाता है। 3. धारा 438 दं०प्र०सं० के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 272 सन 2020 अंतगर्त धारा 2/3(1) उत्तर प्रदेश िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण ) अिधिनयम थाना कु ड़वार िजला सुल्तानपुर में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 4. गैंग चाटर् में प्राथीर् की एक प्रकरण में संिलप्तता का उल्लेख है, िजसमें उसे जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है। 5. जमानत प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसे वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में यह भी कहा गया है िक प्राथीर् न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है। 6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने जमानत की प्राथर्ना का िवरोध िकया है, लेिकन वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके । 7. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। Versus Counsel for Applicant(s) : Arti Shukla Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Suneel Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy.Home Deptt. Lko. And Another .....Opposite Party(s) 8. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। 9. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है। 10. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, प्रकरण के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, यह न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है। 11. तदनुसार, अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 12. आवेदक को उत्तर प्रदेश गैंगस्टसर् एवं असामािजक िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए: क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा; ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए: ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा; च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। September 22, 2025 Ankit ABAIL No. 1045 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench