RAM BAHADUR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
CRLR/986/2025 · 2025-09-08
Saurabh Lavania
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 163026 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 986 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard. 2. Present revision has been filed by the revisionist to quash the impugned order dated 05.08.2025 passed by the learned Additional Sessions Judge/Special Judge (E.C. Act), Lakhimpur Kheri in Sessions Trial No. 489 of 2022 (State vs. Ram Bahadur), arising out of Case Crime No. 234 of 2022, under Sections 498-A, 306, 323 IPC and Section 3/4 of D.P. Act, Police Station-Kotwali Sadar, District-Kheri. 3. By means of impugned order dated 05.08.2025 passed by the learned Additional Sessions Judge/Special Judge (E.C. Act), whereby the trial Court has allowed the application 12 Kha and revisionist has been directed to be remain present for framing of charge for the offence under Section 304 B IPC.
The order dated 05.08.2025 is extracted here-in-under:-
"प्रा०पत्र 12ख अिभयोजन की ओर से इस आशय का िदया गया िक अिभयुक्त के िवरूद्ध धारा 304बी भा०दं०सं० का भी आरोप िनिमत िकया जाये। पत्रावली में उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक सम्बिन्धत पुिलस अधीक्षक, लखीमपुर खीरी को मृतका की मां की ओर से प्रा०पत्र िदया गया, िजसके आधार पर प्रस्तुत प्रकरण में मुकदमा पंजीकृ त िकया गया। उक्त प्रा०पत्र में स्पष्ट रूप से अंिकत िकया गया है िक अिभयुक्तगण द्वारा मृतका का दहेज को लेकर उत्पीडन िकया जाता था तथा उसको मारा पीटा भी जाता था। उसका उत्पीडन करके , मारपीट करके उसे घर से भगा िदया गया, तब से वह मानिसक तनाव में रहती थी, उसका पित उसे फोन करके और अिधक परेशान िकया करता था िजसके कारण उसकी पुत्री ने 06.03.2022 को अिभयुक्तगण से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उक्त ितिथ को फांसी लगाने से पूवर् मृतका के पित ने मृतका से 104 सेके ण्ड फोन पर बात की थी, उसके पश्चात उसकी पुत्री ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। के स डायरी के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक वािदनी गीता रस्तोगी, मृतका के भाई िरषभ रस्तोगी व सौरभ रस्तोगी तथा अन्य साक्षीगण रमेश रस्तोगी, िवमल रस्तोगी आिद गवाहों ने अपने धारा 161 भा०दं०सं० के बयान में इस तथ्य का समथर्न िकया है िक मृतका का उसके ससुराल में दहेज को लेकर लगातार उत्पीड़न िकया जाता था, िजससे तंग आकर मृतका ने आत्महत्या कर ली। उक्त सभी गवाहों ने अपने धारा 161 दं०प्र०सं० के बयान में तहरीर के तथ्यों का समथर्न िकया। पत्रावली पर जो सी०डी०आर० उपलब्ध है उसके अनुसार भी मृतका ने अिन्तम बार अपने पित से ही करीब 105 सेके ण्ड बात की थी, उसके पश्चात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांिक मृतका ने अपने मायके में फांसी लगाकर आत्महत्या की है, परन्तु पत्रावली पर इस स्तर पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं िजससे यह माना जा सके िक मृतका ने अपने मायके वालों से उत्पीि़डत होकर फांसी लगायी होगी। प्रस्तुत प्रकरण में जो आरोप बनाया गया है उसमें भी धारा 498ए, भा०दं०सं० तथा धारा 3/4 डी०पी० एक्ट का Versus Counsel for Revisionist(s) : Vimal Kishor Singh, Premkant Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ram Bahadur .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru.
Prin. Secy. Home Lko. And Another .....Opposite Party(s)
आरोप बना हुआ है िजससे स्वयं ही यह स्पष्ट है िक पत्रावली पर प्रथम दृष्टया मृतका का दहेज उत्पीडन िकये जाने का साक्ष्य उपलब्ध है। उक्त पिरिस्थितयों में उक्त पत्रावली पर इस स्तर पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य तथा तहरीर के कथनों से स्पष्ट है िक मृतका की मृत्यु अप्राकृ ितक कारणों से िववाह के सात वषर् के अन्दर हुई है तथा मृतका का दहेज को लेकर उसके ससुराल वालों द्वारा लगातार उत्पीडन तथा क्रू रता का व्यवहार िकया जाता था। अतः अिभयुक्त के उपर धारा 304बी भा०दं०सं० का अितिरक्त आरोप बनाया जाना िविधसम्मत है। यहां यह भी उल्लेखनीय है िक इस स्तर िकसी साक्ष्य का गहन मूल्यांकन नहीं िकया जाना, मात्र मजबूत संदेह के आधार पर ही आरोप िवरिचत िकया जा सकता है। माननीय सवोर्च्च न्यायालय ने पलिवन्दर िसह बनाम बलिवन्दर िसह 2009 (1) जे०आई०सी० 3 सु०को० के मामले में मत व्यक्त करते हुए यह कहा है िक आरोप िवरचन के समय न्यायालय की क्षेत्रािधकािरता बहुत ही सीिमत है। इस स्तर पर साक्ष्य का मूल्यांकन अनावश्यक है। मात्र मजबूत संदेह के आधार पर ही आरोप िवरिचत िकया जाना न्यायसंगत है। माननीय सवोर्च्च न्यायालय ने सांधी ब्रदसर् बनाम संजय चौधरी 2008 (3) सी०सी०एस०सी० सु०को० के मामले में यह कहा है िक आरोप िवरचन के समय आरोप िवरिचत करने के प्रक्रम पर प्रथम दृष्टया मामले का परीक्षण िसद्धान्त लागू होगा- यहां तक िक अपराध कािरत करने में अिभयुक्त की संिलप्तता की दृढ़ आशंका भी आरोप िवरिचत करने के िलए पयार्प्त है। इस प्रकार उक्त समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को दृिष्टगत रखते हुए अिभयुक्त के िवरूद्ध धारा 304बी भा०दं०सं० का अितिरक्त आरोप िवरिचत करने का प्रथम दृष्टया साक्ष्य पत्रावली पर मौजूद है। अतः अिभयोजन की ओर मे प्रस्तुत प्रा०पत्र 12ख स्वीकार िकये जाने योग्य है।
आदेश अिभयोजन की ओर से प्रस्तुत प्रा०पत्र 12ख स्वीकार िकया जाता है। अिभयुक्त रामबहादुर के िवरूद्ध धारा 304बी भा०दं०सं० का अितिरक्त आरोप िवरिचत िकये जाने हेतु पत्रावली िदनांक 30.08.2025 को पेश हो। अिभयुक्त िनयत ितिथ पर अवश्य ही व्यिक्तगत रूप से हािजर हो।"
4. On being confronted, after considering the entire facts indicated in the revision as also in the impugned order dated 05.08.2025 particularly with respect to Call Detailed Report, the learned counsel for the revisionist submitted that he does not want to press this revision and the same may be dismissed as withdrawn. 5. To the aforesaid, there is no objection. 6.
Accordingly, the instant revision is dismissed as withdrawn. September 8, 2025 Vinay/- CRLR No. 986 of 2025 2 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Digitally signed by :- VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench