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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 165317 (ALL)

MATA PRASAD CHAURASIYA @ MATA PRASAD v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO. AND 3 OTHERS

CRLR/1052/2025 · 2025-09-17

Saurabh Lavania

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 1052 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J. 1. Heard Shri Anoop Kumar Upadhyay, learned counsel for the revisionist and learned AGA for the State. 2. By means of the present revision, the revisionist has assailed the order dated 21.07.2025 passed by Additional Principal Judge, Second, Family Court, Barabanki Kheri (in short "Family Court') in Case No. 1774/2022 (Smt. Rajnani and Others Vs. Mata Prasad Chaurasiya). 3. Vide order under challenge, the Family Court rejected the application for recall filed by the revisionist. The order dated 21.07.2025 reads as under :- "पत्रावली पेश हुई। पत्रावली िवपक्षी की तरफ से प्रस्तुत प्राथर्ना पत्र ब24 पर आदेश हेतु िनयत है। िवपक्षी माता प्रसाद चौरिसया द्वारा प्राथर्ना पत्र ब-24 इस आशय का प्रस्तुत िकया गया है िक उक वाद में िदनाक 09.07.2024 को एकपक्षीय कायर्वाही का आदेश पािरत िकया गया था तथा एकपक्षीय कायर्वाही की िदनांक 02.12.2024 को िनरस्त कर हजार् लगाया था िजसे बीमारी की गंभीर पिरिस्थित के कारण िनयत ितिथ पर अदा नहीं िकया गया था जोिक जानबूझकर नहीं पिरिस्थतवश है। िवगत िनयत ितिथ 25.04.2025 को उक्त पिरवािदनी के पित माता प्रसाद के घर में ितलोकोत्सव समारोह होने के कारण स्वयं व्यिक्तगत रूप से उपिस्थत नहीं आ सका िजसकी सूचना फोन द्वारा अपने अिधवता को िदया था। िदनांक 25.04.2025 को प्राथीर् िवपक्षी का हािजरी माफी प्राथर्ना पत्र िनरस्त कर पूवर् की एकपक्षीय कायर्वाही अग्रसािरत कर दी गई। िवपक्षी आज स्वयं उपिस्थत न्यायालय आया है। पूवर् में िदनांक 02.12.2024 पािरत आदेश के पिरप्रेक्ष्य में हजार् अदा कर पी०डब्ल्यू०-1 से िजरह िकए जाने का आदेश न्यायिहत में अितआवश्यक है। प्राथीर् के अस्वस्थता का प्रमाण पत्र "पत्रावली में संलग्न है। प्राथीर् को सुनवाई का अवसर िदया जाना न्यायिहत में आवश्यक है। न्यायिहत में एकपक्षीय आदेश को िनरस्त करते हुए प्राथीर् को अपना पक्ष रखने का अवसर िदया जाना व मुकदमा गुण दोष के आधार पर िनरस्त िकया जाना न्यायसंगत है। अतः प्राथर्ना की गई है िक एकपक्षीय आदेश को िनरस्त कर मुकदमें को गुण दोष के आधार पर िनस्तािरत िकया जावें। प्रािथनी अिधवक्ता की ओर से मौिखक आपित्त प्रकट की गई है। अतः िरकाल प्राथर्ना पत्र Versus Counsel for Revisionist(s) : Anoop Kumar Upadhyay Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mata Prasad Chaurasiya @ Mata Prasad .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. And 3 Others .....Opposite Party(s) िनरस्त करने की प्राथर्ना की गई है। प्राथर्ना पत्र पर उभयपक्ष को सुना गया। पत्रावली का अवलोकन िकया। जहां तक िरकाल प्राथर्ना पत्र ब-24 का प्रश्न है तो पत्रावली के अवलोकन से िविदत होता है िक िवपक्षी ने िदनांक 09.07 2024 के एकपक्षीय कायर्वाही आदेश अपास्त करने हेतु प्राथर्ना पत्र ब-18 प्रस्तुत िकया था जो िदनाक 02.12.2024 को न्ययाालय द्वारा स्वीकार करते हुए 1,000/- रुपये हजेर् पर इस शतर् के साथ स्वीकार िकया गया था िक हजार् अगली ितिथ तक अदा कर िदया जायेगा अन्यथा उक्त आदेश स्वतः िनष्प्रभावी होगा और प्राथर्ना पत्र ब-18 स्वतः िनरस्त समझा जायेगा। िवपक्षी के अनुसार यह हजार् गंभीर बीमारी के कारण अदा नहीं कर सका। इसके साथ ही प्राथीर् माता प्रसाद चौरिसया द्वारा प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत कर कथन िकया गया है िक िदनांक 25.04.025 को ितलोकोत्सव समारोह होने के कारण स्वयं व्यिक्तगत रुप से उपिस्थत नहीं आ सका िजसकी सूचना फोन द्वारा अपने अिधवक्ता को िदया था परंतु िवपक्षी ने न तो बीमारी के िवषय में कोई जानकारी दी है िक यह िकस बीमारी से ग्रस्त था तथा वह कब ठीक हुआ और न ही उसने कोई िचिकत्सीय प्रपत्र ही पत्रावली में प्रस्तुत िकया है। इसके अितिरक्त उसने ितलोकोत्सव समारोह में जाने के कारण िदनांक 25.04.2025 को अनुपिस्थित की बात कही है परतु जब हम पत्रावली में संलग्न शादी के काडर् की प्रित का अवलोकन करते हैं तो हम पाते हैं िक िदनांक 25.04.2025 को शादी का कोई समारोह ही नहीं था। इसके अितिरक्त इसके पूवर् में भी िदनांक 02.12.2024 को िवपक्षी को सशतर् अगला अवसर प्रदान िकया गया था परंतु िवपक्षी ने तीन-तीन ितिथयां बीतने के बावजूद हजार् नहीं अदा िकया। िवपक्षी के कथन बलहीन एवं असत्य प्रतीत होते हैं। आजकल यह अक्सर देखने में आता है िक भरण पोषण से संबंिधत पत्राविलयों में िवपक्षी/पित पयार्प्त जानकारी होने के बावजूद भी पत्रावली में तब तक उपिस्थत नहीं होता जब तक पत्रावली एकपक्षीय कायर्वाही में जाकर बहस अथवा िनणर्य के स्तर तक नहीं पहुंच जाती और कई मामलों में तो िनणर्य के पश्चात पुनः िनणर्य को अपास्त करने हेतु प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत िकया जाता है। िवपक्षी इस प्रकार के हथकं डो से पत्रावली की कायर्वाही को अनावश्यक रुप से िवलंिबत करने का प्रयास करता है। न्यायालय ऐसे वादकािरयों को बढ़ावा नहीं दे सकती जो जानबूझकर न्याियक प्रिक्रया को िवलंिबत कर रहे हैं। आदेश िवपक्षी का िरकाल प्राथर्ना पत्र ब-24 बलहीन कथन िकये जाने के कारण स्वीकार िकये जाने योग्य नहीं है। अतः प्राथर्ना पत्र ब-24 िनरस्त िकया जाता है। पत्रावली वास्ते शेष एकपक्षीय साक्ष्य िदनाक 17 09.2025 को पेश हो।" 4. Upon due consideration of the contents of the impugned order, this Court is of the view that the Family Court has rightly rejected the application B-24 filed by the revisionist for recall of order as on the one pretext and other he is trying to delay the proceedings of under Section 125 Cr.P.C. and this practice should not be allowed and should be deprecated. 5. Accordingly, this Court finds no force in the instant revision. Accordingly, it is accordingly dismissed. No order as to costs. 6. The copy of the order be sent to the Family Court forthwith. September 17, 2025 Mohit Singh/- CRLR No. 1052 of 2025 2 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- MOHIT SINGH High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench