SHRI ANIL KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/8179/2025 · 2025-09-09
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 160727 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8179 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री मुके श कु मार ितवारी तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री प्रशांत ित्रपाठी को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
2. धारा 483 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 93 सन 2022 अन्तगर्त धारा 420, 467, 468, 471, 120B भा०दं०सं० थाना कै सरबाग िजला लखनऊ में जमानत की प्राथर्ना की है।
3. िदनांक 21.05.2022 को प्राथीर् तथा एक अन्य व्यिक्त सुधांशु के िवरुद्ध धारा 156(3) दं०प्र०सं० के अंतगर्त प्रस्तुत एक प्राथर्ना-पत्र के आधार पर अंिकत प्रथम सूचना िरपोटर् में कहा गया िक मेससर् थ्रेड्स व हैण्डक्राफ्ट द्वारा िवजया बैंक में ऋण हेतु आवेदन िकया गया था िजसके साझीदार अिभयुक्तगण हैं। िदनांक 17.09.2019 को 30 लाख रुपये की ऑपरेिटव िलिमट स्वीकृ त की गयी थी तथा प्राथीर् ऋण के िलए जमानतदार बना एवं उसने अपने एक भवन का िवक्रय िवलेख बैंक में जमा िकया। ऋण की अदायगी न होने पर बैंक ने िदनांक 02.07.2021 को एक िविधक नोिटस भेजी तथा इसके उपरान्त यह तथ्य प्रकाश में आया िक मूल की बजाय िवक्रय- पत्र की प्रित बैंक में बंधक रखी गयी थी।
4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने 5 अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी थी। उन्होंने कहा िक प्रकरण में अिग्रम िववेचना अभी प्रचिलत है।
6. एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से यह कहा गया है िक किथत 5 प्रकरणों में से 2 प्रकरणों में प्राथीर् अिभयुक्त नहीं है, दो प्रकरणों में िववेचक ने अंितम आख्या प्रस्तुत कर दी है तथा अन्य एक प्रकरण में प्राथीर् का नाम आरोप-पत्र में सिम्मिलत नहीं िकया गया है।
7. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक ऋण एक फमर् को िदनांक 17.09.2019 को स्वीकृ त िकया गया था; िदनांक 02.07.2021 को ऋण की अदायगी न होने के संबंध में एक िविधक नोिटस प्रस्तुत की गयी तथा इसके उपरान्त वषर् 2022 में धारा 156(3) दं०प्र०सं० के अंतगर्त एक प्राथर्ना-पत्र प्रस्तुत िकया गया िजसमें ऐसा कोई कथन नहीं है िक ऋण की वसूली के Versus Counsel for Applicant(s) : Mukesh Kumar Tewari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Shri Anil Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko.
Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s)
हेतु बैंक ने कोई िविधक कायर्वाही की हो; प्राथीर् िदनांक 17.01.2025 से न्याियक अिभरक्षा में िनरुद्ध है तथा अिग्रम िववेचना अभी भी प्रचिलत है, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकये जाने का अिधकारी है।
8. तद्नुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
9. आवेदक को िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन संबंिधत मिजस्ट्रेट / न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार एक व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर उपरोक्त मामले में जमानत पर िरहा िकया जाए:- (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। September 9, 2025 Ankit BAIL No. 8179 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench