HANAMUL HUSSAIN @ INAMUL HAQ @ @ MUNNA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/8656/2025 · 2025-09-17
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 163731 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8656 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री मो० वािजद इरफान की तरफ से उपिस्थत अिधवक्ता श्री अल सउद खान तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम श्री िशव नाथ ितलहरी को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. यह प्राथर्ना-पत्र थाना ए०टी०एस० िजला लखनऊ में पंजीकृ त मुकदमा अपराध संख्या 01 वषर् 2009, धारा 115, 420, 465, 468, 471 तथा 120-B भा०द०िव० के अंतगर्त प्राथीर् को जमानत पर िरहा करने के िलए प्रस्तुत िकया गया है।
3. उपरोक्त प्रकरण िदनांक 22.02.2009 को िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् के आधार पर संिस्थत हुआ िजसमें कहा गया िक एक मोबाइल फोन की कॉल की जांच करने पर मालूम हुआ िक उससे अंतरार्ष्ट्रीय कॉल लगातार की जा रही है तथा यह नंबर एक कु ख्यात मािफया िगरोह के सदस्य द्वारा प्रयोग िकया जा रहा था। िववेचना के दौरान एक व्यिक्त िबलाल को पकड़ा गया। िबलाल ने अिभरक्षा में िदए गए अपने बयान में प्राथीर् का उसके साथ आपरािधक कृ त्यों में सिम्मिलत होना कहा।
4. िबलाल के िवरुद्ध िवचारण पूणर् होकर उसको धारा 115, 120 B भारतीय दण्ड संिहता में दोषमुक्त िकया जा चुका है तथा उसे धारा 420, 465, 467, 468, 471 भारतीय दण्ड संिहता के अपराधों के िलए दोषिसद्ध करके तीन वषर् के िलए कारावास से दिण्डत िकया जा चुका है।
5. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र के प्रस्तर 17 में कहा गया है िक दो अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गई है िजनमें से एक प्रकरण में िववेचक ने अंितम आख्या प्रस्तुत कर दी है तथा दूसरे प्रकरण वषर् 1994 से संबंिधत है िजसके संबंध में प्राथीर् को कोई जानकारी नहीं है।
6. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता का कथन है िक प्राथीर् िदनांक 06.05.2023 से अिभरक्षा में है, Versus Counsel for Applicant(s) : Mohd Wajid Irfan, Al Saud Khan, Mohd. Ajmal Khan, Tanveer Ahmad Siddiqui Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Hanamul Hussain @ Inamul Haq @ @ Munna .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s)
िकतु आज तक एक भी अिभयोजन साक्षी परीक्षीत नहीं िकया गया है।
7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक प्राथीर् एक लंबे समय तक िववेचना में सहयोग न करते हुए फरार रहा है उसे जमानत पर िरहा नहीं करना चािहए।
8.
उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए जबिक प्राथीर् सह-अिभयुक्त के िदए गए बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया; उक्त सह-अिभयुक्त िवचारण में कु छ अपराधों से दोषमुक्त होकर अन्य के िलए दोषिसद्ध हुआ तथा उसे मात्र तीन वषर् के कारावास से दिण्डत िकया गया; प्राथीर् लगभग ढाई वषर् से कारावास में है तथा अविध में एक भी अिभयोजन साक्षी परीिक्षत नहीं िकया गया है। अतः न्यायालय का मत है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है।
9. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
10. आवेदक को िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन संबंिधत मिजस्ट्रेट / न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार एक व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर उपरोक्त मामले में जमानत पर िरहा िकया जाए: - (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। . (Subhash Vidyarthi,J.) September 17, 2025 Sumit BAIL No. 8656 of 2025 2
Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench