DAYA SHANKAR VERMA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
CRLR/1032/2025 · 2025-09-15
Saurabh Lavania
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 163952 (ALL) · dailylaw.ai ]
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 163952 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 1032 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard learned counsel for the revisionist, learned AGA for the State and perused the record. 2. The present criminal revision has been filed for the following main relief(s) :-
"Wherefore, it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may kindly be pleased to set-aside the order dated 28.07.2025 passed by the Special Judge Anticorruption Act, Court No. 7 Lucknow in S.T. No-2800/22, Crime No- 311/2018, against the revisionist (contained as Annexure No. 20 to this revision petition)."
3. By the impugned order dated 28.07.2025, the Special Judge Anti Corruption Act, Court No.7, Lucknow in S.T. No.2800/2022 has rejected the application seeking discharge by the revisionist. The relevant portion of the order dated 28.07.2025 is extracted herein under :-
"4. उभयपक्षों के तकोर् के आलोक में पत्रावली का पिरशीलन िकया गया।
5. पत्रावली के पिरशीलन से िविदत होता है िक प्राथीर् / अिभयुक्त के िवरुद्ध अभी तक आरोप िवरिचत नहीं िकये गये हैं। पत्रावली आरोप िवरचन हेतु िनयत है, िजस पर प्राथीर्/अिभयुक्त के द्वारा प्राथर्ना पत्र में विणत आधारों पर स्वयं को प्रस्तुत मामले में उन्मोिचत िकए जाने की याचना की गई है।
6. प्रस्तुत प्रकरण में वादी मुकदमा िनरीक्षक श्री कृ ष्म कु मार िद्ववेदी, उ० प्र० सतकर् ता अिधष्ठान, लखनऊ, सेक्टर-लखनऊ द्वारा दी गयी तहरीर पर संबंिधत थाने की पुिलस द्वारा अिभयुक्त के िखलाफ नामजद मुकदमा अपराध संख्या-311/2018, अन्तगर्त धारा-409, 420, 465, 467, 471, 477A, 204, 120-B भा.दं.स. व धारा-7, 13(1) सी व डी सपिठत धारा 13 (2) भ्र० िन० अिधिनयम 1988 के तहत अिभयोग पंजीकृ त िकया गया। तमामी िववेचना, बयान वादी, बयान गवाहान, िनरीक्षण घटनास्थल के मुतािबक अिभयुक्त दयाशंकर वमार् व अन्य अिभयुक्त मो० वसीम फारूकी के िवरुद्ध उपरोक्त धाराओं में पयार्प्त साक्ष्य पाते हुए उक्त धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत िकया है, िजस पर सक्षम न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान िलया जा चुका है एवं अिभयुक्त की उपिस्थित हेतु उनके िवरुद्ध जारी प्रोसेस पर अिभयुक्त न्यायालय के समक्ष उपिस्थत आया है।
7. यह स्पष्ट है िक वतर्मान में उभयपक्ष के साक्ष्य अभी अंिकत नहीं हुए हैं, अिभयुक्त के िवरुद्ध आरोप भी अभी िवरिचत नहीं हुए हैं। प्राथीर् / अिभयुक्त की आपित्त िक वह िनदोर्ष हैं, उसके Versus Counsel for Revisionist(s) : Rajesh Kumar Srivastava, Praveen Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Daya Shankar Verma .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy.
Home Lko. And Another .....Opposite Party(s)
द्वारा कोई अपराध कािरत नहीं िकया गया है, िववेचक द्वारा अिभयुक्त के िवरुद्ध की गई िववेचना में घटना के संबंध में कोई साक्ष्य संकिलत नहीं िकया गया है और न ही िकसी गवाह द्वारा अिभयुक्त की घटना में संिलप्तता के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं िदया गया है, इस स्तर पर मान्य नहीं है। अवलोकनीय है िक अिभयुक्त के िवरुद्ध अिभयोजन कायर्वाही िकये जाने हेतु अिभयोजन स्वीकृ ित िनदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण िनदेशालय, उ० प्र० द्वारा दी गयी है। प्रस्तुत मामले में अभी िकसी भी साक्षी का साक्ष्य अंिकत नहीं िकया गया है, िजससे वतर्मान में पत्रावली पर सािक्षयों के साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, ऐसी िस्थित में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य अिभयुक्त की दोिषता अथवा िनदोर्िषता को सािबत करने के िलए अपयार्प्त हैं। ऐसी िस्थित में वाद के इस स्तर पर अिभयुक्त को उन्मोिचत िकया जाना उिचत प्रतीत नहीं होता है। यह सुस्थािपत िसद्धांत है िक इस स्तर पर संिक्षप्त िवचारण नहीं िकया जाना है और यह देखा जाना है िक क्या प्रथम दृष्टया साक्ष्य साशय इस प्रकार का है, जो आरोप बनाये जाने के िलए पयार्प्त है। इस संबंध में माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा State of M.P. v S.B. Johari, AIR 2000 SC 665 में यह अवधािरत िकया गया है िक-
"The court has only to see whether there is prima facie sufficient ground for proceeding against the accused." इसी प्रकार Stree Atyachar Birodhi Parishad v Dilip (1989) 1 SCC 715 में यह मत प्रकट िकया गया है िक-
"Sufficient ground for the purpose of framing of the case is not a ground for conviction but the ground for putting the accused to the trial."
इसी प्रकार R. S. Nayak v A.R. Antuley AIR 1986 SC 2045 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक-
"If the trial court is satisfied that the prima facie case is made out, charge has to be framed." माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा लालू प्रसाद यादव बनाम स्टेट आफ िबहार िनणीर्त 6 िदसम्बर, 2006 अपील सं०-1276/2006 व िदलावर बालू बनाम स्टेट आफ महाराष्ट्र 2002 एस.सी.सी.
135 (2010) 9 ए.सी.सी. 368 में भी माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट रूप से अवधािरत िकया गया है िक-
"उन्मोचन के स्तर पर न्यायालय सभी तथ्यों के गुण-दोष की जांच नहीं कर सकता है। यिद कु छ भी साक्ष्य इस प्रकार का है, जो यह संभािवत कर रहा है िक प्रथम दृष्टया अिभयुक्त के द्वारा यह अपराध िकया गया है तो उक्त आरोप के िलए तैयार रहे।" चूंिक इस स्तर पर िकसी भी पक्षकार के द्वारा न्यायालय के समक्ष कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं िकए गए हैं, मात्र िववेचना के आधार पर प्रस्तुत आरोप पत्र पर न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान िलया जा चुका है, िजस आधार पर िववेचक द्वारा संकिलत साक्ष्य से प्राथीर्/अिभयुक्त के िवरुद्ध धारा 409, 465, 467, 471, 477A, 120-B भा.दं.सं. व धारा-13(1) सी व डी सपिठत धारा 13 (2) भ्र० िन० अिधिनयम 1988 में आरोप िवरचन के प्रथम दृष्टया पयार्प्त साक्ष्य हैं। अतः उपरोक्त िवश्लेषणानुसार प्राथीर् / अिभयुक्त का प्राथर्ना पत्र िदनांिकत-23.12.2024 वास्ते उन्मोचन इस स्तर पर स्वीकार िकए जाने के आधार पयार्प्त नहीं हैं। आदेश प्राथीर्/अिभयुक्त दयाशंकर वमार् द्वारा प्रस्तुत उन्मोचन प्राथर्ना पत्र िदनांिकत-23.12.2024 िनरस्त िकया जाता है। पत्रावली िदनांक-13.08.2025 को वास्ते आरोप िवरचन पेश हो। अिभयुक्त िनयत ितिथ को व्यिक्तगत रूप से उपिस्थत रहेगा।"
4. Shri Rajesh Kumar Srivastava, learned counsel for the revisionist submits that the CRLR No. 1032 of 2025 2
application seeking discharge has been rejected with the observation that the charge has yet not been framed, as mentioned in paragraph 5 of the order. 5. The aforesaid submission of learned counsel for the revisionist is not liable to be accepted as from a perusal of the order impugned, it is apparent that the order has been passed after considering the entire material available on record, which to the view of this Court is justified in view of the principle settled with regard to seeking discharge under Section 227 CrP.C.
6. Upon due consideration of the aforesaid and also the law as laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Amit Kapoor v. Ramesh Chander, (2012) 9 SCC 460; Tarun Jit Tejpal Vs.
State of Goa and Another, 2019 SCC OnLine SC 1053; State of Gujarat vs. Dilipsinh Kishorsinh Rao reported in 2023 SCC OnLine SC 1294; Vishnu Kumar Shukla v. State of U.P., 2023 SCC OnLine SC 1582; Hazrat Deen vs. State of Uttar Pradesh and Another; reported in 2022 SCC OnLine SC 1781, wherein the Hon'ble Apex Court has settled the principles with regard to dealing with an application seeking discharge, this Court is not inclined to interfere in the present case. 7. Present criminal revision is accordingly dismissed. Cost made easy. September 15, 2025 ML/- CRLR No. 1032 of 2025 3 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench