Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 165233 (ALL)

BABU LAL RATHORE v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

/1035/2025 · 2025-09-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 1035 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री पूणेर्ंदु चक्रवतीर् तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अिभषेक कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता की धारा 482/438 दं०प्र०सं० के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना- पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 249 सन 2004 अन्तगर्त धारा 406, 420, 409, 467, 468, 471 भा०द०िव०, थाना गोमती नगर, िजला लखनऊ, में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. प्राथीर् द्वारा मुकदमा अपराध संख्या 249 सन 2004 में अिग्रम जमानत प्राप्त करने हेतु यह िद्वतीय प्राथर्ना पत्र है। प्रथम प्राथर्ना पत्र संख्या 10065 सन् 2019 में पािरत आदेश िदनांक 23/10/2019 से यह कहते हुए िनस्तािरत हुआ था िक यिद प्राथीर् िवचारण न्यायालय के समक्ष उपिस्थत होकर जमानत हेतु प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत करेगा, तो उसका जमानत प्राथर्ना पत्र अमरावती तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2004) 57 ए०एल०आर 290 तथा लाल कमलेन्द्र प्रताप िसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2009) 3 ए०डी०जे० 322 (SC) में प्रितपािदत व्यवस्था के आलोक में िनिणत िकया जाएगा। 4. उपरोक्त प्रकरण िदनांक 9/7/2004 को िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् के आधार पर संिस्थत हुआ, िजसमें यह कहा गया है िक प्राथीर् मंडी पिरषद का तत्कालीन िवत्त िनयंत्रक है तथा उसने िनदेशक के आदेश के िबना अिधकृ त रूप से जानबूझकर मंडी पिरषद की धनरािश िसटी कोऑपरेिटव बैंक में साविध जमा में िनवेिशत कर दी, िजसमें से कु छ धनरािश वापस भी िनकाली गई तथा कु छ धनरािश बैंक ने वापस नहीं लौटाई। 5. प्राथर्ना पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ पत्र में कहा गया िक प्राथीर् एक 77 वषीर्य िनदोर्ष व्यिक्त है, िजसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। 6. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् िदया िक प्रारंभ में िववेचक ने अंितम आख्या प्रस्तुत कर दी। प्राथीर् ने अपने िवरुद्ध आपरािधक कायर्वाही की वैधता को चुनौती देते हुए इस न्यायालय के समक्ष आपरािधक िरट यािचका संख्या 3256(एम०बी०) सन 2004 प्रस्तुत की थी, िजसमें एक अंतिरम Versus Counsel for Applicant(s) : Pranjal Jain, Purnendu Chakravarty Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Babu Lal Rathore .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s) आदेश पािरत करके प्राथीर् की िगरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी, िकतु उपरोक्त िरट यािचका िदनांक 23/7/2007 को इस आधार पर िनरस्त हो गई िक िववेचक ने अंितम आख्या प्रस्तुत की थी, जो िदनांक 28/02/2006 को िवचारण न्यायालय ने स्वीकार कर ली थी। उपरोक्त आदेश में यह भी अंिकत है िक प्राथीर् ने यह धनरािश िसटी कोऑपरेिटव बैंक में िनदेशक मंडी पिरषद के िनदेर्शों के अधीन िनवेिशत की थी। 7. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक प्राथीर् को सेवा िनवृत्त हुए 17 वषर् हो चुके हैं। प्राथीर् ने िवचारण न्यायालय को िदनांक 15/4/2025 को एक प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत करके यह कहा िक िववेचना में 20 साल से अिधक का समय व्यतीत हो चुका है, िकतु आरोप पत्र अभी भी प्रस्तुत नहीं िकया गया है तथा इस संबंध में न्यायालय एक आख्या तलब करे। 8. प्राथर्ना पत्र का िवरोध करते हुए िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने उनको प्राप्त िलिखत अनुदेशों के आधार पर कहा िक प्राथीर् के िवरुद्ध धारा 55 दंड प्रिक्रया संिहता के अंतगर्त नोिटस िदनांक 28/08/2019, 18/10/2021 एवं 20.04.2023 को प्रेिषत की गई, िकन्तु प्राथीर् उस नोिटस के उत्तर में उपिस्थत नहीं हुआ तथा िदनांक 26/3/2025 को उसके घर पर दिबश दी गई। 9. उक्त के उत्तर में प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने कहा िक प्राथीर् को कोई नोिटस प्राप्त नहीं हुई है तथा दिबश देने के पूवर् प्राथीर् के िवरुद्ध पुिलस ने कोई वारंट प्राप्त नहीं िकया है। 10. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक िववेचना 20 वषर् से अिधक समय से भी लिम्बत चल रही है, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को िदए गए अनुदेशों के आधार पर पुिलस दो-दो वषोर्ं के अंतराल पर कभी-कभी प्राथीर् के घर जाती रहती है तथा प्राथीर् एक 77 वषीर्य वृद्ध व्यिक्त है, िजसको कोई आपरािधक इितहास नहीं है, एवं उसने िववेचना में सहयोग करने का वचन िदया है। 11. तदनुसार, अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 12. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। ABAIL No. 1035 of 2025 2 च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। September 23, 2025 Himanshu ABAIL No. 1035 of 2025 3 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench