RAGHAV THRU. NATURAL GUARDIAN/MOTHER ROSHNI SINGH AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO AND 4 OTHERS
HABC/306/2025 · 2025-08-28
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 159289 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW HABEAS CORPUS WRIT PETITION No. - 306 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री पवन कु मार िनगम तथा िवद्वान अितिरक्त शासकीय अिधवक्ता प्रथम श्री राजेश कु मार िसह को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2.भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 226 के अन्तगर्त 18 माह आयु के बालक की तरफ से, उसकी मां द्वारा प्रस्तुत यािचका में कहा गया है िक िवपक्षी संख्या 4 तथा 5 , जो बालक के बाबा एवं दादी हैं, ने बालक को अपनी अवैध अिभरक्षा में रखा हुआ है।
3. यािचका के साथ पक्षों के मध्य िदनांक 28/05/2025 को िनष्पािदत एक समझौते की प्रित संलग्न की गई है, िजसमें यह िलखा हुआ है िक बालक की मां ने स्वयं ही बालक को उसके बाबा-दादी को सौंप िदया, क्योंिक उसके पित की मृत्यु हो चुकी है और वह पुनिववाह करना चाहती है।
4. समझौते में यह भी अंिकत है िक बालक की मां को उससे िमलने का अिधकार रहेगा।
5. यािचकाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता ने कहा िक िवपक्षी संख्या 4 तथा 5, उक्त समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं तथा बालक की मां को बालक से िमलने नहीं दे रहे हैं।
6. समझौते के अनुपालन में मां को बालक से िमलने ना देने मात्र से समझौते के अंतगर्त बालक के बाबा एवं दादी को दी हुई अिभरक्षा अवैध अिभरक्षा नहीं हो जाती है।
7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता प्रथम ने िलिखत अनुदेशों के आधार पर यह कहा िक बालक की मां ने दूसरी शादी कर ली है और उसने स्वयं ही बालक को देख-भाल के िलए उसके बाबा-दादी को सुपुदर् िकया था एवं बालक बाबा-दादी की अवैध अिभरक्षा में नहीं है। अनुदेशों Versus Counsel for Petitioner(s) : Pawan Kumar Nigam, Aadi Nigam, Ram Babu Singh Counsel for Respondent(s) : G.A. Raghav Thru. Natural Guardian/Mother Roshni Singh And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko And 4 Others .....Respondent(s)
की एक प्रित अिभलेख पर रखी जाती है।
8. बालक की अिभरक्षा का प्रश्न एक तथ्यात्मक प्रश्न है, िजसका िनणर्य साक्ष्य के उपरांत िकया जा सकता है, जो िक इस न्यायालय द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण यािचका में संकिलत नहीं िकया जा सकता है।
9. अवैध अिभरक्षा ना िसद्ध हो पाने के कारण यह यािचका पोषणीय नहीं है एवं तदनुसार िनरस्त की जाती है।
10.
यािचकाकतीर् अपने अिधकारों के संबंध में सक्षम न्यायालय के समक्ष वाद प्रस्तुत करने के िलए स्वतंत्र होगी।
August 28, 2025 Himanshu HABC No. 306 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench