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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 161013 (ALL)

RAJU v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/8219/2025 · 2025-09-08

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8219 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता ने पूरक शपथ-पत्र प्रस्तुत िकया िजसे अिभलेख पर िलया जाए। 2. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता सुश्री अनुपमा भदौिरया तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री िवक्रम िसह चौहान को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 3. यह प्राथर्ना-पत्र थाना िमल एिरया (औद्योिगक क्षेत्र) िजला रायबरेली में पंजीकृ त मुकदमा अपराध संख्या 261 सन 2025, धारा 2/3 उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त में प्राथीर् को जमानत पर िरहा करने के िलए प्रस्तुत िकया गया है। 4. गैंग चाटर् में दो प्रकरण में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है िजन दोनों में प्राथीर् को जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने छः अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी थी। 6. पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से यह कहा गया है िक प्राथीर् इनमें से िकसी भी प्रकरण में संिलप्त नहीं था। 7. दो सह-अिभयुक्तों दीपक िवश्वकमार् व राम चन्द्र उफर् िरकू प्रजापित को प्रस्तुत प्रकरण में जमानत पर िरहा करने का आदेश हो चुका है। 8. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है उसे वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। यह भी कहा गया है िक आवेदक न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही Versus Counsel for Applicant(s) : Anupama Bhadauria Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Raju .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s) सदस्य है। 9. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है और प्राथीर् िदनांक 27.06.2025 से न्याियक अिभरक्षा में िनरुद्ध है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। 10. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। 11. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है। 12. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, न्यायालय का मत है िक आवेदक जमानत पर िरहा िकए जाने का हकदार है। 13. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 14. आवेदक को िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन संबंिधत मिजस्ट्रेट / न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार एक व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर उपरोक्त मामले में जमानत पर िरहा िकया जाए: - (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। September 8, 2025 Sumit BAIL No. 8219 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench