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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 161968 (ALL)

MOHAMMAD FAROOQ v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND ANOTHER

NABAIL/1177/2025 · 2025-09-17

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1177 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने पूरक शपथ-पत्र प्रस्तुत िकया िजसे अिभलेख पर िलया जाए। 2. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री अनुज प्रताप िसह तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अभय कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 3. धारा 438 दं०प्र०सं०/482, भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 के अंतगर्त प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 171 सन 2025 अन्तगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471 भा०द०िव० थाना वजीरगंज िजला लखनऊ में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 4. िदनांक 04.07.2025 को प्राथीर् सिहत पांच व्यिक्तयों के िवरुद्ध धारा 173 (4) भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र के आधार पर िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् में यह कहा िक सह-अिभयुक्त मोहम्मद युनूस ने िशकायतकतीर् की भूिम िदनांक 07.02.2023 को एक अन्य सह-अिभयुक्त सहर के पक्ष में िनष्पािदत एक कू टरिचत मुखतारनामे के आधार पर क्रय कर ली है। 5.सह-अिभयुक्त सहर जो िक िशकायतकतीर् की ननद है, ने प्राथीर् के पक्ष में िदनांक 21.08.2023 को एक पंजीकृ त िवक्रय िवलेख िनष्पािदत िकया तथा इस आधार पर प्राथीर् को भी अिभयुक्त बनाया गया। 6. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। 7. िवक्रय-पत्र में िवक्रय धनरािश आठ लाख रूपए तथा सात लाख रुपए कही गई है िजसको प्राप्त होने का कथन िनष्पादक सहर ने िकया है। Versus Counsel for Applicant(s) : Anuj Pratap Singh, Dhiraj Pratap Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mohammad Farooq .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Secy. Home Deptt. Lko. And Another .....Opposite Party(s) 8. एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से बैंक खाते की िववरिणकी संलग्न की गई है िजसमें रुपए आठ लाख की आदयगी का कथन है। 9. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक प्रकरण में िववेचना अभी प्रचिलत है। 10. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए जबिक प्राथीर् के पक्ष में एक पंजीकृ त िवक्रय िवलेख िनष्पािदत हुआ है तथा प्राथीर् ने काफी धनरािश बैंक अतंरण के माध्यम से अदा की है; यिद िवक्रय- पत्र गलत प्रकार से िनष्पािदत हुआ है तब भी प्रथमदृष्टया प्राथीर् एक अपराध का पीिड़त व्यिक्त प्रतीत होता है तथा प्राथीर् का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है। 11. तद्नुसार, अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 12. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। (Subhash Vidyarthi,J.) September 17, 2025 Sumit NABAIL No. 1177 of 2025 2 Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench