ALOK KUMAR SHUKLA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
NABAIL/1309/2025 · 2025-09-24
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 164780 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1309 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री अनुराग ित्रवेदी व िवद्वान अिधवक्ता श्री श्याम सुन्दर उपाध्याय तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्रीमती िशखा िसन्हा को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. धारा 482, भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 के अंतगर्त प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 217 सन 2024 अन्तगर्त धारा 406, 504, 506 एवं 509 भा०द०िव० थाना बाजारखाला िजला लखनऊ में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है।
3. उपरोक्त प्रकरण धारा 175 (3) भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त िलखाए गए प्राथर्ना-पत्र के आधार पर िदनांक 11.10.2024 को संिस्थत प्रथम सूचना िरपोटर् से प्रारंभ हुआ , िजसमें यह कहा गया िक प्राथीर् पर िवश्वास करके िशकायतकतीर् ने उसे अलग-अलग ितिथयों में रुपये4,85,000/- (रुपये चार लाख पच्चासी हजार) धनरािश उधार दे दी, िकतु प्राथीर् ने वह धनरािश हड़प ली।
4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है।
5. प्राथर्ना-पत्र के साथ एक सुलह-समझौता पत्र संलग्न है िजसमें िशकायतकतीर् ने यह िलखा है िक उसको प्राथीर् ने एक लाख रूपए नगद व तीन लाख पच्चीस हजार रुपए बैंक अंतरण के माध्यम से अदा कर िदए हैं तथा पक्षों के मध्य कोई िववाद नहीं है।
6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक िववेचना में आरोपों की पुिष्ट हुई है और आरोप-पत्र िदनांक 20.12.2024 को प्रस्तुत िकया जा चुका है। Versus Counsel for Applicant(s) : Shyam Shankar Upadhyay, Anurag Trivedi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Alok Kumar Shukla .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s)
7. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए जबिक प्रथम सूचना िरपोटर् में दोनों पक्षों में रुपए के लेन -देन का िववाद था; जो सुलह-समझौते पर िनपट चुका है एवं प्राथीर् का कोई आपरािधक इितहास नहीं है तथा िववेचना पूणर् हो चुकी है। न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है।
8. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
9.
उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा।
September 24, 2025 Sumit NABAIL No. 1309 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench