Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 163018 (ALL)

AMAR @ AMAR NIRMAL v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 4 OTHERS

/8020/2025 · 2025-09-23

Saurabh Lavania

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPLICATION U/S 482 No. - 8020 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J. 1. Heard learned counsel for the applicant and Sri Badrul Hasan, learned AGA for the State of U.P. as well as perused the record. 2. The instant application has been preferred seeking following main relief(s):- "Wherefore it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may kindly be pleased to set-aside the order dated 14.07.2025 passed by the Additional Session Judge Court No. 5/Special Judge Gangster Act, Raebareli in Crl. Revision No. 179/2023, Amar Nirmal Versus State of U.P. and another as well as order dated 24.04.2023 in Crl. Misc. Case No. 43974/2022 passed by Additional Chief Judicial Magistrate-4 Raebareli on the applicant, related to P.S. Lalganj, Raebareli on the applicant and also direct to the Learned Additional Chief Judicial Magistrate-4 Raebareli to lodging the first information report against the opposite party no. 2 to 5 in the interest of justice. Contain as Annexure-4 in this petition." 3. Vide order, under challenge, dated 24.04.2023 passed in Crl. Misc. Case No. 43974/2022 (Amar Nirmal vs. Smt. Arti), the Additional Chief Judicial Magistrate- IV, Raebareli (in short "Magistrate") dismissed the complaint case. 4. As per complaint, on 30.04.2021 at about 12.30 P.M., the opposite party No. 2/Smt. Arti W/o Uma Shankar, who is brother of the applicant, and D/o Late Ram Lakhan alongwith other family members namely Vishal Kanaujiya (Constable) S/o Late Ram Lakhan (opposite party No. 3 herein), Arjun Kanaujiya S/o Late Ram Lakhan (opposite party No. 4 herein) and Smt. Rajvati W/o Late Ram Lakhan (opposite party No. 5 herein) forcibly entered in the house of the applicant and hurled abuses and also assaulted the applicant and his old mother, who sustained injuries. The operative portion of the order dated 24.04.2023 reads as under:- "पिरवाद पत्र के समथर्न में पिरवादी ने स्वयं का बयान अं० धारा 200 दं० प्र०सं० तथा गवाहान पी०डब्लू-1 शीलावती, पी०डब्लू-2 सुिमरन का बयान अंतगर्त धारा-202द०प्र०सं० अंिकत कराया है। दस्तावेजी साक्ष्य में स्वयं Versus Counsel for Applicant(s) : Nagendra Singh, Kuldeep Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Amar @ Amar Nirmal .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 4 Others .....Opposite Party(s) का शपथ पत्र, पुिलस अधीक्षक रायबरेली प्राथर्नापत्र की छायाप्रित, रिज० रसीद की मूलप्रित, आधारकाडर् की छायाप्रित प्रस्तुत की हैं। इस प्रकरण में पुिलस द्वारा अन्वेषण अं०धारा-202 (1) दं०प्र०सं० कराया गया। अन्वेषण िरपोटर् के अनुसार पिरवादी के बड़े भाई उमाशंकर की शादी िवपक्षी आरती िनमर्ल से हुयी थी। दोनों के संबंध अच्छे नहीं चल रहे हैं। िदनांक 30.04.2021 को आवेदक अमर िनमर्ल व उसके पिरजनों द्वारा आरती के साथ मारपीट की गयी थी। सूचना प्राप्त होने पर मौके पर पुिलस पहुंची व आरती िनमर्ल के पित उमाशंकर को आमादा फौजदारी होने पर अं०धारा-151 सी०आर०पी०सी० में िगरफतार कर बहवाले रपट नं0 31 समय 13:45 बजे िदनांक 30.04.2021 को दािखल कर अं०धारा-151/107, 116 सी०आर०पी०सी० चालानी िरपोटर् प्रेिषत की गयी। िवपक्षी श्रीमती आरती के द्वारा दािखला तहरीर के आधार पर मु०अप०सं० 140/2021/धारा-323, 504, 506भा०दं०सं० बनाम उमाशंकर िनमर्ल, अमर िनमर्ल, कान्ती, राजेश्वरी के िवरुद्ध पंजीकृ त िकया गया तथा बाद िववेचना आरोपपत्र दािखल िकया गया। पिरवादी द्वारा किथत घटना के संबंध में मौके पर रामू, रामसजन, रामसुमेर आिद लोगों से पूछतांछ की गयी तो लोगों ने बताया उमाशंकर का अपनी पत्नी आरती से संबंध ठीक नहीं है। आये िदन िववाद होता रहता था। लगभग दो वषर् पूवर् आरती के साथ मारपीट हुयी थी, अमर िनमर्ल के साथ कोई मारपीट नहीं हुयी थी। पिरवादी ने अपने बयान धारा-200द०प्र०स० के तहत कहा है िक िवपक्षी आरती उसकी भाभी है। िवशाल, अजुर्न भैया के साले व राजवती भैया की सास है। उसकी भाभी मायके में ही रहती है। उसके भाई व भाभी के बीच कई मुकदमें चल रहे है। घटना िदनाक 30.04.2021 की िदन में 12:30 बजे की है। िवपक्षीगण लालगंज थाने की पुिलस के साथ आए और दरवाजा तोड़कर घर में घुसने का प्रयास िकया। आरती, िवशाल, अजुर्न व राजवती थी। थाने के महेश यादव दरोगा और एक मिहला कांस्टेबल व एक पुरुष कांस्टेबल थे। कांस्टेबल का नाम उसे पता नहीं है। उसकी माता जी को आरती ने धक्का दे िदया। वह मौके पर आया, माता जी को उठाया। िवपक्षीगण गाली गलौज करने लगे। िवशाल ने कहा िक घर में नहीं घुसने दोगे तो जान से मार देगें। शोरगुल सुनकर गांव के लोग इकट्ठा हो गये। काफी लोग इक्टठा हो गये तो सभी िवपक्षी व पुिलस वापस चली गयी। जाते-जाते धमकी दी िक िफर आयेगें। िवशाल पुिलस में कांस्टेबल है। पिरवादी द्वारा अपने बयान में िवपक्षीगण तथा थाना स्थानीय पुिलस द्वारा दरवाजा तोड़कर घर में घुसने का प्रयास िकये जाने का अिभकथन िकया है। पिरवादी ने अपने बयान में िवपक्षीगण द्वारा गाली गलौज िकये जाने व जान से मारने की धमकी िदये जाने का भी अिभकथन िकया गया है। पुिलस द्वारा धारा-202 (1) द०प्र०सं० के अंतगर्त प्रेिषत अन्वेषण िरपोटर् से यह स्पष्ट है िक िदनांक 30.04.2021 को आवेदक के भाई उमाशंकर की िगरफ्तारी हुयी थी। िगरफ्तारी का समय 13:45 अंिकत है। पिरवादी द्वारा पिरवाद पत्र में घटना का समय 12:30 बजे िदन बताया गया है। अथार्त िजस समय की घटना बतायी गयी है उसी के पश्चात पिरवादी के भाई की िगरफ्तारी हुयी तथा पिरवादी की भाभी द्वारा भाई के िवरुद्ध मुकदमा पंजीकृ त कराया गया। िवपक्षीगण पिरवादी की भाभी है, भाभी के भाई व भाभी की मां है। पिरवादी द्वारा अपने बयान में यह बताया गया है िक उसके भाई व भाभी के बीच कई मुकदमें चल रहे हैं। उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है िक पिरवादी द्वारा दबाव बनाने के उद्देश्य से यह पिरवाद प्रस्तुत िकया गया है। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर िवपक्षीगण को तलब िकये जाने का आधार पयार्प्त नहीं है। पिरवादी का पिरवाद अं०धारा-203द०प्र०स० िनरस्त िकये जाने योग्य है। आदेश पिरवादी अमर िनगर्ल द्वारा प्रस्तुत पिरवाद अं०धारा-203 द०प्र०स० िनरस्त िकया जाता है।पत्रावली िनयमानुसार दािखल अिभलेखागार हो।" 5. Vide order, under challenge, dated 14.07.2025 passed in Criminal Revision No. 179/2023 (Amar Nirmal vs. State of U.P. and others), the Additional Sessions Judge, Vth/Special Judge Gangster Act, Raebareli (in short "Revisional Court") dismissed the revision and affirmed the order dated 24.04.2023 passed by the Magistrate. The relevant portion of the order dated 14.07.2025 reads as under:- "4. मैंने िनगरानीकतार् के िवद्वान अिधवक्ता व िवपक्षी संख्या 2 ता 5 के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान सहायक िजला शासकीय अिधवक्ता (फौजदारी) के तकोर्ं को सुना तथा िनगरानी एवं मूल पत्रावली एवं प्रश्नगत आदेश िदनांिकत 24.04.2023 का अवलोकन िकया। A482 No. 8020 of 2025 2 5. िनगरानीकतार् के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया है िक िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत आदेश िविध एवं नैसिगक न्याय के िसद्धान्त के िवपरीत है। िवद्वान िवचारण न्यायालय में िनगरानीकतार् व उसके सािक्षयों के द्वारा अपने बयान अन्तगर्त धारा 200 दं०प्र०सं० व धारा 202 दं०प्र०सं० में किथत घटना का समथर्न िकया गया है। िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा धारा 202 (1) दं०प्र०सं० के अन्तगर्त भी थाने से िरपोटर् मंगायी गयी है, िजसमें पुिलस द्वारा किथत िदनांक, समय व स्थान पर िनगरानीकतार् के भाई उमाशंकर व िवपक्षी आरती दोनों के मध्य सम्बन्ध अच्छे नहीं चलने को लेकर िववाद होने व धारा 151 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त कायर्वाही िकये जाने के तथ्य का उल्लेख दजर् है। इसके बावजूद भी िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा उपरोक्त साक्ष्यों व तथ्यों की अनदेखी करते हुए िनगरानीकतार् के पिरवाद को धारा 203 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त िदनांक 24.04.2023 को िनरस्त िकया गया है, िजस कारण िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत आदेश िविधसंगत नहीं है। अतः उक्त आदेश िनरस्त िकया जाये। 6. िवपक्षी संख्या-2 ता 5 के िवद्वान अिधवक्ता व िवद्वान सहायक िजला शासकीय अिधवक्ता (फौजदारी) द्वारा तकर् प्रस्तुत िकया गया है िक िवपक्षी संख्या-2 िनगरानीकतार् के भाई उमाशंकर की पत्नी है एवं अन्य िवपक्षीगण िवपक्षी संख्या-2 के भाई एवं माता हैं। िनगरानीकतार् एवं उसका भाई िवपक्षी संख्या-2 को अपने साथ सही ढंग से नहीं रखते है, परेशान करते हैं तथा उसके साथ मार-पीट करते है िजसके कारण िवपक्षी संख्या-2 ने िनगरानीकतार् और उसके पिरवार वालों के िवरूद्ध दहेज उत्पीड़न, घरेलू िहसा आिद का मुकदमा दािखल कर रखा है। िनगरानीकतार् एवं उसके भाई उमाशंकर व पिरवार वालों के द्वारा िवपक्षी संख्या-2 के साथ मार-पीट की गई है, िजसके संबंध में िवपक्षी संख्या -2 ने थाने पर मुकदमा दजर् कराया है, िजसमें िववेचना के उपरान्त िनगरानीकतार् एवं उसके भाई उमाशंकर व पिरवार वालों के िवरूद्ध आरोप पत्र दािखल िकया गया है। िनगरानीकतार् द्वारा उसी मुकदमे में दबाव बनाने के उद्देश्य से यह मुकदमा दािखल िकया गया था, िजसमें िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा जांच आख्या मंगायी गयी। उक्त आख्या में िवपक्षी संख्या-2 के साथ घटना होना पाया गया तथा िनगरानीकतार् के द्वारा धारा 202 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त जो गवाह परीिक्षत कराये गये हैं, वह िनगरानीकतार् के टेंट हाउस के कमर्चारी हैं को दृिष्टगत रखते हुए िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा प्रश्नगत आदेश िदनांक 24.04.2023 पािरत करते हुए िनगरानीकतार् के पिरवाद को िनरस्त िकया गया है, िजसमें िकसी भी प्रकार की अवैधािनकता, अवैधता व क्षेत्रािधकार का अभाव नहीं है। िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत प्रश्नगत आदेश तथ्यों व साक्ष्यों का सम्यक िवश्लेषण करते हुए पािरत िकया गया है, जो तकर् संगत व वैध है, िजसमें िकसी प्रकार का हस्तक्षेप िकये जाने की आवश्यकता नहीं है। िनगरानीकतार् की ओर से दािखल िनगरानी में कोई बल नहीं है। अतः िनगरानी बलहीन होने के कारण िनरस्त की जाये। 7. िनगरानी के मामले में िनगरानी न्यायालय को प्रश्नगत आदेश के संदभर् में के वल िदये गये िनष्कषर्, आदेश, दण्डादेश की शुद्धता, वैधता, क्षेत्रािधकार व औिचत्य एवं कायर्वािहयों के संबंध में अिनयिमतता को देखना होता है। इससे स्पष्ट होता है िक िनगरानी न्यायालय को िनगरानी के मामले में सीिमत अिधकािरता प्राप्त है। 8. िवद्वान िवचारण न्यायालय की पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है िक िवद्वान िवचारण न्यायालय में पिरवादी अमर िनमर्ल द्वारा प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 156 (3) दं०प्र०सं० िदनांक 28.06.2021 को प्रस्तुत िकया गया था, िजसे सम्बिन्धत न्यायालय द्वारा िदनांक 06.09.2022 को पिरवाद के रूप में दजर् िकया गया है, िजसके उपरान्त पिरवादी के द्वारा िवद्वान िवचारण न्यायालय में अपने पिरवाद के समथर्न में स्वयं का बयान अन्तगर्त धारा 200 दं०प्र०सं० तथा धारा 202 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त साक्षीगण पी०डब्लू०-1 शीलावती, पी०डब्लू०-2 सुिमरन व पी० डब्लू०-3 िवजय कु मार का बयान अंिकत कराया गया है, िजसके उपरान्त िवद्वान िवधारण न्यायालय द्वारा िदनांक 24.04.2023 को पिरवाद अन्तगर्त चारा 203 दं०प्र०सं० में िनरस्त िकया गया है। पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है िक िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा धारा 202 (1) दं०प्र०सं० के अन्तगर्त भी थाने से िरपोटर् मंगायी गयी जो पत्रावली पर दािखल है। उक्त िरपोटर् में यह उिल्लिखत है िक श्रीमती आरती िवपक्षी संख्या-2 के द्वारा दािखल तहरीर के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 140/2021, अन्तगर्त धारा 323,504,506 भा०द०सं० बनाम उमाशंकर िनमर्ल, अमर िनमर्ल पुत्रगण स्व० छोटे लाल, कान्ती पत्नी अमर िनमर्ल, राजेश्वरी पत्नी स्व० छोटे लाल िदनांक 30.04.2021 को पंजीकृ त िकया गया था, िजसमें अिभयुक्तगण के िवरूद्ध आरोप पत्र संख्या 80/2021 िदनांक 14.05.2021 को दािखल िकया गया। उक्त आख्या में यह भी िलखा है िक िदनांक 30.04.2021 को श्रीमती आरती िनमर्ल के पित उमाशंकर का अमादा फौजदारी होने के कारण दं०प्र०सं० की धारा 151/107/116 में रपट संख्या 31 समय 13:45 पर दािखल कर चालान िकया गया है। िनगरानीकतार् द्वारा अपने प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 156 (3) दं०प्र०सं०/पिरवाद में भी यह उिल्लिखत िकया गया है िक िदनांक 29.04.2021 की रात को प्राथीर् के भाई उमाशंकर को थाना लालगंज में प्रितपक्षीगणं ने बन्द करा िदया। िनगरानीकतार् ने अपने प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 156 (3) दं०प्र०सं०/ पिरवाद में िवपक्षी संख्या-2 श्रीमती आरती के द्वारा पंजीकृ त कराये गये अिभयोग का वणर्न नहीं िकया है और न ही धारा 202 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त अपने भाई उमाशंकर एवं अपनी माँ किचत चोटिहल को बतौर साक्षी परीिक्षत कराया है। िनगरानीकतार् ने अपने भाई और अपनी माँ को बतौर साक्षी परीिक्षत न कराये जाने के संदभर् में कोई स्पष्टीकरण नहीं A482 No. 8020 of 2025 3 िदया है। इसके साथ-साथ धारा 202 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त जो तीनों साक्षी परीिक्षत कराये गये है, यह आपस में एक-दूसरे के साथ घटना स्थल पर पहुंचना कहते है, जबिक उनमें से एक साक्षी काफी दूर का रहने वाला है, उसने अपने बयानों में यह नहीं बताया है िक िजस दौरान उसने किथत घटना देखी यह िकस काम से घटना स्थल से होकर जा रहा था, इसके अितिरक्त इन सािक्षयों ने कु छ िवरोधाभाषी कथन भी िकया है, िजससे यह दिशत होता है िक िनगरानीकतार् द्वारा प्रस्तुत पिरवाद पेशबन्दी में दबाव बनाने के उद्देश्य से प्रस्तुत िकया गया है। िवद्वान िवचारण न्यायलाय द्वारा उपरोक्त तथ्र्यो का उलेख करते हुए तथा यह िवश्लेिषत करते हुए िक िवपक्षीगण पिरवादी की भाभी है, भाभी के भाई व भाभी की मां है। पिरवादी द्वारा अपने बयान में यह बताया गया है िक उसके भाई व भाभी के बीच कई मुकदमें चल रहे है। उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है िक पिरवादी द्वारा दबाव बनाने के उद्देश्य से यह पिरवाद प्रस्तुत िकया गया है। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर िवपक्षीगण को तलब िकये जाने का आधार पयार्प्त नहीं है। पिरवादी का पिरवाद अन्तगर्त धारा 203 दं०प्र०सं० िनरस्त िकया गया है। इस प्रकार िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा िनगरानीकतार् की ओर से दािखल पिरवाद के िनरस्त करने के संदभर् में जो प्रश्नगत आदेश पािरत िकया गया है, वह पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सम्यक रूप से िवश्लेषण करते हुए पािरत िकया गया है, िजसमें िकसी प्रकार की अिनयिमतता व अवैधता नहीं है। इस प्रकार उक्त िवश्लेषण से स्पष्ट है िक प्रश्नगत आदेश पािरत करने में िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा कोई अवैधता, अशुद्धता, अवैधािनकता अथवा अिनयिमतता नहीं की गयी है और ना ही क्षेत्रािधकार सम्बन्धी त्रुिट ही कािरत की गयी है। अतः प्रश्नगत आदेश िदनांिकत 24.04.2023 एक िविधक आदेश है, िजसमें िनगरानी के स्तर पर िकसी भी प्रकार के हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। 9. इस प्रकार उपरोक्त िवश्लेषण से यह स्पष्ट है िक िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा सम्यक् िवश्लेषण करते हुए गुणदोष के आधार पर प्रश्नगत आते िदनांिकत 24.04.2023 पािरत िकया गया है, िजसमें िकसी भी प्रकार की िविधक त्रुिट नहीं है तथा क्षेत्रािधकार संबंधी त्रुिट भी नहीं है और न ही उक्त आदेश में िकसी प्रकार की अवैधता, अशुद्धता, अवैधािनकता अथवा अिनयिमतता है। इस प्रकार प्रश्गत आदेश िदनांिकत 24.04.2023 िविध की दृिष्ट में एक िविधक आदेश है। अतएव उक्त प्रश्नगत आदेश में िकसी भी प्रकार से हस्तक्षेप करने का कोई औिचत्य व आवश्यकता नहीं है, बिल्क प्रश्गत आदेश िदनांिकत 24.04.2023 पुष्ट िकये जाने योग्य है तथा िनगरानीकतार् द्वारा दािखल िनगरानी बलहीन होने के कारण िनरस्त िकए जाने योग्य है। आदेश िनगरानीकतार् की ओर से दािखल प्रस्तुत दािण्डक िनगरानी संख्या-179/2023 अमर िनमर्ल बनाम उ०प्र० राज्य आिद िनरस्त की जाती है तथा िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा पिरवाद संख्या 43974/2022, अमर िनमर्ल बनाम श्रीमती आरती आिद में पािरत प्रश्नगत आदेश िदनांिकत 24.04.2023 पुष्ट िकया जाता है। इस िनणर्य एवं आदेश की एक प्रमािणत प्रित िवद्वान िवचारण न्यायालय को अिवलंब मय मूल पत्रावली के सूचनाथर् एवं आवश्यक कायर्वाही हेतु प्रेिषत की जाए। बाद आवश्यक कायर्वाही िनगरानी पत्रावली िनयमानुसार दािखल दफ्तर हो।" 6. Upon due consideration of the facts of the case, narrated above in brief, and also the submissions advanced by the learned counsel for the parties, this Court finds no force in the instant application. It is for the following reasons:- (i) The opposite party No. 2/Smt. Arti W/o Uma Shankar is the real Bhabhi/sister-in-law of the applicant. (ii) Following cases between opposite party No. 2/Smt. Arti and his husband namely Uma Shankar (brother of the applicant) are pending consideration. (a) Case No. 1872/2023, under Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005. (b) Case No. 779/2022, under Section 125 Cr.P.C. (c) FIR/Case Crime Number 40/2018, under Sections- 498-A, 323, 406, 506 IPC & Section 3/4 D.P. Act lodged by the opposite party No. 2 against the applicant/Amar Nirmal, Uma Shankar Nirmal (husband of opposite party A482 No. 8020 of 2025 4 No. 2), Kanti W/o Amar Nirmal (applicant herein), Rajeshwari W/o Late Chhote Lal. In this case, charge sheet No. 80/2021 dated 14.05.2021 has already been filed. (d) Case Crime No. 140 of 2021 under Sections- 323, 504, 506 IPC against applicant/Amar Nirmal, Uma Shankar Nirmal (husband of opposite party No. 2), Kanti W/o Amar Nirmal (applicant herein), Rajeshwari W/o Late Chhote Lal. In this case also, charge sheet has been filed. (iii) The husband of the opposite party No. 2 was also challaned by the concerned police personnel under Section 151 Cr.P.C. (iv) In the aforesaid facts, to the view of this Court, the aforesaid complaint case was filed just to create pressure upon the opposite party No. 2 and his family members and being so, the same is nothing but an abuse of process of law. As such, the Magistrate and the Revisional Court have not committed any error in passing the impugned orders. 7. For the foregoing reasons, the instant application is dismissed. Cost made easy. September 23, 2025 Arun/- A482 No. 8020 of 2025 5 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- ARUN KUMAR GANGWAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench