YOGESH BHATTA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/8172/2025 · 2025-09-02
Subhash Vidyarthi
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 160684 (ALL) · dailylaw.ai ]
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 160684 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8172 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री सुधाकर प्रकाश तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अशोक कु मार श्रीवास्तव को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. यह प्राथर्ना-पत्र थाना िवकास नगर, िजला लखनऊ में पंजीकृ त मुकदमा अपराध संख्या 069/2023, धारा 2 / 3 उत्तर प्रदेश िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त, में प्राथीर् को जमानत पर िरहा करने के िलए प्रस्तुत िकया गया है।
3. गैंग चाटर् में प्राथीर् की आठ प्रकरणों में संिलप्तता दशार्यी गयी है, िजन सभी में उसको जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है।
4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक प्राथीर् िनदोर्ष है उसे वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। यह भी कहा गया है िक आवेदक न तो िकसी िगरोह का नेता है और न ही सदस्य है।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने जमानत की प्राथर्ना का िवरोध करते हुए कहा िक िववेचना में आरोपों की पुिष्ट हुई है और आरोप-पत्र िदनांक 25.03.2024 को प्रस्तुत िकया जा चुका है।
6. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है और प्राथीर् िदनांक Versus Counsel for Applicant(s) : Sudhaker Prakash Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Yogesh Bhatta .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. .....Opposite Party(s)
30.03.2023 से न्याियक अिभरक्षा में िनरुद्ध है; िववेचना पूणर् हो चुकी है। प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है।
7. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है।
8. पत्रावली में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है िजससे यह उिचत आशंका उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है।
9. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, न्यायालय का मत है िक आवेदक जमानत पर िरहा िकए जाने का हकदार है।
10. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
11.
आवेदक को िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन संबंिधत मिजस्ट्रेट / न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार एक व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर उपरोक्त मामले में जमानत पर िरहा िकया जाए: - (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। September 2, 2025 Ankit BAIL No. 8172 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench