KUSUMA DEVI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 2 OTHERS
CRLRD/426/2025 · 2025-08-26
Saurabh Lavania
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 160394 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION DEFECTIVE No. - 426 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Finding reasons to be satisfactory explained in the affidavit filed in support of the application (Crl. Misc. Application No. 2 of 2025) seeking condonation of delay in preferring the instant revision, the same is allowed. Delay in filing the instant revision is hereby condoned. 2. Heard Sri Karunakar Srivastava, learned counsel for the revisionist/Kusuma Devi and Sri Arun Kumar Pandey, learned State Law Officer as well as perused the record. 3. The instant revision has been preferred seeking following main relief(s) :-
"WHEREFORE, on the ground stated above and on the ground which may be urged at the time of hearing, it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may graciously be pleased to allow the criminal revision and set aside the impugned order dated 06/05/2025 passed by the Learned Additional Session Judge Court No.3 Gonda in session trial no. 160/2024 State Versus Peshkar Mishra And others under section 319 Cr.P.C.(358 BNSS) contained with this present criminal revision and further be pleased to direct the learned court concerned to make/conclude the trial of proposed accused persons namely Ashwani Shukla @ Lalu and Vakeel @ Mahesh of Session Trail no. 160/2024 along with other accused person in case crime no. 0346/2023 under section 323,504,506,308 IPC at police station Mankapur District Gonda pending before Learned Additional Session Judge Court No.3 Gonda."
4. Vide impugned order dated 06.05.2025 passed in Sessions Trial No. 160 of 2024 (State of U.P. vs. Peshkar Mishra and others), arising out of Case Crime No. 346/2023, under Sections 323, 504, 506, 308 IPC, the Additional Versus Counsel for Revisionist(s) : Karunakar Srivastava, Shiv Sinha Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kusuma Devi .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko.
And 2 Others .....Opposite Party(s) Sessions Judge, Court No. 3, Gonda (in short "trial court") rejected the application No. 36-Ka preferred by the prosecution in terms of Section 319 Cr.P.C. The relevant portion of the impugned order dated 06.05.2025 reads as under:- "सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। पत्रावली के अवलोकन से िविदत होता है िक यह मुकदमा वािदनी की तहरीर के आधार पवर चार अिभयुक्तगण अश्वनी शुक्ला, पेशकार शुक्ला, वकील उफर् महेश व सुरेश के िवरूद्ध अन्र्तगत धारा-323,504,506 भा०दं०सं० में पंजीकृ त कराया गया है। िववेचक द्वारा बाद सम्पूणर् िववेचना अिभयुक्तगण पेशकार शुक्ला व सुरेश कु मार ितवारी के िवरूद्ध अन्र्तगत धारा-323,504,506,308 भा०द०स० में आरोप पत्र प्रेिषत िकया गया है। वािदनी द्वारा तहरीर प्रदशर् क-1 में यह कथन िकया है िक- "सेवा में, प्रभारी िनरीक्षक महोदय, थाना मनकापुर गोण्डा। महोदय, िनवेदन है िक प्रािथनी कु सुमा देवी पत्नी श्री रामप्रीत चौहान िनवासी ग्वािलयर िग्रन्ट थाना रेहरा बाजार, जनपद बलरामपुर की रहने वाली हूँ। मेरे पित आज िदनांक-11.06.2023 को दतौली (कु डासन) बाजार में डा0 से ड्रिसग कराने करीब 8.30 बजे प्रातः गये थे। मेरे पित ने अभी कु छ समय पूवर् हाइड्रोसील का आपरेशन कराया था, जैसे ही धानेपुर मोड पर मेरे पित टेम्पो से उतरे तभी वहाँ पहले से मौजूद मेरे ही गाँव के अश्वनी शुक्ला पुत्र िनत्यानन्द शुक्ला, पेशकार शुक्ला, वकील उफर् महेश व सुरेश लाठी डन्डों से लैस होकर एक राय होकर मेरे पित को मारने पीटने लगे। मैं अपने बेटे अवधेश चौहान के साथ पीछे सायिकल से आ रही थी िक शोर शराबा सुन कर हम लोग रूको तो देखों से सब मेरे पित मार-पीट रहे है। हम लोगो ने बचाने की गुहार लगाई तभी आस-पास के लोग इकट्ठा हो गये। तभी वह खुद को िघरता देख गाली गेलौज करने हुये जान से मारने की धमकी देते हुये िक इस बात तो तुम बच गये िफर िमलने पर नहीं छोड़ेंगे इन लोगो ने मेरे गाँव ग्वािलयर िग्रन्ट थाना रेहरा बाजार बलरामपुर में िदनांक-31.05.2023 को मार पीट की थी, िजसकी िरपोटर् हमने थाना रेहरा बाजार में की है मेरे िवपक्षी सरकार व बदमाश िकस्म के व्यिक्त है। मैं अपने पित को घायल अवस्था में िजला अस्पताल गोण्डा लेकर गयी जहाँ डाक्टर साहब ने कहा िक पहले थाने जाकर िरपोटर् िलखवाओं तब हलाज होगा, आपके थाने िरपोटर् िलखावाने आयी हूँ। कृ पया िरपोटर् िलख कर कड़ी कानूनी कायर्वाही करने की कृ पा करे। प्रािथनी कु सुमा देवी पत्नी श्री रामप्रीत चौहान िनवासी ग्राम ग्वािलयर िग्रन्ट थाना देहरा
बाजार, िजला बलरामपुर, िनशानी अंगूठा िदनांक-11.06 2023 मोवाइल नं0-9616269583" वािदनी के अिभकथनों और वयानों से यह तथ्य स्पष्ट होता है िक वािदनी के पित घटना के समय अके ले थे। घटना के समय वािदनी के पित रामप्रीत अके ले थे जो िक िचिकत्सक ओम प्रकाश श्रीवास्तव के क्लीिनक पर उपचार हेतु उपिस्थत थे। िववेचक द्वारा घटना के समय दो व्यिक्त मोटर साइिकल पर आना कहा गया है चूँिक डा० ओम प्रकाश घटना के एक मात्र चक्षुदशीर् साक्षी है, उक्त साक्षी के बयान के उपरान्त ही शेष अिभयुक्तगण के िवरूद्ध कािरत अपराध के सम्बन्ध में िनष्कषर् िनकाला जा सकता है। तत्काल मामले के स्तर पर अिभयुक्तगण को तलब िकया जाना न्यायोिचत प्रतीत नहीं होता है। जहाँ तक अिभयोजन साक्षीगण के साक्ष्य का प्रश्न है तो साक्षी। पी०डब्लू०१ कु सुमा देवी अपने बयान में कथन िकया है िक घटना िपछले साथ जून में सुबह लगभग 8 बजे की है। मेरे पित कु डासन बाजार धानेपुर मोड पर डॉक्टर के पास पट्टी बदलवाने आये थे, तभी वहाँ पर महेश उफर् वकील, पेशकार, सुरेश और लालू ने िमलकर मेरे पित को लाठी डन्डा से मार कर मरणसन्न कर िदया। मैने व मेरे लडके ने घटना अपनी आँखों से देख है। बीच बचाव कराया व हल्ला गुहार िकया तब वहाँ पर बहुत से लोग इकट्ठा हुये तब यह लोग चले गये। जाते समय अिभयुक्तगण ने कहा िक ज्यादा बोलोगे तो तुम लोगो को भी जान से मार डालेगे। इस घटना के 8 िदन पहले भी अिभयुक्तगण जमीन की रंिजश को लेकर मेरे घर पर आये थे और मार डालने की धमकी िदये थे.
िजसकी िरपोटर् मैने रेहरा थाने पर िलखाया था। CRLRD No. 426 of 2025 2
िकन्तु िजरह में इस ने कथन िकया है िक घटना के 20-25 िदन पहले मेरे पित ने कु डासन में िस्थत एक क्लीिनक में आपरेशन कराया था। वह पटटी बदलवाने अके ले जाते थे। दूसरे िदन अके ले पट्टी बदलवाने जाते थे। घटना वाले िदन पट्टी बदलवाने सुबह 8 बजे बोलेरो गाड़ी से गये थे और उनके साथ घर का अन्य सदस्य नहीं था। मैं साइिकल से गयी थी। मै सूचना पर नहीं गयी थी। दवा कराने हम भी जा रहे थे। धानेपुर मोड़ पर घटना होते देखा था। मुझे 8 बजे जानकारी हुयी है िक मेरे पित को चोट लगी है। जब मै पहुँची तो मेरे पित जहाँ पड़े थे, वहाँ दस-पन्द्रह लोग मौजूद थे। ओम प्रकाश के क्लीिनक से मेरे पित िकतनी दूर पड़े थे, नहीं बता सकती। मेरे पित सडक के उस पार पड़े थे। िकसी और ने मेरे पित को नहीं उठाया था। अपने पित को मैने व मेरे लडके ने उठाया था। पी०डब्लू02 रामप्रीत ने अपने बयान में कथन िकया है िक मैने हाईड्रोसील का ऑपरेशन कु डऋासन बाजार में श्रीवास्तव डॉक्टर से उनके क्लीिनक पर ऑपरेशन कराया था। िजसके घाव की पट्टी बदलवाने के िलये िदनांक- 11.06.2023 को मै डॉक्टर के यहाँ गया था, जैसे ही चौराहे पर पहुँचा, चौराहे पर बोलेरो से उतरा और धानेपुर बाजार की तरफ 200 मीटर गया तभी अश्वनी शुक्ला, महेश िमश्रा, पेशकार िमश्रा, सुरेश ने मुझे रोक िलया और डन्डा, हॉकी और लात घूंसा से मारा, इन लोगो के मारने से मुझे िसर में गम्भीर चोट लगी थी तथा शरीर के अन्य िहस्सों में गम्भीर चोटे लगी थी। मुिल्जमान के मारने से मै मौके पर बेहोश हो गया था। चोट लगने से मुझे उिल्टयां हो रही थी और िसर में ददर् हो रहा था। िकन्तु िजरह में इस ने कथन िकया है िक जब मुझे चोट लगी उस समय मेरे अलावा वहाँ कोई नहीं था। मैं अके ला था। बुलेरो भी चली गयी थी। अगल बगल भी कोई नहीं था। मेरी खोपड़ी में चॉट लगी मैं बेहोश हो गया। मुझे नहीं पता मुझे कब होश आया। मुझे नहीं पता है िक मुझे गोण्डा लाया िक बलरामपुर ले जाया गया। मुझे अपनी पत्नी से पीजी.आई.
लखनऊ में मुलाकात हुयी। पाँच छः िदन बाद मुलाकात हुयी थी। मैने उनसे नहीं पूँछा िक इस मामले की कोई िरपोटर् िकया है िक नहीं। मेरी पत्नी ने मुझे नहीं बताया िक उन्होने कु छ लोगो के िखलाफ िरपोटर् िलखाया है िक नहीं। मुझे दस िदन बाद पता चला िक मेरी पत्नी ने अश्वनी शुक्ला, पेशकार, वकील उफर् महेश व सुरेश के िखलाफ िरपोटर् िलखायी गयी िक नहीं। मै पन्द्रह िदन बाद लखनऊ से घर आया था। मेरे घर लौटने के तीसरे िदन पुिलस मुझसे िमलने आयी। पुिलस मुझको लेकर कहीं नहीं गयी तथा घटना स्थल भी नहीं गयी। पुिलस के साथ मैं कभी घटना स्थल पर भी नहीं गया था। पी०डब्लू03 अवधेश चौहान ने अपने बयान में कथन िकया है िक घटना वाले िदन िदनांक-11.06.2023 को सुबह करीब 08.00 बजे मेरे िपता जो हॉइड्रोसील का ऑपरेशन कराये हुये थे, उसी की पट्टी बदलवाने डॉ० श्रीवास्तव के यहाँ बोलेरो गाड़ी से गये थे। मैं अपनी माँ को लेकर साइिकल से उनके पीछे गया था। जब मै दूकान के पास पहुँचा तो डाक्टर के क्लीिनक के पास अश्वनी शुक्ला, पेशकार िमश्रा.
सुरेश ितवारी व महेश उफर् वकील मेरे िपता को हॉकी डन्डा व लात मूके से गाली गुप्ता देते हुये मार रहे थे। मैं व मेरी माँ हल्ला गोहार करते हुये अपने िपता को बचाने दौडे तो सभी मुिल्जमान गाली गुप्ता व देख लेने की धमकी देते हुये मौके से चले गये। मेरे िपता के िसर में गम्भीर चोट आयी थी, िजससे यह मौके पर ही बेहाश हो गये थे। िकन्तु िजरह में इस ने कथन िकया है िक जब मैं िपता के पास पहुँचा तो िपता जी बेहोश थे और पीठ के बल पड़े हुये थे। मौके पर लगभग 10-15 लोग मौजूद थे जब में पहुंचा था। मैं उन लोगो को पहचानता नहीं हूँ। कु डासन बाजार में कोई दवाखाना नहीं है, मुझे नहीं मालूम िक वहाँ पर कोई डाक्टर बैठता है या नहीं। एम्बुलेन्स पर 102 नम्बर पर मैने फोन िकया था, एम्बुलेस आने पर िपता जी को लेकर मनकापुर अस्पताल गये थे, जो वहाँ से लगभग 12 िक०मी०दूर है। कु डासन बाजार में गोण्डा सदर अस्पताल िकतना दूर है मुझे नहीं पता है। मनकापुर सरकारी अस्पताल में लगभग १ घन्टा रूके थे, मनकापुर थाने की पुिलस भी वहाँ पर आ गयी थी। मैं अपनी मम्मी के साथ िरपोटर् िलखाने मनकापुर थाने गया था। मनकापुर अस्पताल से थाना लगभग 500 मीटर दूर है। मुझे मालूम है िक मुिल्जम अश्वनी शुक्ला की मम्मी ग्राम प्रधान है। मुझे नहीं मालूम है िक इनका चुनाव अश्वनी िमश्रा से हुआ था या नहीं। मेरे गाँव में अश्वनी शुक्ला नाम के व्यिक्त है। मुझे राजनीित से कोई मतलब नहीं है, इसिलये मैं नहीं बता सकता हूँ िक मेरे गाँव में अश्वनी शुक्ला का चुनाव अश्वनी िमश्रा या अन्य िकसी से हुआ था या नहीं। CRLRD No. 426 of 2025 3
'धारा-319 दं०प्र०सं० में यह उपबिन्धत है िक- धारा-319 दं०प्र०सं०- अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यिक्तयों िवरुद्ध कायर्वाही करने की शिक्त- जहाँ िकसी अपराध की जाँच या िवचारण के दौरान साक्ष्य से यह प्रतीत होता है िक िकसी व्यिक्त ने जो अिभयुक्त नहीं है, कोई ऐसा अपराध िकया है िजसके िलये ऐसे व्यिक्त का अिभयुक्त के साथ िवचारण िकया जा सकता है, वहाँ न्यायालय उस व्यिक्त के िवरूद्ध उसे अपराध के िलये िजसका उसके द्वारा िकया जाना प्रतीत होता है, कायर्वाही कर सकता है"। इस सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा िनणीर्त वाद हरदीप िसह बनाम पंजाब राज्य, (2014) 3 एस.एस.सी.92, (2014) 2 एस.एस.सी. (cri) 86.
(cri) 86. (2014) 1 स्के ल 241 के वाद में यह िनधार्िरत िकया गया है िक "धारा-319 दं०प्र०स० के तहत शिक्त एक िववेकाधीन और असाधारण शिक्त है, इसका प्रयोग संयम से और के वल उन मामलों में िकया जाना चािहये जहाँ मामले की पिरिस्थितयां ऐसा करने की माँग करती हो। इसका प्रयोग इसिलये नहीं िकया जाना चािहये, क्योंिक मिजस्ट्रेट या सत्र न्यायाधीश की राय है िक कोई अन्य व्यिक्त भी उस अपराध करने का दोषी हे सकता है, के वल तभी जब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य से िकसी व्यिक्त के िखलाफ मजबूत और ठोस सबूत सामने आते है, ऐसी शिक्त का प्रयोग िकया जाना चािहये न िक स्वाभािवक और आकिस्मक तरीके से। इस प्रकार धारा-319 द०प्र०सं० के प्रािवधानों का उपयोग करते समय न्यायालय को अत्यन्त सतकर् ता के साथ िवश्लेषण करना चािहये। इस सम्बन्ध में सुस्थािपत िविध है िक धारा-319 दं०प्र०स० के अन्तगर्त न्यायालय को िववेकीय शिक्त प्राप्त है, िजसका प्रयोग बहुत कम मामलो में करना चािहये जहाँ िक प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है वहां अिभयुक्तगण को तलब िकया जाना न्यायोिचत नहीं है। अिभयोजन के उपरोक्त साक्षीगण के बयानों से यह तथ्य स्पष्ट होता है िक घटना स्थल पर के वल चुटेल वािदनी का पित रामप्रीत ही मौजूद था। इसके अितिरक्त अन्य साक्षी घटना के उपरान्त घटना स्थल पर आ गये, जहाँ पर लोग इकट्ठा हो गये थे। चूँिक प्रस्तुत प्रकरण में घटना स्थल चुटैल वािदनी का पित उपिस्थत था, जो िक डॉ० ओम प्रकाश की क्लीिनक पर इलाज कराने गया था। िववेचक द्वारा िववेचना में घटना के दौरान दो व्यिक्त मोटर साइिकल पर आकर मार पीट करना पाया गया है। डॉ० साक्षी ओम प्रकाश का साक्ष्य न्यायालय में अिभिलिखत नहीं िकया गया है। अिभयोजन के उपरोक्त साक्षी घटना स्थल पर बाद में पहुँचे है। दो प्रमुख व्यिक्त घटना में संिलप्त होना िववेचना में पाया गया है। वािदनी द्वारा अपने बयान में िवपक्षीगण के िवरूद्ध एक मुकदमा पहले भी जमीनी रंिजश के कारण पंजीकृ त कराया गया है, जैसा िक वािदनी के बयान में आया है। घटना िदनांक-11.06.2023 के 08.30 बजे की है, िजसके सम्बन्ध में प्रथम सूचना िरपोटर् उस िदन ही दजर् की गयी है। स्वतन्त्र सािक्षयों का साक्ष्य अिभिलिखत िकया जाना शेष है। अतः अिभयोजन की ओर से प्रस्तुत प्राथर्ना पत्र के सम्बन्ध में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के िवश्लेषण के आधार पर यह िनष्कषर् िनकलता है िक वािदनी द्वारा िदया गया शेष अिभयुक्तगण को तलब िकये जाने का प्राथर्ना पत्र वाद के इस स्तर पर स्वीकार िकये जाने योग्य
नहीं है। डाक्टर ओम प्रकाश के बयान अिभिलिखत िकये जाने के उपरान्त शेष अिभयुक्तगण के तलब िकये जाने के िवन्दु पर िवचार िकया जायेगा, तदानुसार प्राथर्ना पत्र वाद के इस स्तर पर िनरस्त िकये जाने योग्य है। आदेश वािदनी का प्राथर्ना पत्र 36क अन्तगर्त धारा-319 दण्ड प्रिक्रया संिहता िनरस्त िकया जाता है। पत्रावली िदनांक- 27.05.2025 को वास्तें शेष साक्ष्य पेश हो।" 5. Relevant brief facts of the case are as under:- (i) In regard to the incident, in which injured/Rampreet Chauhan (husband of the revisionist) sustained injuries, an FIR was lodged by the CRLRD No. 426 of 2025 4
revisionist/Kusuma Devi at Police Station- Mankapur, District- Gonda on 11.06.2023, which was registered as Case Crime No. 346 of 2023. (ii) The aforesaid FIR was lodged after taking note of the allegations levelled in written report against Ashwani Shukla, Peshkar Shukla, Vakeel @ Mahesh and Suresh under Sections 323, 504, 506 IPC. (iii) Upon completion of investigation, the names of Ashwani Shukla @ Lalu s/o Nityanand and Vakeel @ Mahesh s/o Ramdev (opposite party Nos. 2 and 3, respectively, herein) were dropped by the Investigating Officer (in short "IO") and accordingly, the charge sheet was filed only against Peshkar Mishra and Suresh under Sections 323, 504, 506 and 308 IPC. (iv) During trial, an application under Section 319 Cr.P.C., on which the impugned order dated 06.05.2025 has been passed, was preferred by the prosecution for the purposes of summoning accused namely Ashwani Shukla @ Lalu s/o Nityanand and Vakeel @ Mahesh s/o Ramdev. (v) The aforesaid application was preferred based upon the testimony of revisionist/Kusuma Devi (PW-1), injured-Rampreet (PW-2) (husband of revisionist) and Awadhesh Chauhan (PW-3) (son of revisionist).
(vi) The trial court after considering the facts indicated in FIR and also the testimony of PW-1 and PW-3 came to the conclusion that PW-1 and PW-3 were not present at the situs/place of crime and as such, they are not the eye- witnesses of the alleged incident and this aspect of the case has not been impeached in the instant revision. (vi) Rampreet (PW-2) is an injured witness whose testimony is relevant in the instant case. 6. In the aforesaid brief facts, the instant revision has been preferred before this Court challenging the order dated 06.05.2025. 7. Impeaching the impugned order dated 06.05.2025, learned counsel for the revisionist stated that the trial court has committed error in law in not considering the evidence placed before it in its true spirit on the merits of the case and at this stage, mini trial is not permissible. 8. On the contrary, Sri Pandey, learned State Law Officer stated that no interference is required in the impugned order dated 06.05.2025 for the CRLRD No. 426 of 2025 5
reason that application in terms of Section 319 Cr.P.C. was preferred by the prosecution after cross-examination of PW-2, who is the only relevant witness being injured witness, and other witnesses are not the eye-witnesses of the incident and the trial court in considering the entire statement of injured witness namely Rampreet (PW-2) has not committed any error of law while passing the impugned order dated 06.05.2025. 9. Considered the aforesaid and perused the record. 10. Upon perusal of testimony of injured witness namely Rampreet (PW-2), this Court finds that in examination-in-chief, he indicated the name of the accused namely Ashwani Shukla @ Lalu s/o Nityanand and Vakeel @ Mahesh s/o Ramdev. However, in cross-examination, he did not support the case of the prosecution. As per cross-examination, the accused namely Ashwani Shukla @ Lalu s/o Nityanand and Vakeel @ Mahesh s/o Ramdev were not involved in the crime.
Accordingly, this Court finds that the reasons recorded by the trial court in rejecting the application preferred in terms of Section 319 Cr.P.C., to the view of this Court, are correct. The instant revision is accordingly dismissed. No orders as to costs. August 26, 2025 Arun/- CRLRD No. 426 of 2025 6 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- ARUN KUMAR GANGWAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench