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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 163353 (ALL)

SHAILESH MISHRA @ SHILESH KUMAR MISHRA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

ABAIL/988/2025 · 2025-09-15

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 988 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री राजन िमश्रा तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम श्री राजेश कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. 482, भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 के अंतगर्त प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 052 सन 2022 अन्तगर्त धारा 8, 20, 29, 60 (3) स्वापक औषिध और मनः प्रभावी पदाथर् अिधिनयम थाना कन्धई िजला प्रतापगढ़ में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. िदनांक 08.02.2022 को थानाध्यक्ष द्वारा प्राथीर् सिहत तीन व्यिक्तयों के िवरुद्ध िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् में यह कहा गया है िक मुखिबर से प्राप्त सूचना के आधार पर एक कं टेनर ट्रक को रोका गया िजसको सह-अिभयुक्त रतनेश कु मार चला रहे थे। ट्रक से 12 बोिरयों में 27 पैके ट तथा कु छ खुला हुआ गांजा िजसकी कु ल मात्रा 243 िकलोग्राम थी, बरामद हुआ। प्रथम सूचना िरपोटर् में अंिकत है िक प्रत्येक बोिरयों/पैके टों से नमूना हेतु थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गांजा िनकालकर 1.100 िकलोग्राम गांजा का नमूना तैयार िकया गया। अिभरक्षा में िदए बयान में सह-अिभयुक्त रतनेश कु मार यादव ने कहा िक उसके साथ में एक अन्य अिभयुक्त मनीष ितवारी उफर् मोनू भी था जो मदाफरपुर कस्बा में उतरकर चला गया था। उसने कहा िक मनीष के मामा शैलेश िमश्रा (प्राथीर्) भी उसके साथ अपराध में सिम्मिलत हैं। 4.प्रारंभ में िववेचक ने िदनांक 24.12.2024 को पचार् संख्या 20 द्वारा प्राथीर् की अपराध में संिलप्तता होना नहीं पाया था तथा उनका नाम िववेचना से िनकाल िदया था, िकतु उच्चािधकारी के िनदेर्श पर प्राथीर् के िवरुद्ध पुनः अिग्रम िववेचना की जा रही है। 5. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर् िनदोर्ष है। प्राथीर् दो अन्य आपरािधक प्रकरणों में सिम्मिलत िजनमें से एक में प्राथीर् को जमानत पर िरहा करने का आदेश हो चुका है तथा दूसरा प्रकरण आपसी सहमित के आधार पर समाप्त हो चुका है। Versus Counsel for Applicant(s) : Umesh Chandra Tripathi, Rajan Mishra, Shambhunath Mishra Counsel for Opposite Party(s): G.A. Shailesh Mishra @ Shilesh Kumar Mishra .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. .....Opposite Party(s) 6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम ने उनको प्राप्त िलिखत अनुदेशों के आधार पर प्राथर्ना- पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक यद्यिप प्रारंभ में िववेचक ने प्राथीर् की प्रकरण में संिलप्तता नहीं पाई थी, िकतु क्षेत्रािधकारी पट्टी ने पचार् संख्या 37 में िववेचक को अपने दाियत्व िनवर्हन में घोर लापरवाही बरतने का दोषी पाते हुए प्राथीर् के िवरुद्ध अिग्रम िववेचना का आदेश िदया जो अभी भी प्रचिलत है एवं यह भी कहा िक प्राथीर् िववेचना में सहयोग नहीं कर रहा है। 7. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने कहा िक यिद प्राथीर् को अिग्रम जमानत िमलती है तो वह िववेचना में सहयोग करेगा। 8. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए जबिक प्रथम सूचना िरपोटर् में िदनांक 08.02.2022 को िलखाई गई िजसमें एक सह-अिभयुक्त के अिभरक्षा में िदए गए बयान के आधार पर प्राथीर् को नािमत अिभयुक्त बनाया गया; िववेचक ने प्राथीर् की प्रकरण में संिलप्तता का कोई आधार नहीं पाया; यद्यिप िदनांक 24.12.2024 को प्राथीर् के िवरुद्ध अिग्रम िववेचना का आदेश हुआ है, िकतु अब तक सह-अिभयुक्त के अिभरक्षा में िदए गए बयान के अितिरक्त उसकी संिलप्तता प्रकरण में दशार्ने हेतु कोई सामग्री संकिलत नहीं की जा सकी है, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है। 9. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 10. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। September 15, 2025 Sumit ABAIL No. 988 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench