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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 162761 (ALL)

RADHESHYAM YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

ABAIL/976/2025 · 2025-09-18

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 976 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री आकाश ितवारी तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम श्री राजेश कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. धारा 438 दं०प्र०सं० द्वारा प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 44 सन 1989 अन्तगर्त धारा 409, 120-B भा०द०िव० थाना हैदरगंज िजला अयोध्या / फै जाबाद में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. प्रस्तुत प्रकरण िदनांक 07.09.1996 को दी गयी तहरीर के आधार पर प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कर संिस्थत हुआ िजसमें यह कहा गया है िक साधन सहकारी सिमित पिलया मलावन के तत्कालीन सिचव रामनायक दुबे ने वषर् 1980-81 से वषर् 1984-85 तक की अविध में रु० 53172.39 पैसे का व्यपहरण कर िलया। प्राथीर् जो भूतपूवर् सिचव, साधन सहकारी सिमित था, द्वारा भी 8311 रुपये का व्यपहरण करने का कथन िकया गया िजसमें से 1193 रुपये 5 पैसे प्राथीर् ने िदनांक 16.12.1988 को सिमित में जमा कर िदया। शेष मूल्य के कपड़ों को प्राथीर् ने रामनायक दुबे को चाजर् में िदया था िजसका स्टाक या िबक्री धन रामनायक दुबे ने सिमित में जमा नहीं िकया। 4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक मुख्य अिभयुक्त रामनायक दुबे की मृत्यु होने के पश्चात िवचारण न्यायालय ने िदनांक 14.04.2025 को प्राथीर् के िवरुद्ध गैर जमानती अिधपत्र िनगर्त िकया। इस बीच में प्राथीर् 67 वषर् की अवस्था प्राप्त कर चुका है। 5. यद्यिप पूवर् ितिथ को िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम ने आपित्त की थी िक प्राथीर् के िवरुद्ध धारा 82 व 83 दं०प्र०सं० के अंतगर्त कायर्वाही हुई है िकन्तु स्पष्ट अनुदेशों के पश्चात आज उन्होंने बताया िक यह कायर्वाही प्राथीर् के िवरुद्ध न होकर अन्य अिभयुक्त के िवरुद्ध थी तथा प्राथीर् के िवरुद्ध मात्र िदनांक 14.04.2025 को गैर जमानती अिधपत्र िनगर्त हुआ है। 6. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। Versus Counsel for Applicant(s) : Akash Tiwari, Arpit Dwivedi, Shivam Srivastava, Subhash Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Radheshyam Yadav .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s) 7. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक प्रथम सूचना िरपोटर् में िकये गये कथनों के अनुसार ही प्राथीर् ने रुपये 1193.05 वषर् 1988 में ही जमा कर िदये थे तथा शेष मूल्य के कपड़ों को तत्कालीन सिचव को चाजर् में था िजससे यह प्रतीत होता है िक प्राथीर् के िवरुद्ध प्रथम दृष्टया कोई देनदारी नहीं बनती थी एवं वतर्मान में प्राथीर् 67 वषर् की अवस्था प्राप्त कर चुका है; प्राथीर् का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पर िरहा िकये जाने का अिधकारी है। 8. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 9. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। September 18, 2025 Ankit ABAIL No. 976 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench