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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 159350 (ALL)

DIVYA PRAKASH MISHRA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER

NABAIL/1072/2025 · 2025-08-27

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1072 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री िदनेश कु मार चौधरी तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम श्री राजेश कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. धारा 482 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 169 सन 2025 अन्तगर्त धारा 471, 467, 468 419, 420, 120-B, 504, 506, 447 भा०द०िव० थाना कोतवाली नगर िजला बलरामपुर में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. िदनांक 13.07.2025 को प्राथीर् सिहत 12 व्यिक्तयों के िवरुद्ध िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् में यह कहा गया है िक प्राथीर् के बाबा मो० शाह की मृत्यु िदनांक 14.12.1981 को हुई तथा उनके दो पुत्र रसीद अहमद तथा अजीज अहमद थे, िजन दोनों की मृत्यु हो चुकी है। प्राथीर् के बाबा के नाम दो गाटा संख्या की भूिम थी िजसका नामांतरण नहीं हो पाया था। अिभयुक्तगण ने लेखपाल के साथ िमलकर प्राथीर् के बाबा की जमीन को प्राथीर् के वसीयतनामा के आधार पर िकसी अन्य व्यिक्त को मो० शाह बनाकर तैयार करवा ली एवं िदनांक 26.03.2019 को भूिम का एक िवक्रय- पत्र भी िनष्पािदत करा िदया। इसके उपरान्त उप संचालक चकबन्दी, बलरामपुर का एक फजीर् आदेश िदनांक 10.11.2023 बना िलया गया। 4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। 6. एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से 6 अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है िजनमें से 5 प्रकरणों में उसे जमानत पर िरहा िकये जाने का आदश हो चुका है एवं 1 प्रकरण में उसे अभी तक नोिटस / समन प्राप्त नहीं हुआ है। 7. इस प्रकरण में सह-अिभयुक्त राके श िसह एवं चन्द्र प्रकाश िमश्रा को अपर सत्र न्यायाधीश , बलरामपुर द्वारा पािरत आदेशों से अिग्रम जमानत प्रदान की जा चुकी है। 8. एक सह-अिभयुक्त हरीकान्त िमश्रा को भी सत्र न्यायाधीश द्वारा अिग्रम जमानत प्रदान की जा Versus Counsel for Applicant(s) : Dinesh Kr. Chaudhary Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Divya Prakash Mishra .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another .....Opposite Party(s) चुकी है। 9. सत्र न्यायालय ने प्राथीर् का अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र मात्र इस आधार पर िनरस्त कर िदया िक िजन सह-अिभयुक्तों को अिग्रम जमानत दी गयी, उनका कोई आपरािधक इितहास नहीं था। जबिक प्राथीर् का पूवर् आपरािधक इितहास है। 10. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक सभी अिभयुक्तगण के िवरुद्ध समान प्रकृ ित के आरोप लगाये गये एवं अन्य तीन अिभयुक्तों को अिग्रम जमानत िमल चुकी है, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् भी अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है। 11. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 12. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। August 27, 2025 Ankit NABAIL No. 1072 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench