RAMANAND RAM v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
CRLR/937/2025 · 2025-08-29
Saurabh Lavania
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 160638 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 937 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State and perused the record. 2. The present revision under Section 397/401 Cr.P.C. read with Section 438 of BNSS, 2023 has been filed for setting aside the impugned order dated 17.06.2025, passed by the Chief Judicial Magistrate, Lucknow (in short "Magistrate") in Criminal Case No.111296 of 2023 (State of UP Vs. Sheshmani Pandey and others) arising out of Case Crime No.0790/2022 , Under Sections 419, 420, 467, 468, 471 and 120-B IPC, Police Station - Gomti Nagar, District - Lucknow. 3. Vide impugned order dated 17.06.2025, the Magistrate rejected the application moved by the revisionist under Section 239 Cr.P.C. seeking discharge. The relevant portion of the order dated 17.06.2025 reads as under :-
"पत्रावली वास्ते आदेश पेश हुई। प्राथीर्गण / अिभयुक्तगण के िवद्वान अिधवक्ता को उन्मोचन प्राथर्ना पत्र पर सुना गया।
िनस्तारण उन्मोचन प्राथर्ना पत्र अंतगर्त धारा 239 दं०प०सं०
प्राथीर् / अिभयुक्त रामानन्द राम की ओर से उन्मोचन प्राथर्ना पत्र फौजदारीवाद संख्या 111296/2023 मुकदमा अपराध संख्या 790/2022 अन्तगर्त धारा-419, 420, 467, 468, 471, 120-बी भा०दं०सं० थाना-गोमतीनगर लखनऊ के प्रकरण में प्रस्तुत कर कथन िकया गया है िक तथाकिथत घटना की प्रथम सूचना िरपोटर् घटना के 22 माह के पश्चात पंजीकृ त की गयी िववेचक द्वारा िववेचनोपरान्त प्राथीर्/अिभयुक्त के िवरूद्ध अन्तगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-भा०दं०सं० में आरोप पत्र प्रेिषत िकया। प्राथीर् के िवरूद्ध अन्तगर्त धारा 415, 463 भा०दं०सं० के तहत कोई भी आरोप नहीं बनता है। अिभयुक्त को माननीय न्यायालय द्वारा पािरत आदेश िदनांिकत 01.08.2023 के तहत िनयिमत जमानत स्वीकृ त हुई थी। प्रश्नगत सम्पित्त की कािस्टंग धनरािश जमा करवाने सेलडीड के िनष्पादन िवक्रय अनुबंध के पंजीयन का कायर् एल०डी०ए० के अन्य कमर्चािरयों द्वारा िकया गया था। प्राथीर् / अिभयुक्त द्वारा के वल अपनी इम्लाई आई०डी० से प्रश्नगत सम्पित्त का पंजीयन िकया गया था। जबिक Versus Counsel for Revisionist(s) : Mohammad Shahzad Ahmad, Faraz Ahmad, Shamshad Ahmad, Taiba Fatima Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ramanand Ram .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko.
Prin. Secy. Home Lko. And Another .....Opposite Party(s)
उक्त सम्पित्त का एलाटमेन्ट धीरज श्रीवास्तव द्वारा िकया गया था, िजसके पश्चात अजय प्रताप वमार् की इम्लाई आई०डी० से सम्पित्त की रिजस्ट्री हुई थी। सम्पित्त के िववरण को भरने के िलए एल०डी०ए० द्वारा िडजीटेक प्राइवेट िलिमटेड को कायर् सौंपा गया है, िजसके िवरूद्ध फजीर् कायर् के सम्बंध में एल०डी०ए० द्वारा वषर् 2021 में एफ०आई०आर० भी पंजीकृ त करायी गयी है। एल०डी०ए० की वैबसाईट पूणर्तया सुरिक्षत नहीं है, िसके हैक होने की भी सम्भावना रही है। एलाटमेन्ट चेन्ज माडीिफके शन और रिजस्ट्रेशन का कायर् सक्षम प्रािधकारी की स्वीकृ ित िमलने के पश्चात ही मैनुवली सम्पािदत िकया जाता है और कम्प्यूटर आपरेटर के वल उसे कम्प्यूटर पर फीड करता है। प्राथीर् विरष्ठ नागिरक है एंव हृदय रोग से पीिड़त है प्राथीर् को झूटा फं साया गया है। प्राथीर् / अिभयुक्त का उपरोक्त धाराओं के अपराध से उन्मोचन िकये जाने की याचना की गयी है।
िवद्वान अिभयेजन अिधकारी द्वारा उन्मोचन प्राथर्ना पत्र पर इन आशय की आख्या अंिकत की गयी है िक पत्रावली पर सम्यक िववेचना के पश्चात उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र मा० न्यायालय प्रेिषत िकया गया है िजसपर न्याियक मािस्तष्क का प्रयोग करके मा.न्यायालय द्वारा संज्ञान िलया गया है। प्रस्तुत प्राथर्ना पत्र बलहीन व िनराधार है तथा मा.
न्यायालय का समय व्यथर् करने के िलये िदया गया है। अतः मा० न्यायालय से प्राथर्ना पत्र िनरस्त करके आरोप िवरिचत िकये जाने की प्राथर्ना की गयी है। आरोप िवरिचत करके िवचारण िकया जाना न्यायिहत में आवश्यक है।
उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता की बहस सुनी गयी एंव मेरे द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त दस्तावेजों का अवलोकन िकया गया।
माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा कान्ती भद्रा शाह एंव अन्य बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल 2000 िकिमनल एल० जे०पेज 746 (एच०सी०) में यह िविध प्रितपािदत की गयी है िक आरोप िवरिचत िकये जाने के आदेश में ऐसा करने का कारण दशार्ने की आवश्यक्ता नहीं है। अिभयुक्त को उन्मोचन िकये जाने के आदेश में कारण दिशत करने की आवश्यकता है एंव सुपरीटेन्डेन्ट एण्ड िरमेम्ब्रेन्सर ऑफ लीगल एफे नसर् वैस्ट बंगाल बनाम अनील कु मार भुन्जा एंव अन्य ए०आई०आर० 1980 सुप्रीम कोटर् पेज 52 में माननीय सवोर्च्च न्यायालय ने यह िविध प्रितपािदत की है िक मिजस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत सामग्री से अिभयुक्तगण के िवरूद्ध गम्भीर संदेह उत्पन्न होने पर उसके िवरूद्ध आरोप िवरिचत िकया जा सकता है। इस आदेश में माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा प्रितपािदत िविध का अनुपालन िकया जा रहा है। उन्मोचन प्राथर्ना पत्र के िनस्तारण के प्रक्रम में िमनी ट्रायल नहीं िकया जा सकता। उन्मोचन प्राथर्ना पत्र में अिभयुक्त द्वारा उठाये गये अन्य िबन्दुओं की वैधता सम्यक साक्ष्योपरान्त िनधार्िरत की जा सकी है।
उपरोक्त िवश्लेषण की समग्रता को दृिष्टगत रखते हुए न्यायालय का यह िनष्कषर् है िक प्राथीर्/अिभयुक्त रामानन्द राम द्वारा प्रस्तुत उन्मोचन प्राथर्ना पत्र अंतगर्त धारा 239 दण्ड प्रिक्रया संिहता िदनॉिकत 15.06.2024 स्वीकार िकये जाने योग्य नहीं है।
आदेश
प्राथीर्/अिभयुक्त रामानन्द राम की ओर से प्रस्तुत उन्मोचन प्राथर्ना पत्र िदनॉिकत 15.06.2024 उपरोक्त िनष्कषार्नुसार िनरस्त िकया जाता है।? पत्रावली वास्ते सृिजत िकये जाने आरोप िदनॉक 16.07.2025 को पेश हो।"
4. Considered the arguments advanced by learned counsel for the revisionist which in nutshell is to the effect that revisionist has not committed any offence as registration of the property was done by one Dheeraj Srivastava and other formalities viz. costing, depositing of consideration amount, execution of sale deed etc.
were carried out by CRLR No. 937 of 2025 2
other employees, as also the submissions of learned A.G.A. who stated that registration of the property in issue was made by the 'Employee I.D. of revisionist' as such at this stage it cannot be said that the revisionist is innocent and the documents available on record and also the law as laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Amit Kapoor v. Ramesh Chander, (2012) 9 SCC 460; Tarun Jit Tejpal Vs. State of Goa and Another, 2019 SCC OnLine SC 1053; State of Gujarat vs. Dilipsinh Kishorsinh Rao reported in 2023 SCC OnLine SC 1294; Vishnu Kumar Shukla v. State of U.P., 2023 SCC OnLine SC 1582; Hazrat Deen vs. State of Uttar Pradesh and Another; reported in 2022 SCC OnLine SC 1781, wherein the Hon'ble Apex Court has settled the principles with regard to dealing with an application seeking discharge. 5. Upon due consideration of aforesaid, particularly the fact that the 'Employee I.D.' of the revisionist was used for registration of the property in issue and this aspect of the case has not been impeached, this Court is of the view that at this stage it cannot be said that revisionist has committed no offence and therefore this Court is not inclined to interfere in the present case. 6. Present criminal revision is accordingly dismissed. Cost made easy. August 29, 2025 ML/- CRLR No. 937 of 2025 3 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench