MOHAMMAD YAHYA FAROOQUI @ FIROZ FAROOQUI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME AND 2 OTHERS
A227/5175/2025 · 2025-09-03
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 161057 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 5175 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता श्री मोहम्मद सुहैल तथा िवपक्षी के िवद्वान अिधवक्ता श्री अिभषेक कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. इस यािचका द्वारा, यािचकाकतार् ने दांिडक अपील संख्या 110 सन 2024 में अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 10, लखनऊ द्वारा पािरत आदेश िदनांक 31/05/2025 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके द्वारा अपीलकतार्गण द्वारा अपील में अितिरक्त साक्ष्य प्रस्तुत िकए जाने के प्राथर्ना पत्र को िनरस्त कर िदया गया।
3. उपरोक्त प्रकरण िवपक्षी संख्या 2 तथा 3 द्वारा धारा 138 परक्राम्य िलखत अिधिनयम के अंतगर्त प्रस्तुत एक पिरवाद के आधार पर संिस्थत हुआ। पिरवाद संख्या 6964 सन 2019, अितिरक्त न्यायालय संख्या 5, लखनऊ द्वारा पािरत िनणर्य तथा आदेश िदनांक 20/03/2024 से स्वीकार करके यािचकाकतार्गण को दंिडत करने का आदेश पािरत हुआ। यािचकाकतार्गण ने उक्त आदेश के िवरुद्ध दांिडक अपील संख्या 110 सन 2024 प्रस्तुत की। उक्त अपील में यािचकाकतार्गण ने एक प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत करके िवपक्षी पिरवादी को अपने आयकर संबंिधत प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का िनदेर्श देने का अनुरोध िकया, एवं कहा िक पिरवादीगण की आिथक िस्थित ऐसी नहीं थी िक वह ₹40,00,000/- की किथत धनरािश यािचकाकतार्गण को दे सके ।
4. पिरवादी द्वारा यह आपित्त दी गई िक किथत धनरािश को आयकर में प्रदिशत करना अथवा ना करना प्रस्तुत आपरािधक प्रकरण के पिरप्रेक्ष्य से बाहर का िवषय है। अपीलीय न्यायालय को अपील की सुनवाई के समय आयकर से संबंिधत अिभलेखों को अितिरक्त साक्ष्य में मंगाने का िनदेर्श देने का कोई पयार्प्त आधार नहीं है।
5. अपीलीय न्यायालय ने उपरोक्त तथ्यों के िवश्लेषण के उपरांत यह पाया िक अितिरक्त साक्ष्य Versus Counsel for Petitioner(s) : Mohd. Suhail, Ali Sheikh Counsel for Respondent(s) : G.A. Mohammad Yahya Farooqui @ Firoz Farooqui .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home And 2 Others .....Respondent(s)
के प्राथर्ना पत्र को स्वीकार िकए जाने का पयार्प्त आधार नहीं है एवं तदनुसार प्राथर्ना पत्र िनरस्त कर िदया।
6. धारा 391 दंड प्रिक्रया संिहता के प्रावधान िनम्न प्रकार हैंः-
"391.
अपील न्यायालय अितिरक्त साक्ष्य ले सके गा या उसके िलए जाने का िनदेश दे सके गा.- (1) इस अध्याय के अधीन िकसी अपील पर िवचार करने में यिद अपील न्यायालय अितिरक्त साक्ष्य आवश्यक समझता है तो वह अपने कारणों को अिभिलिखत करेगा और ऐसा साक्ष्य या तो स्वयं ले सकता है या मिजस्ट्रेट द्वारा, या जब अपीलीय न्यायालय उच्च न्यायालय है तब सेशन न्यायालय या मिजस्ट्रेट द्वारा, िलए जाने का िनदेश दे सकता है। (2) जब अितिरक्त साक्ष्य सेशन न्यायालय या मिजस्ट्रेट द्वारा ले िलया जाता है तब वह ऐसा साक्ष्य प्रमािणत करके अपील न्यायालय को भेजेगा और तब ऐसा न्यायालय अपील िनपटाने के िलए अग्रसर होगा। (3) अिभयुक्त या उसके प्लीडर को उस समय उपिस्थत होने का अिधकार होगा जब अितिरक्त साक्ष्य िलया जाता है। (4) इस धारा के अधीन साक्ष्य का िलया जाना अध्याय 23 के उपबन्धों के अधीन होगा मानो वह कोई जांच हो।"
7. धारा 391(1) में प्रयुक्त शब्दावली "यिद अपीलीय न्यायालय अितिरक्त साक्ष्य आवश्यक समझता है में शब्द आवश्यक का अथर् यह है िक अपील िनणीर्त करने के िलए आवश्यक"। धारा 391 दं०प्र०सं० के अन्तगर्त अितिरक्त साक्ष्य लेने की शिक्त अपील के उिचत िनणर्य के उद्देश्य के िलए आवश्यक है, िजससे न्यायिहत सुिनिश्चत िकया जा सके । इस संबंध में अपीलीय न्यायालय का िववेकािधकार बहुत िवस्तृत है। अितिरक्त साक्ष्य लेना तब आवश्यक होगा, जब इसके अभाव में न्याय के उद्देश्य िवफल हो जाएं। सम्पूणर् न्याय व्यवस्था का अंितम उद्देशय न्याय के उद्देश्यों को सुिनिश्चत करना है।
8.
प्रस्तुत प्रकरण में धारा 138 परक्राम्य िलखत अिधिनयम के अन्तगर्त पिरवाद से उत्पन्न होता है, िजसमें यािचकाकतार् को दोषिसद्ध करके दंडादेश पािरत हो चुका है। अपील के स्तर पर यािचकाकतार्-अिभयुक्त पिरवादी के आयकर से संबिधत अिभलेखों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का िनदेर्श िदलवाना चाहता है। इस प्रकार से पिरवादी ने दंडादेश को चुनौती देने के िलए एक नया आधार बनाने का प्रयास िकया है, जबिक िवचारण न्यायालय के समक्ष यािचकाकतार् ने ऐसा कोई आधार नहीं रखा था। अपीलीय स्तर पर पूणर्तः एक नया तथ्यामक आधार िलया जाना तथा उस नए आधार पर दोषिसिद्ध तथा दंडादेश को चुनौती देना िकसी भी प्रकार से न्याय के उद्देश्यों सुिनिश्चत नहीं करेगा तथा ऐसी पिरिस्थित में धारा 391 का प्राथर्ना पत्र िनरस्त करने में िवचारण न्यायालय ने कोई त्रुिट अथवा अवैधािनकता कािरता नहीं की है।" A227 No. 5175 of 2025 2
9. उपरोक्त समीक्षा के आलोक में इस न्यायाल का यह सुिनिश्चत मत है िक यािचका बलहीन है।
10. तदनुसार, यािचका अंगीकरण के स्तर पर ही िनरस्त की जाती है। September 3, 2025 Himanshu A227 No. 5175 of 2025 3 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench