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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1104 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेिदका ्शीमती हेमलता की ओर से पिरवाद०सं० 94/2021 अन्तगर्त धारा 328/ 120बी सपिठत धारा 3 भा.दं.सं. एवं 17 सपिठत 3/4 पॉक्सो अिधिनयम, थाना खेराग़ा, िजला आगरा में अि्षम जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेिदका के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्शी जयराम पाण्डेय को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेिदका के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेिदका िनदरॏष है, उसे उपरो्व धाराओं में ्षेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरो्व विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरू्ध कोई िव्षसनीय साष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है िक आवेिदका के िवरु्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी ्ऺि्वया नहीं अपनाई गयी है एवं आवेिदका की ओर से यह भी आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया गया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध गंभीर ्ऺकृ ित का है उन्होंने न्यायालय को यह अवगत कराया की आवेिदका के िखलाफ एन.बी.डब्लू जारी है इसिलए आवेिदका को अि्षम जमानत पर मु्व िकये जाने का कोई औिचत्य ्ऺतीत नहीं होता है। अतः अिभयु्वा का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाय।
5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक Versus Counsel for Applicant(s) : Anil Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Jagjeet Singh Smt. Hemlata .....Applicant(s) State Of U.P. And 4 Others .....Opposite Party(s)
अि्षम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की ्ऺकृ ित और गंभीरता, अिभयु्व का पूवर्वृ्त, अिभयु्व के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयु्व के िवरु्ध उपलब्ध संपूणर् साम्षी का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयु्व की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
6.
वतर्मान मामले में अि्षम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िस्धांतों को ध्यान में रखते हुए और प्षकारों के िव्षान अिधव्वाओं के कथनों, आरोपों की ्ऺकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक संबंिधत िवचारण न्यायालय में आवेिदका के िवरु्ध साष्य पाये जाने के उपरान्त आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया जा चुका है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार ्ि्व िकए यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, त्शुसार आवेिदका का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ अस्वीकार िकया जाता है।
7. उपरो्वानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अि्षम जमानत ्ऺाथर्नाप्ऴ िनरस्त िकया जाता है।
8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
9. कायार्लय को िनदरॏिशत िकया जाता है िक इस आदेश की ्ऺितिलिप संबंिधत िवचारण न्यायालय को अिवलम्ब ्ऺेिषत करें। October 6, 2025 S.Mishra NABAIL No. 1104 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad