GOVIND KUMAR RAWAT v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME CIVIL SECTT. LKO.
NABAIL/1295/2025 · 2025-09-24
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 165549 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1295 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने पूरक शपथ-पत्र प्रस्तुत िकया िजसे अिभलेख पर िलया जाए।
2. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री अिनल िसह तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अिभषेक कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
3. यह प्राथर्ना-पत्र थाना बंथरा िजला लखनऊ में पंजीकृ त मुकदमा अपराध संख्या 0231 सन 2025, धारा 2/3 उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त में प्राथीर् को अिग्रम जमानत पर िरहा करने के िलए प्रस्तुत िकया गया है।
4. गैंग चाटर् में दो आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है िजन दोनों में उसे जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है।
5. पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से तीन अन्य प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गई है िजन सभी में प्राथीर् को जमानत पर िरहा िकए जाने का आदेश हो चुका है।
6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक प्रकरण में िववेचना अभी लंिबत है।
7. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है उसे वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। यह भी कहा गया है िक आवेदक न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है।
8. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। Versus Counsel for Applicant(s) : Anil Singh, Aayush Dwivedi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Govind Kumar Rawat .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Civil Sectt. Lko. .....Opposite Party(s)
9. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है।
10. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है।
11.
उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, न्यायालय का मत है िक आवेदक अिग्रम जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है।
12. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
13. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा।
September 24, 2025 Sumit NABAIL No. 1295 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench