PRATEEK JAISWAL v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
CRLR/990/2025 · 2025-09-09
Saurabh Lavania
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 163189 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 990 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard learned counsel for the revisionist and learned counsel for the State and perused the record. 2. Instant revision has been filed for the following main relief:-
"Wherefore it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may kindly be pleased to set aside the impugned order dated 08-07-2025 passed by Additional District and Sessions Judge Court No. 12, Lucknow in Sessions Case No. 231/2025 State Of U.P. Versus Prateek Jaiswal contain in annexure No. 1. It is further prayed that this Hon'ble Court may kindly be pleased to call for record from the court of Additional District and Sessions Judge Court No. 12, Lucknow in Sessions Case No. 231/2025 State Of U.P. Versus Prateek Jaiswal, in the interest of justice."
3. Vide impugned order dated 08.07.2025, the Additional District and Sessions Judge, Court No.12, Lucknow (in short "trial Court") passed in Sessions Case No. 231 of 2025 (State vs. Prateek Jaiswal), has rejected the discharge application preferred by the revisionist.
Relevant portion of the impugned order dated 08.07.2025 is extracted here-in-under:-
"पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है िक अिभयुक्त के िखलाफ आरोपपत्र अंतगर्त धारा -279,427,304 ए भा०दं०सं० मिजस्ट्रेट न्यायालय में प्रस्तुत हुआ है, िजस पर न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान िलया गया है। मामला सत्र परीक्षणीय होने के कारण पत्रावली सेशन सुपुदर् हुई है। प्राथथीर्/अिभयुक्त पर यह आरोप है िक उसके द्वारा अपनी चार पिहया गाड़ी को लापरवाही और उतावलेपन से चलाकर दो व्यिक्तयों को टक्कर मार दी गयी है, िजनमें से एक व्यिक्त साईिकल पर था और दूसरा व्यिक्त स्कू टी पर था। टक्कर लगने के बाद एक आदमी उक्त चार पिहया गाडी के पिहये में फं स गया था, िजसे वह घसीटते हुए लगभग 400-500 मीटर दूरी तक ले गया था। अिभयुक्त द्वारा टक्कर मारने से दोनों व्यिक्तयों की मृत्यु हो गयी है। यह सही है िक प्रथम सूचना िरपोटर् मृतक श्री धमेर्न्द्र पाल की पत्नी श्रीमती िरकी द्वारा थाने पर िलखायी गयी है, िजसके आधार पर मुकदमा भा०द०सं० की धारा-279,427,304 ए में पंजीकृ त हुआ है। िववेचक द्वारा दौरान िववेचना वािदनी मुकदमा व अन्य गवाहों का बयान अंिकत िकया गया है। गवाह राजेन्द्र प्रसाद व सत्येन्द्र कु मार िमश्रा के बयान के अनुसार वे लोग उस समय घटनास्थल के पास गाडर् की ड्यूटी Versus Counsel for Revisionist(s) : Atul Kumar, Manish Kumar Jaiswal, Pushpendra Chauhan, Surya Pratap Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Prateek Jaiswal .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Lko.
Addl. Chief Secy. Home Lko. And Another .....Opposite Party(s)
कर रहे थे। उसके सामने सफे द रंग की अिनयित्रत कार जा रही थी, उक्त कार ने साईिकल सवार और एक स्कू टी सवार व्यिक्त को सामने से जोरदार टक्कर मार िदया, िजससे साईिकल सवार व्यिक्त उछलकर दूर जाकर िगर गया और स्कू टी सवार व्यिक्त कार में फं स गया, िजसे उक्त कार बाले ने काफी दूर तक घसीट कर ले गया। वे लोग िचल्लाते रहे, लेिकन उसने कार को नहीं रोका। इसी तरह एक अन्य मृतक के भाई वीरेन्द्र कु मार ित्रवेदी द्वारा इस आशय की थाने में तहरीर दी गयी है िक उसका भाई घटना के समय अपनी स्कू टी से बच्चे का डायपर लेने के िलए गया था, उसी समय आती हुई गाड़ी नं०- UP32NL0041 चालक नशे में धुत होकर अत्यिधक तेज से लहराते हुए गाड़ी लेकर आया और उसके भाई की स्कू टी नंबर-UP32LT0515 में जाकर जानबूझकर लड़ा िदया, िजसे उसका भाई िचल्लाता रहा और उसके भाई को 400-500 मीटर घसीटता हुआ ले गया, िजससे उसके भाई की मृत्यु हो गयी। इस प्रकार गवाहों के बयान व थानें पर िलखायी गयी प्रथम सूचना िरपोटर् के अनुसार अिभयुक्त द्वारा अपनी गाड़ी को तेजी व लापरवाही से चलाते हुए दो व्यिक्तयों को टक्कर मारी गयी, िजसमें एक व्यिक्त साईिकल से जा रहा था और दूसरा व्यिक्त स्कू टी से जा रहा था। साईिकल सवार व्यिक्त टक्कर खाने के बाद दूसरी तरफ िगर गया और दूसरा व्यिक्त उसके चार पिहया गाड़ी के पिहये में फं स गया था, िजसे वह घसीटते हुए लगभग 400-500 मीटर दूरी तक ले गया था। यह सही है िक अिभयुक्त का उनकी हत्या करने का कोई इरादा/आशय नहीं था, लेिकन जब टक्कर लगने से एक व्यिक्त िगर गया और दूसरा व्यिक्त उसकी गाड़ी में फं स गया, तो वह जानबूझकर के गाड़ी को लगभग आधा िकलोमीटर दूर तक ले गया है, िजससे उसकी भी मृत्यु हो गयी है। भा०दं०सं० की धारा-304 में दो खंड है, िजसमें से एक आशय से संबंिधत है तथा दूसरा ज्ञान से संबंिधत है। इस.
प्रकार अिभयुक्त द्वारा अपनी गाड़ी को एक व्यिक्त के फं स जाने के बावजूद गाड़ी को 400-500 मीटर दूरी तक घसीटते हुए ले गया है। इस प्रकार उसे यह ज्ञान था िक यिद कोई व्यिक्त गाड़ी में फं स गया है और वह उसे घसीट रहा है, तो उसकी मृत्यु हो सकती है। इस प्रकार अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध भा०दे०सं० की धारा-304 के अंतगर्त प्रथमदृष्टया आता है। जहां तक अिभयुक्त को सफाई का अवसर न िदए जाने का प्रश्न है, उसके संबंध में न्यायालय का मत है िक अिभयुक्त को दौरान िववेचना सफाई का अवसर िमलेगा। जहां तक आरोिपत धाराओं में आरोप बनाए जाने का प्रश्न है, आरोप गंभीर संभावना के आधार पर बनाया जा सकता है। जबिक इस मामले में अिभयुक्त के िखलाफ आरोिपत धाराओं में आरोप बनाए जाने का प्रथमदृष्या साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध है। अतः यह प्राथर्नापत्र खािरज होने योग्य है। आदेश आवेदक/अिभयुक्त प्रतीक जायसवाल द्वारा प्रस्तुत िडस्चाजर् प्राथर्नापत्र खािरज िकया जाता है। पत्रावली वास्ते आरोप िदनांक-23.07.2025 को पेश हो।"
4. Considered the essential ingredients to attract the offence under Section 304 IPC which includes Section 304 Part-II and the observations made in the impugned order, based on witnesses of the fact, according to which, the revisionist continued to drive the vehicle despite knowing that one person is stuck in the vehicle and also the settled law on the issue. 5. On being confronted taking note of aforesaid, the learned counsel for the revisionist submitted that he does not want to press this revision and the same may be dismissed as withdrawn. 6. To the aforesaid prayer, there is no objection. 7. Accordingly, the revision is dismissed as withdrawn. September 9, 2025 Vinay/- CRLR No. 990 of 2025 2 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench