PRADEEP KUMAR v. THE STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.
/8392/2025 · 2025-09-12
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 162309 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8392 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री प्रदीप कु मार ित्रपाठी तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अभय कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. धारा 483 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 134 सन 2025 अंतगर्त धारा 2/3 उत्तर प्रदेश िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 थाना महोली िजला सीतापुर में जमानत की प्राथर्ना की है।
3. गैंग चाटर् में प्राथीर् की दो प्रकरणों में संिलप्तता का उल्लेख है, िजसमें उसे जमानत पर िरहा िकया जा चुका है।
4. एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से 2 आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है, िजन दोनों प्रकरणों में िववेचना के उपरान्त आरोपों की पुिष्ट न होने पर िववेचक द्वारा अंितम आख्या प्रस्तुत कर दी गयी है।
5. जमानत प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसे वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में यह भी कहा गया है िक प्राथीर् न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है।
6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता जमानत की प्राथर्ना का िवरोध िकया है, लेिकन वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके ।
7. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। Versus Counsel for Applicant(s) : Pradeep Kumar Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pradeep Kumar .....Applicant(s) The State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. .....Opposite Party(s)
8. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है।
9. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है।
10.
उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, प्रकरण के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, यह न्यायालय का मत है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है।
11. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
12. आवेदक को उत्तर प्रदेश गैंगस्टसर् एवं असामािजक िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए:- (i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक को िनचली अदालत द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ पर उपिस्थत होना होगा, जब तक िक िवद्वान िनचली अदालत द्वारा उसकी उपिस्थित से छू ट न दी जाए। September 12, 2025 Ankit BAIL No. 8392 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench